खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने से हो सकती है गैस और एसिडिटी की प्रॉब्लम

खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने से हो सकती है गैस और एसिडिटी की प्रॉब्लम

नया नुस्खा बेशक नहीं है लेकिन कारगर है इसकी गारंटी है। खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पीने की सलाह आपने कई दफा सुनी होगी लेकिन इसे फॉलो करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। हम में से ज्यादातर लोग खाने के बीच में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते हैं या फिर खाना खत्म होते ही तुरंत फ्रिज का या नॉर्मल पानी गट-गट करके पी लेते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि पानी पीने के बाद आपको अच्छा एहसास होता है लेकिन ये आदत आपके पाचन सिस्टम के लिए बिल्कुल भी सही नहीं। अक्सर गैस, एसिडिटी होने की वजह एक वजह आपकी ये आदत हो सकती है। तो भोजन करने के कम से कम 30 मिनट बाद या एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए।

खाने के तुरंत बाद क्यों नहीं पीना चाहिए पानी

खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना पाचन क्रिया को कमजोर बना देता है। पानी शीतल प्रवृत्ति का होता है, इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी पीने से इंसुलिन का लेवल बढ़ सकता है। पानी भोजन को ग्लूकोज में बदल देता है जो मोटापे की वजह बन सकता है। भोजन के तुरंत बाद पानी की अत्यधिक मात्रा एंजाइम और एसिड की भोजन से होने वाली क्रिया में रूकावट डाल सकती है। इसलिए भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी पीने की सलाह नहीं दी जाती है। बॉडी को भोजन द्वारा सही मात्रा में न्यूट्रिशन एब्जॉर्ब करने आधे से एक घंटे की जरूरत होती है।

खाना खाने के बाद पानी पीने से अमाशय की ऊर्जा खत्म हो जाती है, जिसके कारण पाचन-क्रिया सही ढ़ंग से नहीं हो पाती। इस कारण पेट में गैस, एसिडिटी जैसी तमाम बीमारियां घर कर जाती हैं। डॉक्टरों की मानें तो खाना खाने के बाद खाने के पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए थोड़ा वक्त समय देना चाहिए। अगर तुरंत पानी पी लिया जाए तो शरीर को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिलता।


अपनों से दूर रहकर लोग दिमागी तौर पर बीमार हो रहे, ब्रिटेन की सरकार ने मेंटली फिट रहने के 8 तरीके बताए

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कोरोना ने बड़ी संख्या में लोगों को दिमागी तौर पर बीमार किया है। यही वजह है कि अब सरकारें लोगों को इससे उबारने के लिए आगे आ रही हैं। अमेरिका के बाद ब्रिटेन की एजेंसी पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने लोगों को दिमागी बीमारी से निजात पाने के तरीके बताए हैं। फोकस लाइफ-स्टाइल पर है।

एजेंसी का कहना है कि यदि आप मानसिक परेशानियों से बचना चाहते हैं तो लाइफ-स्टाइल में बदलाव जरूर करें।

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने मानसिक समस्याओं से निपटने के 8 तरीके बताए

1. डेली रूटीन पर काम करें

हमें डेली रूटीन को बहुत ज्यादा तरजीह देनी चाहिए। इसलिए सबसे पहले इसके बारे में गंभीरता से सोचें। फिर ऐसा डेली रूटीन प्लान बनाएं, जो हमें पॉजिटिव रखे। आमतौर पर डेली रूटीन हमारे काम के हिसाब से होता है। यह अप्रोच गलत है। काम जरूरी है, लेकिन हेल्थ उससे ज्यादा जरूरी है। फोकस इस बात पर करें कि दिनभर में कितना समय खुद को दे रहे हैं?

