वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी उद्घाटन

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बिहार सरकार राज्य की छवि बदलने के लिए तैयार है। इसके लिए राज्य में बड़ी कंपनियों से निवेश कराने की रणनीति अपनाई जा रही है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 12 मई को दिल्ली में 'बिहार इन्वेस्टर समिट' का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश की नामी 700 बड़ी कंपनियों को बुलाया गया है। सरकार ने सभी औद्योगिक क्षेत्रों में 'सिंगल विंडो सिस्टम' तैयार कर एक सप्ताह के अंदर सभी जरूरी लाइसेंस देने की नीति अपनाई है। सरकार को अनुमान है कि इससे राज्य की छवि बदलेगी। राज्य में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।


बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि राज्य में लगातार निवेश आ रहा है। कोरोना महामारी के जिस काल में दुनिया भर में मंदी छाई हुई थी, उस काल में भी बिहार में 36 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ। अब इसी क्रम को आगे बढ़ाने के लिए इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया जा रहा है। सरकार इथेनॉल और टेक्सटाइल उत्पादन को विशेष तौर पर बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। इससे राज्य में भारी मात्रा में रोजगार का सृजन होगा।

उन्होंने कहा कि बिहार की श्रमिक शक्ति ने पूरी दुनिया में अपनी क्षमता को साबित किया है। सरकार की कोशिश है कि यह शक्ति अपने गृहराज्य के विकास के लिए भी उपयोग में आये। बिहार के युवाओं ने देश-दुनिया के पटल पर अनेक औद्योगिक इकाइयों का निर्माण किया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में शीर्ष पर हैं। इन कंपनियों को भी बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इथेनॉल के लिए आई 17 कंपनियों में से 12 को बिहार के लोगों के द्वारा संचालित किया जा रहा है।

फिल्मों ने बदला नजरिया

शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार बदल रहा है। अब यह देश के शीर्ष औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल होने के लिए आगे बढ़ रहा है। कुछ स्थानीय लोगों के कारण बिहार की छवि खराब हुई थी, कुछ हिंदी फिल्मों के कारण भी बिहार की पहचान पिछड़ेपन के साथ की जाने लगी थी। लेकिन अब यह स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि अब बिहार की व्याख्या एक नए दृष्टिकोण से की जानी चाहिए। लोगों को बिहार घूमकर राज्य में हो रहे बदलाव को देखना और समझना चाहिए।


पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा.

बढ़ईगीरी हमेशा से एक पुरुष प्रधान उद्योग रहा है, लेकिन पटना की एक ऐसी स्त्री जो बढ़ईगीरी के पेशे में आकर सभी रूढ़ियों को तोड़ रही हैं. अनिशाबाद की रहने वाली लूसी जिसने 2017 में अपने पति को खोया जिसके बाद घर को चलाने वाला कोई ना था. 35 वर्ष की लूसी के लिए काफी मुश्किल था ऐसे समाज में रहकर ये सब कर पाना, जहां स्त्री मजदूरी तो कर सकती है लेकिन बढ़ई का काम नहीं कर सकती. पति के चले जाने के बाद लूसी अकेले पर गई, घर में खाने तक के पैसे ना थे, एक तरफ ये समाज की बंदिशे और दूसरी तरफ लूसी को निहारते हुए उसके चार मासूम बच्चे. इसके बाद लूसी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.सी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था. चार बच्चों के भोजन-पानी की चिंता थी इसलिए, समाज में लगे बंदिशों को तोड़कर अपने पैर पर खड़ा होने का निर्णय किया. इस काम को सीखने के लिए मैंने किसी तरह की ट्रेनिंग नही ली बस मुझे लगा की मैं यह कर सकती हूं तो मैने इस काम को करना प्रारम्भ कर दिया. आज इस काम के जरिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हूं और साथ ही यह बिजनेस भी काफी अच्छा चल रहा है. आज मैं पलंग, सोफा, डाइनिंग टेबल, आदि फर्निचर की सारी चीज़े स्वयं तैयार करती हुं.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था.

स्वाभिमान के साथ काम करती है लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा. लूसी मेहनत के अतिरिक्त काफी स्वाभिमान से काम करती है. लकड़ियों से एक से बढ़कर एक डिजाइन की फर्नीचर चंद घंटों में तैयार कर देती है. जब वो लकड़ियों पर कारीगरी करती है तो इतने लगन से अपने कामों में डूब जाती है की उसे अपने आस पास कुछ नहीं दिखता.