बिस्कोमान पर कई दिनों तक कतार में लगने के बाद भी नहीं मिला खाद, निराश होकर लौटे कैमूर के किसान

बिस्कोमान पर कई दिनों तक कतार में लगने के बाद भी नहीं मिला खाद, निराश होकर लौटे कैमूर के किसान

कुदरा प्रखंड के किसानों में यूरिया खाद के लिए हाहाकार मचा हुआ है। किसान सारा काम छोड़कर जहां-तहां यूरिया के लिए भटक रहे हैं फिर भी वह उन्हें नहीं मिल पा रही है। यहां की सहकारी संस्थाओं में मात्र एक बिस्कोमान के द्वारा यूरिया का वितरण किया जा रहा है। लेकिन वहां भी स्थिति यह है कि कई दिनों के बाद यूरिया की कोई खेप आती है और दो-तीन दिनों में समाप्त हो जाती है। मंगलवार को कुदरा के बिस्कोमान में किसानों को बेचने के लिए एक बोरी भी यूरिया खाद नहीं है। सोमवार को आधी रात से ही किसानों ने वहां यूरिया के लिए कतार लगा रखी थी लेकिन जब दिन में सहकारी संस्था का कार्यालय खुला तो दो चार लोगों को खाद देकर उसके समाप्त होने की घोषणा कर दी गई।

कुदरा बिस्कोमान के प्रभारी अरुण कुमार इस संबंध में बताते हैं कि मात्र 1000 बोरी यूरिया खाद आई हुई थी जो 3 दिनों में समाप्त हो गई। यूरिया के लिए किसानों को इतनी परेशानी उठानी पड़ी है कि कई दिन कतार में लगने के बाद भी खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। इसमें उनके समय श्रम और धन तीनों की हानि हो रही है। सकरी गांव के संजय पाल की पत्नी ज्ञानती देवी बताती हैं कि वे बिस्कोमान पर सोमवार को 4:00 बजे भोर से दिन के 2:00 बजे तक कतार में रहीं, लेकिन खाद नहीं मिली। दो दिन पहले भी यूरिया खाद के लिए बिस्कोमान पर कतार में लगी थीं लेकिन खाद तो नहीं मिली उल्टे उनके पास मौजूद 540 रुपए उचक्को ने उड़ा लिए। उसी गांव के विजय पासवान बताते हैं कि कुदरा में यूरिया नहीं मिला तो उन्होंने समीप के जिले रोहतास के शिवसागर में जाकर ब्लैक में खाद खरीद कर काम चलाया।


बड़का रामडीहरा गांव के मनोज कुमार बताते हैं कि बिस्कोमान पर 2:00 बजे रात से ही कतार में लगे रहे लेकिन फिर भी खाद नहीं मिली। अब ब्लैक में भी खाद खरीदने को तैयार हैं लेकिन ब्लैक में भी दुकानदार जान-पहचान वालों को ही खाद दे रहे हैं। किसानों की मानें तो सबसे पीड़ादायक बात यह है कि किसानों की इतनी बड़ी परेशानी के बावजूद उनके हिमायती होने का दावा करनेवाले लोग इसके लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं। पिछले दिनों कुदरा में कई बड़े राजनेताओं का संबोधन व अभिनंदन हुआ लेकिन किसानों का हिमायती बनने वालों में से किसी ने यूरिया की किल्लत का मुद्दा उठाने की जरूरत नहीं समझी।

Edited By: Prashant Kumar


बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई फिर शुरू करेंगे डीसीएलआर

बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई फिर शुरू करेंगे डीसीएलआर

डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) फिर से जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई कर सकेंगे। वे किसी विवादित जमीन के बारे में यह तय करेंगे कि इसका वास्तविक मालिक कौन है। इसे टाइटिल सूट या स्वत्ववाद कहते हैं। करीब आठ साल से चल रहे अदालती विवाद में सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद डीसीएलआर को यह अधिकार मिल गया है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिया है। 

मालूम हो कि बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009 के जरिए डीसीएलआर को भूमि विवाद की सुनवाई करने का अधिकार दिया गया था। व्यवहार न्यायालयों से यह अधिकार वापस ले लिया गया था। इस अधिनियम को महेश्वर मंडल नामक रैयत ने 2013 में पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट में पांच साल तक सुनवाई चली। हाई कोर्ट ने 2018 में आदेश दिया कि डीसीएलआर टाइटिल सूट  की सुनवाई नहीं करेंगे। इस पर अमल करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नवम्बर 2018 में आदेश जारी कर डीसीएलआर को अदालती सुनवाई करने से रोक दिया। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विभाग सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के उस हिस्से को स्थगित कर दिया, जिससे डीसीएलआर को सुनवाई से रोका गया था। राजस्व विभाग ने गुरुवार को कहा कि वह नवम्बर 2019 के अपने आदेश को वापस ले रहा है, जिसके जरिए डीसीएलआर को सुनवाई करने से रोका गया था।  अब डीसीएलआर रैयती मामलों से संबंधित वादों की सुनवाई शुरु करेंगे। वे पूर्व के मामलों में पारित आदेशों का कार्यान्वयन भी करेंगे। 


इन मामलों की होगी सुनवाई

अतिक्रमण, अनाधिकृत संरचना निर्माण, सीमा विवाद, आवंटित बंदोबस्तधारी की बेदखली, भूखंड का विभाजन, सर्वे नक्शा सहित स्वामित्व के अभिलेख में दर्ज विवरण में संशोधन। राजस्व विभाग के ताजा आदेश के बाद इन मामलों की सुनवाई अब व्यवहार न्यायालयों में नहीं होगी।