बिहार में भी एक्शन में आया बुलडोजर

बिहार में भी एक्शन में आया बुलडोजर

कैमूर: यूपी और दिल्ली के बाद अब बिहार में भी बुलडोजर चलने लगा है कैमूर जिले में अतिक्रमणकारियों पर बुधवार को बुलडोजर चला है यहां मोहनिया थाना क्षेत्र के दनियालपुर कुरई गांव में विद्यालय के एक एकड़ जमीन पर कब्ज़ा करके मकान बना लिया गया था, जिसे अंचलाधिकारी मोहनिया राजीव कुमार सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस बल की उपस्थिति में खाली करा लिया गया

गौरतलब है कि सरकारी भूमि से कब्ज़ा हटाने को लेकर गवर्नमेंट गंभीर है लगातार ऑफिसरों को कब्ज़ा हटाने को लेकर निर्देशित किया जा रहा है सरकारी भूमि से कब्ज़ा हटाने को लेकर रोजाना अंचलाधिकारियों को रिपोर्टिंग भी करना है इसी के अनुसार बुधवार को बुलडोजर चलाकर कब्ज़ा हटाया गया

स्कूल के लिए एक एकड़ सात डिसमिल जमीन किया गया था आवंटित

दरअसल, कैमूर जिले के मोहनिया प्रखंड से महज तीन किलोमीटर दूर दनियालपुर कुरई गांव में विद्यालय के लिए एक एकड़ सात डिसमिल जमीन आवंटित किया गया है सात डिसमिल जमीन पर विद्यालय का भवन बना है वहीं, एक एकड़ जमीन पर ग्रामीणों ने कब्ज़ा कर लिया था इसमें सात मकान बना दिए गए थे अंचलाधिकारी की तरफ से अतिक्रमणकारियों को मकान तोड़कर जमीन खाली करने को बार-बार नोटिस भेजा जा रहा था, लेकिन जमीन खाली नहीं की गई

अतिक्रमण के कारण लौट गई राशि

वहीं, बुधवार को अंचलाधिकारी राजीव कुमार सिन्हा दलबल के साथ दनियालपुर कुरई गांव पहुंचे और सभी मकानों के अंदर से सारा सामान बाहर निकला गया इसके बाद जेसीबी से सारे मकान तोड़ दिए गए बता दें कि विद्यालय भवन बनाने और चारदीवारी निर्माण के लिए कई बार विद्यालय को राशि आवंटित की गई, लेकिन कब्ज़ा होने के कारण काम नहीं हो पाया और राशि फिर विभाग के पास वापस लौट गई

पिछले डेढ़ वर्ष से भेजा जा रहा था नोटिस

अंचलाधिकारी राजीव कुमार सिन्हा ने बोला कि विद्यालय के जमीन पर कब्ज़ा था पिछले डेढ़ वर्ष से कब्ज़ा हटाने को लेकर नोटिस भेजा जा रहा था, लेकिन कब्ज़ा हटाने को लेकर कोई पहल नहीं किया गया तब अंत में विवश होकर जेसीबी के माध्यम से कब्ज़ा को हटाया गया


पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा.

बढ़ईगीरी हमेशा से एक पुरुष प्रधान उद्योग रहा है, लेकिन पटना की एक ऐसी स्त्री जो बढ़ईगीरी के पेशे में आकर सभी रूढ़ियों को तोड़ रही हैं. अनिशाबाद की रहने वाली लूसी जिसने 2017 में अपने पति को खोया जिसके बाद घर को चलाने वाला कोई ना था. 35 वर्ष की लूसी के लिए काफी मुश्किल था ऐसे समाज में रहकर ये सब कर पाना, जहां स्त्री मजदूरी तो कर सकती है लेकिन बढ़ई का काम नहीं कर सकती. पति के चले जाने के बाद लूसी अकेले पर गई, घर में खाने तक के पैसे ना थे, एक तरफ ये समाज की बंदिशे और दूसरी तरफ लूसी को निहारते हुए उसके चार मासूम बच्चे. इसके बाद लूसी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.सी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था. चार बच्चों के भोजन-पानी की चिंता थी इसलिए, समाज में लगे बंदिशों को तोड़कर अपने पैर पर खड़ा होने का निर्णय किया. इस काम को सीखने के लिए मैंने किसी तरह की ट्रेनिंग नही ली बस मुझे लगा की मैं यह कर सकती हूं तो मैने इस काम को करना प्रारम्भ कर दिया. आज इस काम के जरिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हूं और साथ ही यह बिजनेस भी काफी अच्छा चल रहा है. आज मैं पलंग, सोफा, डाइनिंग टेबल, आदि फर्निचर की सारी चीज़े स्वयं तैयार करती हुं.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था.

स्वाभिमान के साथ काम करती है लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा. लूसी मेहनत के अतिरिक्त काफी स्वाभिमान से काम करती है. लकड़ियों से एक से बढ़कर एक डिजाइन की फर्नीचर चंद घंटों में तैयार कर देती है. जब वो लकड़ियों पर कारीगरी करती है तो इतने लगन से अपने कामों में डूब जाती है की उसे अपने आस पास कुछ नहीं दिखता.