पीएम मोदी ने देश में नयी राजनीतिक संस्कृति पेश की : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिं

पीएम मोदी ने देश में नयी राजनीतिक संस्कृति पेश की : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिं

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को बोला कि पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी (भाजपा) ने वोट बैंक की राजनीति या व्यक्तिपरक प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर राष्ट्र में एक नई सियासी संस्कृति पेश करने की प्रयास की है. 

उन्होंने बोला कि इसका ताजा सबूत सीतामढ़ी को केंद्र के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अनुसार पूरी तरह से इस विचार पर शामिल करना है कि यह कुछ क्षेत्रों में इसके विकास के लिए विशेष ध्यान देने योग्य है. कार्मिक राज्य मंत्री और  भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सिंह ने यहां पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित किया.

उन्होंने बोला कि एक ओर जहां पीएम मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के एक सपने को साकार किया है कि स्वतंत्रता के बाद बीजेपी हिंदुस्तान की आवश्यकताओं के अनुकूल वास्तव में एक लोकतांत्रिक पार्टी बने तो वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं की तीन पीढ़ियों के बलिदान ने इसे पिछले सात दशकों में जीवित रखा है.

उन्होंने बोला कि बीजेपी अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे पार्टी अध्यक्षों के सक्षम संगठनात्मक नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी सियासी पार्टी के रूप में उभरी है. मंत्री ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने वोट बैंक की राजनीति या व्यक्तिपरक प्राथमिकताओं के विचारों से ऊपर उठकर राष्ट्र में एक नई सियासी संस्कृति पेश करने की प्रयास की है.'

सिंह ने बोला कि उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस पवित्र जगह पर पूजा करने का मौका मिला, जो रामायण के मुताबिक मां सीता के साथ निकटता से जुड़ा है. उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट द्वारा जिस तरह से विशेष ध्यान दिया जा रहा है, उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब सीतामढ़ी विकसित होगा और अपने नाम पर खरा उतरेगा, जो भगवान राम और रामराज्य के विचारों को समेटे हुए है.

सिंह ने बोला कि मोदी गवर्नमेंट ने सीतामढ़ी में कोरोना माहामारी के दौरान तमाम बाधाओं के बावजूद सदर हॉस्पिटल में एक सीटी स्कैन मशीन लगावाई और एक नया नर्सिंग विद्यालय भी स्थापित किया.


पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा.

बढ़ईगीरी हमेशा से एक पुरुष प्रधान उद्योग रहा है, लेकिन पटना की एक ऐसी स्त्री जो बढ़ईगीरी के पेशे में आकर सभी रूढ़ियों को तोड़ रही हैं. अनिशाबाद की रहने वाली लूसी जिसने 2017 में अपने पति को खोया जिसके बाद घर को चलाने वाला कोई ना था. 35 वर्ष की लूसी के लिए काफी मुश्किल था ऐसे समाज में रहकर ये सब कर पाना, जहां स्त्री मजदूरी तो कर सकती है लेकिन बढ़ई का काम नहीं कर सकती. पति के चले जाने के बाद लूसी अकेले पर गई, घर में खाने तक के पैसे ना थे, एक तरफ ये समाज की बंदिशे और दूसरी तरफ लूसी को निहारते हुए उसके चार मासूम बच्चे. इसके बाद लूसी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.सी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था. चार बच्चों के भोजन-पानी की चिंता थी इसलिए, समाज में लगे बंदिशों को तोड़कर अपने पैर पर खड़ा होने का निर्णय किया. इस काम को सीखने के लिए मैंने किसी तरह की ट्रेनिंग नही ली बस मुझे लगा की मैं यह कर सकती हूं तो मैने इस काम को करना प्रारम्भ कर दिया. आज इस काम के जरिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हूं और साथ ही यह बिजनेस भी काफी अच्छा चल रहा है. आज मैं पलंग, सोफा, डाइनिंग टेबल, आदि फर्निचर की सारी चीज़े स्वयं तैयार करती हुं.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था.

स्वाभिमान के साथ काम करती है लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा. लूसी मेहनत के अतिरिक्त काफी स्वाभिमान से काम करती है. लकड़ियों से एक से बढ़कर एक डिजाइन की फर्नीचर चंद घंटों में तैयार कर देती है. जब वो लकड़ियों पर कारीगरी करती है तो इतने लगन से अपने कामों में डूब जाती है की उसे अपने आस पास कुछ नहीं दिखता.