रेलवे में होगा आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव!

रेलवे में होगा आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव!

नई दिल्ली: रेलवे के भिन्न-भिन्न विभागों में लगातार हो रहे कथित विवादों को दूर करने ​के लिए रेल मंत्रालय एक प्रस्ताव लेकर आया है। CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रस्ताव के तहत रेल मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सभी विभागों का विलय करके एक किया जाएगा। हालांकि, इसमें हेल्थ व सर्विस विभाग नहीं शामिल होंगे। रेल बजट को यूनियन बजट में शामिल करने के बाद रेल मंत्रालय का यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा रिफॉर्म होगा।

रेलवे सर्विस में अब केवल 1 ही कैडर -मंत्रालय के इस निर्णय के मुताबिक, भारतीय रेलवे सर्विस में अब केवल एक ही कैडर होगा। मौजूदा समय में कुल 8 कैडर हैं, जिनमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, स्टोर, पर्सनल, ट्रैफिक, सविल इंजीनियरिंग सेवा के कैडर शामिल हैं।

 
कैबिनेट को भेजा गया प्रस्ताव -इस विषय में कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। इस प्रस्ताव में यह भी जानकारी दी गई है कि मेडिकल व रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी आरपीएफ विभाग को अभी भी स्वतंत्र ही रखा गया है। इस निर्णय से इन दोनों विभागों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

रेलवे बोर्ड संख्या भी घटकर होंगे 5 -यहीं नहीं, इसके अतिरिक्त रेलवे बोर्ड की संख्या को भी 8 से घटाकर 5 बोर्ड करने का निर्णय लिया गया है। अब ट्रैफिक, रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन व इंजिनियरिंग को हटाकर ऑपरेशन, बिजनेस डेवलपमेंट, ​ह्यूमन रिसोर्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर व फाइनेंस बोर्ड ही होंगे।

 चेयरमैन व रेलवे बोर्ड के पद पर ​इनकी हो सकती है नियुक्ति-
हालांकि, चेयरमैन, रेलवे बोर्ड के पद जारी रहेंगे, लेकिन संभव है कि इसके लिए सिविल सर्विस या बाजार से किसी एक्सपर्ट की नियुक्ति की जाएगी। इस मुद्दे से संबंधित सूत्रों ने यह जानकारी दी है। रेलवे के इस कदम की आहट को देखते हुए कुछ आंतरिक अधिकारियों ने मंत्रालय के इस निर्णय की प्रभावशीलत पर सवाल खड़ा किया है।

अधिकारियों ने दिया अपना तर्क-इन अधिकारियों का बोलना है कि इन पदों की अपनी कुछ पेंचीदगियां होती है। ऐसे में कैसे दो अलग स्ट्रीम्स को एक विलय किया जा सकता है? उनका बोलना है कि ट्रैफिक, एकाउंट ्स, व्यक्तिगत सर्विस को इंजिनियरिंग, मेकैनिकल, इलेक्ट्रिक्वल विंग में मर्ज करने से रेलवे के कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ेगा।

 विभागीय मतभेद की वजह से टला वंदे भारत का अगला प्रोजेक्ट -गौरतलब है कि रेलवे के ही मेकैनिकल व इलेक्ट्रिकल विभाग की बीच टकराव की वजह से वंदे भारत की आगामी प्रोजेक्ट्स को वैसे के लिए बंद कर दिया गया है व इसकी टाइमलाइन को आगे के लिए बढ़ा दिया गया है। सरकार की तरफ से यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है कि रेलवे में कथित तौर पर विभागीय मतभेदों को समाप्त कर बेहतर कार्यप्रणाली लाया जाए।

इस वर्ष रेलवे को अब तक 21 हजार करोड़ रुपये का घाटा -पैसेंजर सेक्टर में रेलवे वैसे भारी घाटे के दौर से गुजरना पड़ रहा है। माल ढुलाई कारोबार भी इस वर्ष तय किए गए लक्ष्य से कम ही रहा है। इस वर्ष नवंबर माह तक इसमें 21,000 करोड़ रुपये की कमी रही है। वित्तीय हालत में कोई सुधार नहीं होते दिखाई देने पर अब मंत्रालय कुछ रिफॉर्म लाकर रेलवे को पटरी पर लाने का कोशिश कर रहा है। रेलवे इस कोशिश में लगा हुआ है कि वो अपने रिसोर्सेज को कम कर बड़े बोर्ड से भी छुटकारा पाए।