विश्वेश्वरैया भवन में लगी भयंकर आग

विश्वेश्वरैया भवन में लगी भयंकर आग

पटना: बिहार की राजधानी पटना से बड़ी समाचार सामने आ रही है. पटना के हड़ताली मोड़ के नजदीक उपस्थित विश्वेश्वरैया भवन में विशाल आग लग गयी है. आग भवन की तीसरी मंजिल पर लगी है. आग लगने की वजहों का पता अभी तक नहीं चल पाया है. समाचार प्राप्त होते ही दमकल विभाग के 15 वाहन पहुंच गए है. प्राप्त समाचार के मुताबिक, कई लोग भीतर ही फंसे थे, जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित निकाल लिया है. इस भवन में कई सरकारी विभागों के कार्यालय हैं. आग लगने की वजह से अफरा-तफरी का माहौल है. बोला जा रहा है कि आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है, क्योंकि इन दिनों विश्वेश्वरैया भवन में मेंटेनेंस का कार्य चल रहा है. आग इतनी घातक लगी है कि कई विभागों के आवश्यक डॉक्यूमेंट्स जलने की संभावना है.

वही बुधवार प्रातः जैसे ही आग लगने की समाचार विभाग के अफसर तथा कर्मचारियों को मिली तो सभी ने दौड़े-दौड़े विश्वेश्वरैया भवन पहुंचे. आग तीसरी मंजिल पर लगने की बात कही जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, आग जिस जगह पर लगी है, वहां लघु जल संसाधन, ग्रामीण कार्य तथा योजना विभाग के कार्यालय है. उस जगह पर कई विभाग के मंत्री तथा अधिकारी बैठते है. आग का असर तीसरी से पांचवीं मंजिल तक है. आग अभी पूरी तरह बुझी नहीं है. आग से कितने का हानि हुआ है, इसका पता चलने में समय लगने की आसार है.

वही आग लगने की समाचार प्राप्त होते ही दमकल विभाग के 15 वाहन घटनास्थल पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गए. भवन के भीतर से बहुत धुंआ निकल रहा है. पांचवीं मंजिल पर कुछ मजदूर भी फंसे थे, किन्तु उन्हें पुलिस ने सुरक्षित निकाल लिया है. 


पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वुमन लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा.

बढ़ईगीरी हमेशा से एक पुरुष प्रधान उद्योग रहा है, लेकिन पटना की एक ऐसी स्त्री जो बढ़ईगीरी के पेशे में आकर सभी रूढ़ियों को तोड़ रही हैं. अनिशाबाद की रहने वाली लूसी जिसने 2017 में अपने पति को खोया जिसके बाद घर को चलाने वाला कोई ना था. 35 वर्ष की लूसी के लिए काफी मुश्किल था ऐसे समाज में रहकर ये सब कर पाना, जहां स्त्री मजदूरी तो कर सकती है लेकिन बढ़ई का काम नहीं कर सकती. पति के चले जाने के बाद लूसी अकेले पर गई, घर में खाने तक के पैसे ना थे, एक तरफ ये समाज की बंदिशे और दूसरी तरफ लूसी को निहारते हुए उसके चार मासूम बच्चे. इसके बाद लूसी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.सी अपने चारों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करने लगी और बढ़ई का काम प्रारम्भ कर दिया.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था. चार बच्चों के भोजन-पानी की चिंता थी इसलिए, समाज में लगे बंदिशों को तोड़कर अपने पैर पर खड़ा होने का निर्णय किया. इस काम को सीखने के लिए मैंने किसी तरह की ट्रेनिंग नही ली बस मुझे लगा की मैं यह कर सकती हूं तो मैने इस काम को करना प्रारम्भ कर दिया. आज इस काम के जरिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हूं और साथ ही यह बिजनेस भी काफी अच्छा चल रहा है. आज मैं पलंग, सोफा, डाइनिंग टेबल, आदि फर्निचर की सारी चीज़े स्वयं तैयार करती हुं.भास्कर से वार्ता में लूसी बताती है की पति के गुजर जाने के बाद दो समय की रोटी का व्यवस्था करना भी काफी कठिनाई था.

स्वाभिमान के साथ काम करती है लूसी

पटना की पहली वुड वर्कर लूसी के काम करने के अंदाज को देख कोई भी उनका दीवाना हो जाएगा. लूसी मेहनत के अतिरिक्त काफी स्वाभिमान से काम करती है. लकड़ियों से एक से बढ़कर एक डिजाइन की फर्नीचर चंद घंटों में तैयार कर देती है. जब वो लकड़ियों पर कारीगरी करती है तो इतने लगन से अपने कामों में डूब जाती है की उसे अपने आस पास कुछ नहीं दिखता.