कोरोना: न्यूजीलैंड ने हिंदुस्तान के साथ प्रारम्भ किया था लॉकडाउन       तस्वीरें: लॉकडाउन से पर्यावरण में पड़ी जान, गंगा-यमुना का पानी हुआ साफ       Honor Play 4T व Play 4T Pro हुए लॉन्च, दोनों में मिलेगी 4,000mAh की बैटरी       महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर मंडराया कोरोना का खतरा       वर्ल्ड हैपिनेस रिपोर्ट के बहाने उदित राज ने साधा निशाना, बोले...       पीएम मोदी ने कहा कि भारत कोरोना से निपटने में अपने मित्रों की हरसंभव मदद करने के लिए तैयार       संकट में मदद देने के लिए US के बाद इजरायल ने हिंदुस्तान को कहा...       जानें कैसे करती है कोरोना से बचाव, 350 रुपये में तैयार की पीपीई किट       जेईई मेन के आवेदनकर्ता को मिला सुनहरा मौका       जम्मू और कश्मीर पर टिप्पणी करने पर हिंदुस्तान ने चाइना को घेरा, कहा...       कोरोना के विरूद्ध दिल्ली सरकार की तैयारी, जानें क्या है 'ऑपरेशन शील्ड'       PM मोदी ने वाराणसी बीजेपी जिलाध्यक्ष को किया फोन, कहा...       कोरोना वायरस के मद्देनजर नेवी में भर्ती पर रोक, एडमिरल करमबीर सिंह बोले...       कोरोना से जंग में लगे पुलिसवालों को मिलेगा 30 लाख का कवर, हरियाणा सरकार बड़ा फैसला!       केरल में COVID-19 वार्ड से पकड़ी गई पांच बिल्लियों की मौत       कोरोना वॉरियर की जान गई तो परिवार को 10 लाख रुपये देगी सरकार       चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत नहीं कर सकते राज्यपाल       OMG! सुपरहीरो बनकर कोरोनावायरस को हराना चाहती हैं ये मॉडल , अंग-अंग दिखाती आई नजर       TV एक्ट्रेस अपने सेक्सी फ़िगर से मचा रही है धमाल, हुस्न का दीदार करते रहे लोग       पीएम मोदी की अपील पर इस मॉडल ने ब्रा और पेंटी पहनकर जलाई मोमबत्तियां, जीत लिया सबका दिल      

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज मांगेंगी सुझाव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज मांगेंगी सुझाव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानि सोमवार से आम बजट की तैयारियों के क्रम में विभिन्न पक्षों के साथ के साथ बैठकों का दौर प्रारम्भ करने जा रही हैं. इस प्री-बजट बैठक में वो इंडस्ट्री, सर्विस, बिजनेस, एग्रीकलचर सेक्टर व इकोनॉमिस्ट के साथ बैठक करेंगी व प्रोत्साहन के लिए सुझाव मांग रही हैं.

सूत्रों ने बताया कि बजट पूर्व विचार विमर्श सोमवार से प्रारम्भ होकर 23 दिसंबर तक चलेगा. सीतारमण सरकार के दूसरे कार्यकाल में अपना दूसरा बजट एक फरवरी को पेश करेंगी. वित्त मंत्रालय के अनुसार सीतारमण सोमवार को प्रातः काल स्टार्टअप्स, फिनटेक व डिजिटल क्षेत्र के अंशधारकों से मिलेंगी. बाद में वह वित्तीय व पूंजी मार्केट क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श करेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का बजट चुनौती पूर्ण होगा क्योंकि देश आर्थिक सुस्ती की चपेट में है.

सूत्रों ने बोला कि इस बार बजट में मुख्य ध्यान आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन पर रहेगा. चालू वित्त साल की दूसरी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी) घटकर 4.5 फीसदी पर आ गई.यह पिछले छह वर्ष का निचला स्थर था. इससे चिंता बढ़ी है. वित्त मंत्री संभवत: 19 दिसंबर को उद्यो मंडल के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग करेंगी. वित्त मंत्रालय ने तैयारी प्रारम्भ की : आम बजट बनाने के लिए वित्त मंत्रालय ने तैयारी प्रारम्भ कर दी है. इसके तहत विभिन्न मंत्रालय व विभाग खर्चों का अनुमान लगा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहन है कि इस बार के बजट बनाना चुनौती पूर्ण रहेगा क्योंकि अर्थव्यवस्था में सुस्ती है.

निजी निवेश को बढ़ाने पर जोर होगा उद्योग सूत्रों ने बोला कि वित्त मंत्री ने उनसे कारोबार सुगमता, नियामकीय वातावरण की वजह से निवेश पर प्रभाव, निर्यात प्रतिस्पर्धा, देरी से भुगतान व अनुबंध के प्रवर्तन, व्यक्तिगत निवेश व वृद्धि में सुधार पर उनके विचार मांगे हैं. बताते चलें कि इस बजट से हर वर्ग को बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं. विकास दर लगातार घट रही है. इससे सरकार का राजस्व संग्रह भी कम हुआ है. ऐसे में बजट लोकलुभावन पेश करना कठिन होगा. इसके चलते वित्त मंत्री को सभी वर्ग को बजट में खुश करना व आर्थिक तेजी के लिए कदम उठाने की बड़ी चुनौती होगी.