इसलिए दिन की शुरुआत एक्सरसाइज से करें और हेक्टिक शेड्यूल में रिफ्रेश, रेस्ट और पॉजिटिव महसूस करने के लिए ब्रेक जरूर लें।

2. अपनों से जुड़े रहें

मानसिक समस्याओं की सबसे बड़ी वजहों में से एक अपनों से दूर हो जाना भी है। एक स्टडी के मुताबिक, ज्यादातर वर्किंग लोगों के पास अपनों के लिए वक्त नहीं है। ये दूरी मानसिक शांति यानी मेंटल पीस को खत्म कर देती है। इसलिए अपनों से कनेक्ट रहने की कोशिश करें। इसके लिए सोशल मीडिया और वीडियो चैट का सहारा भी ले सकते हैं।

3. दूसरों की मदद करें

आसपास के लोगों की मदद करने के बारे में सोचें। इससे दूसरों को फायदा होगा और आपको भी अच्छा महसूस होगा। हमें दूसरों की समस्याओं और चिंताओं को सुनना और समझना चाहिए। इससे आपको निगेटिव फीलिंग नहीं आएगी। आप आशावादी होंगे, अकेलेपन और एंग्जाइटी से भी उबर पाएंगे।

4. अपनी चिंताओं के बारे में बात करें

महामारी जैसे हालात में चिंता, डर और असहाय महसूस करना बहुत सामान्य है। हर किसी ने इसे अनुभव भी किया होगा। स्टडी में पता चला है कि तनाव साझा करने से मानसिक दबाव आधे से ज्यादा कम हो जाता है। समस्याएं शेयर करने से सुझावों का आदान-प्रदान होता है। इससे भी तनाव कम होता है। इसलिए समस्याओं को शेयर करने में संकोच न करें।

5. फिजिकल हेल्थ पर ध्यान दें

आप मानसिक तौर पर कैसा महसूस कर रहे हैं, यह आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है। इसलिए फिजिकल हेल्थ पर जरूर फोकस करें। आप घर पर सेल्फ-चेकअप के लिए बेसिक चीजें जैसे थर्मामीटर, बीपी मशीन और फर्स्ट-एड किट रख सकते हैं।

6. स्मोकिंग, ड्र्ग्स और अल्कोहल छोड़ने के लिए मदद लें

ड्रग्स, अल्कोहल और स्मोकिंग की लत भी मानसिक समस्या है। इससे डिप्रेशन में खुदकुशी का रिस्क भी होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए किसी ऐसे साथी से सपोर्ट मांगे, जो आपकी आदतों पर नजर रखे और लत से रोके।

यह ऐसी आदत है, जिसे तलब के चलते आप छोड़ नहीं पाते। ऐसे में दूसरों के प्रति जवाबदेह बनना कारगर तरीका है।

7. पूरी नींद लें

न सोना या कम सोना भी मानसिक बीमारी की वजह बन सकता है। बिस्तर पर जाने के बाद सोचना, चिंता करना, तनाव में रहना और मोबाइल यूज करना गलत है। यह स्लीप टाइम को कम कर देता है। इससे लोग इनसोम्निया के शिकार हो जाते हैं, ये भी मानसिक बीमारी है।

अच्छी और पूरी नींद लेने से मानसिक बीमारियों का जोखिम 50% तक कम हो जाता है। इसलिए अच्छी नींद की आदत डालें।

8. वह काम करें, जो अच्छा लगता हो

जब आप अकेलापन, एंग्जाइटी या तनाव महसूस कर रहे हों तो उसमें ज्यादा न उलझें। इसे जितना महसूस करेंगे, उतना परेशान होंगे। ऐसी स्थिति में आप अपना पसंदीदा काम करें, जैसे- कोई फेवरेट हॉबी, कुछ नया सीखने की कोशिश करें। इससे आप तनाव को कम करने में सफल हो जाएंगे।

एंग्जाइटी दुनिया की सबसे बड़ी मानसिक समस्या

मानसिक बीमारी से जुड़ी हजारों समस्याएं हैं। एंग्जाइटी ऐसी बीमारी है जो दुनिया के 3.76% मानसिक पीड़ितों में है। दूसरे नंबर पर डिप्रेशन है, जो दुनिया के 3.44% मानसिक पीड़ितों में है। तीसरे नंबर पर एल्कोहल यूज डिसऑर्डर है। आप सोच रहे होंगे कि शराब और ड्रग्स का लेना क्या कोई मानसिक समस्या है? हम पहले भी इससे जुड़ी एक खबर कर चुके हैं। भोपाल में साइकेट्रिस्ट सत्यकांत त्रिवेदी के मुताबिक ड्रग्स की लत एक मानसिक बीमारी है।


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