सरकार पहले ही कॉरपोरेट कर की दर में उल्लेखनीय कटौती कर चुकी है. उसके बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकार पर्सनल इनकम टैक्स में परिवर्तन के जरिये वेतनभोगी वर्ग को कुछ राहत देगी. उद्योग संगठन मांग कर रहे है कि पर्सनल इनकम टैक्स दाताओं के मुद्दे में इनकम टैक्स छूट की सीमा को मौजूदा के 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए. इससे वस्तुओं व सेवाओं की मांग बढ़ सकेगी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2020-21 का आम बजट अगले वर्ष 1 फरवरी को पेश करेंगी. इस वर्ष 5 जुलाई को उन्होंने पहली बार बजट पेश किया था. अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बजट के बाद भी कई ऐलान किए गए. इनमें कॉर्पोरेट कर 30% से घटाकर 22% करना बहुत ज्यादा अहम था. सीतारमण ने 20 सितंबर को इसकी घोषणा की थी.


सरकार को बड़ा नुकसान! दिल्ली-NCR में पेट्रोल-डीजल और CNG की खपत में भारी गिरावट

सरकार को बड़ा नुकसान! दिल्ली-NCR में पेट्रोल-डीजल और CNG की खपत में भारी गिरावट

लॉकडाउन में वाहनों के पहिए थमने से ईंधन की मांग में भारी गिरावट आई है. दिल्ली एनसीआर में पेट्रोल-डीजल के साथ ही सीएनजी की मांग में 85 से 90 फीसद तक की गिरावट आ गई है. वैसे, सारे दुनिया में यहीं दशा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर पेट्रो पदार्थों की मांग में तेज गिरावट आई है. इसलिए वैश्विक स्तर पर इनके दाम में गिरावट आई है. पर दिल्ली में मांग में जबरदस्त गिरावट का प्रभाव दिल्ली सरकार के राजस्व में दिखना स्वभाविक है.

पेट्रो पदार्थ चीज एवं सेवा कर (जीएसटी) की स्थान वैट में आता है. लॉक डाउन में व्यक्तिगत वाहनों के साथ व्यावसायिक वाहनों को चलाने पर पाबंदी है. केवल महत्वपूर्ण सेवा से जुड़े वाहन व जरूरी महत्वपूर्ण वस्तुएं ले जाते व्यावसायिक वाहनों को ही चलाने की अनुमति है. मांग में ऐतिहासिक गिरावट के चलते वैसे सीएनजी गैस प्रदाता कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने अपने 520 स्टेशनों में से 465 स्टेशनों की सेवा स्थगित कर डी है. इन्हें बंद कर दिया गया है. बाकि के 55 स्टेशनों पर भी सीमित सुविधा ही उपलब्ध है.

हालांकि, दिल्ली में उपस्थित 400 से अधिक पेट्रोल पंप स्टेशन संचालित तो हो रहे हैं पर इनके सभी पंपों की स्थान एक-दो पंप चलाए जा रहे हैं. वहीं, कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है. सामान्य दिनों में एक पेट्रोल पंप पर 15 से 20 कर्मचारियों की स्थान मात्र 2 या 4 कर्मचारी ही सेवा में लगे हैं. पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक अगर ये महत्वपूर्ण सेवा में नहीं आता तो वह अधिकतर पेट्रोल पंप बंद कर देते, लेकिन महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े वाहनों की सुविधा को देखते हुए सभी पेट्रोल पंपों को चलाया जा रहा है. दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल बिजलानी के मुताबिक लॉक डाउन में सड़क पर केवल पुलिस, अस्पताल, महत्वपूर्ण सेवा से जुड़े विभाग व आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करते वाहनों को ही चलने की अनुमति है. मीडिया के वाहनों को चलने की अनुमति है.

दिल्ली सार्वजनिक परिवहन निगम ( डीटीसी) की 25 फीसद बसें भी सड़क पर है. बाकि व्यक्तिगत बसें व ट्रकों के अतिरिक्त सड़क पर आम दिनों में उतरने वाले तकरीबन 90 वाहन सड़कों से गायब है. इसलिए मांग एकदम से घट गई है. दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया ने बताया कि पेट्रोल में जहां 10 फीसद वहीं, डीजल की मांग कठिन से 15 फीसद तक है. जबकि सामान्य दिनों में दिल्ली में पेट्रोल की खपत प्रति माह 10 करोड़ लीटर और डीजल की 8 करोड़ लीटर है.

वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए नहीं लगता कि यह लॉकडाउन इस माह के मध्य तक समाप्त होगा. इसी तरह आम दिनों में आइजीएल स्टेशनों से दिल्ली-एनसीआर में 34-35 लाख किलो सीएनजी की खपत होती है. जो घटकर कठिन से 4-5 लाख किलो ही रह गई है. इसी को देखते हुए आइजीएल ने अपने अधिकतर स्टेशन बंद कर दिए हैं. वैसे, पेट्रोल पंप स्टेशनों पर उपस्थित सीएनजी पंप चल रहे हैं. वहां भी मांग कमोबेश यहीं है. मांग में इस कमी का प्रदेश सरकार के राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा.

दिल्ली सरकार द्वारा 27. 5 फीसद पेट्रोल और डीजल पर 16. 5 फीसद वैट वसूला जाता है. जो प्रदेश सरकार के राजस्व का बड़ा भाग होता है. एक पेट्रोल पंप के मालिक निशिथ गोयल ने बोला कि मौजूदा समय में पेट्रोल पंप चलाना कठिन भरा है, क्योंकि कर्मचारी भी कोरोना को लेकर डरे हुए हैं. उनका लोगों से सीधे सम्पर्क होता है. वैसे, उन्हें महत्वपूर्ण बचाव बंदोवस्त दिए गए हैं. बुजुर्ग व मधुमेह, ब्लडप्रेसर के मरीजों को भी सेवा से अलग रखा गया है.