सर्दी में एलर्जी से परेशान हैं तो जानिए बचाव के उपाय

सर्दी में एलर्जी से परेशान हैं तो जानिए बचाव के उपाय

सर्दी में लोगों को एलर्जी बेहद परेशान करती है। किसी को प्रदूषण से एलर्जी है तो किसी को खाने-पीने की चीजों, पेट डॉग या फिर खास महक से एलर्जी होती है। सर्द मौसम में तापमान में गिरावट के कारण हवा से एलर्जी के तत्व जल्दी नहीं हटते जिससे, सर्दी, खांसी, नाक बहना, स्किन एलर्जी, अस्थमा और भी कई तरह की एलर्जी हो सकती है। सर्दी में हम ठंड से बचने के लिए बंद जगह पर ज्यादा वक्त गुजारना पसंद करते है, जो एलर्जी का सबसे बड़ा कारण बनता है। लंबे समय तक बंद घर में रहने से हवा में मौजूद धूल के कण, फफूंद, पालतू जानवरों की रूसी और कॉकरोच ड्रॉपिंग एलर्जी का कारण बनते हैं। संवेदनशील स्किन वाले लोगों को स्किन एलर्जी होने का खतरा ज्यादा रहता है। सर्दी में रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं जिससे हाथ व पैर में ब्लड सर्कुलेशन बाधित होता है। खून की कमी से ही हाथ या पैर की उंगलियों में सूजन होने लगती है। इस मौसम में फंगल इन्फेक्शन होने से खाज या खुजली होने की आशंका रहती है।


एलर्जी क्या है?

एलर्जी किसी खाने की चीज, पालतू जानवर, मौसम में बदलाव, कोई फूल-फल-सब्जी के सेवन, खुशबू, धूल, धुआं, दवा यानी किसी भी चीज से हो सकती है। इस स्थिति में हमारा इम्यून सिस्टम कुछ खास चीजों को स्वीकार नहीं कर पाता और नतीजा ऐसे रिऐक्शन के रूप में दिखता है।

एलर्जी के लक्षण:

सर्दी में गले की सर्दी, नाक बहना, सर्दी जुकाम होना एलर्जी के लक्षण है। एलर्जी की वजह से शरीर में लाल-लाल चकत्ते, नाक और आंखों से पानी बहना, जी मितलाना, उलटी होना या फिर सांस तेज-तेज चलने से लेकर बुखार तक हो सकता है।


सर्दी में खाने की चीजों से एलर्जी:

कुछ लोगों को खाने की चीजों जैसे कि मूंगफली, दूध, अंडा आदि खाने से एलर्जी हो सकती है। जिस चीज से एलर्जी है, उसे खाने के बाद जी मिचलाना, शरीर में खुजली होना या पूरे शरीर पर दाने और चकत्ते निकलने जैसी समस्या हो सकती है। एक्सपर्ट की माने तो गांवों में रहनेवालों के मुकाबले शहरों में रहने वाले लोगों में एलर्जी की समस्या ज्यादा होती है। उनके शरीर का इम्यून सिस्टम ज्यादा डिवेलप नहीं हो पाता।


कैसे बचाव करें:

अगर आपको धूल मिट्टी या फिर धुएं से एलर्जी है तो घर से बाहर निकलते समय नाक पर रुमाल या फिर मास्क का इस्तेमाल करें। घर में साफ-सफाई के लिए वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें।
सर्दी में अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखें। मौसमी फल, हरी सब्जी, गाजर आदि का सेवन करें, और पानी पर्याप्त मात्रा में पीएं।
स्किन को एलर्जी से बचाने के लिए रात में सोने से पहले बॉडी पर मॉइश्चराइजर लगाएं, इससे त्वचा में नमी बरकरार रहेगी।
पर्दे, चादर, बेडशीट व कालीन को नमी से बचाने के लिए धूप में रखें, ताकि इस्तेमाल होने वाली इन चीजों से आपको एलर्जी नहीं हो सके।
पालतू जानवरों से दूर रहें, जानवरों को एलर्जी है, तो घर में नहीं रखें।
सर्दी में धूप में बैठे, घर को हमेशा बंद न रखें, घर को हवादार बनाएं, ताकि साफ हवा आती रहे।
घर की साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। खिड़कियों में महीन जाली लगवाएं और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें क्योंकि खुली खिड़की से कीड़े और मच्छर आपके घर में घुस सकते हैं। 


क्या Vitamin-D कोरोना वायरस से बचाव कर सकता है? जानें

क्या Vitamin-D कोरोना वायरस से बचाव कर सकता है? जानें

कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते कहर और ख़तरे की वजह से अचानक हर तरफ खाने की ऐसी चीज़ों की चर्चा होने लगी है जिससे इम्यूनिटी को बढ़ावा मिल सके। कोरोना वायरस का अभी कोई इलाज नहीं मिल सका है, और इसी वजह से लॉकडाउन का ख़त्म होना इस वक्त मुश्किल लग रहा है। यही वजह है कि सभी लोग इस जानलेवा इंफेक्शन से बचने और अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन्स और सप्लीमेंट का सहारा ले रहे हैं। 

पिछले महीने हुई एक रिसर्च के मुताबिक, विटामिन-डी सप्लीमेंट कोरोना वायरस जैसी सांस संबंधी बीमारी के प्रतिरोध में अहम भूमिका निभा सकता है। आइरिश मेडिकल जनर्ल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, विटामिन इस बीमारी की गंभीरता को कम कर सकता है। साथ ही इस रिसर्च में व्यस्कों को दिन में 20-50 माइक्रोग्राम विटामिन-डी खाने की सलाह दी गई है।   

वहीं, इंग्लैंड पब्लिक हेल्थ ने कोरोना वायरस के चलते लोगों को वसंत और गर्मियों के पूरे मौसम में विटामिन-डी की खुराक लेने की सलाह दी है। इससे पहले की हम विटामिन-डी से जुड़े फायदों और ये कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने में कितनी कारगर के बारे में बात करें, ये जानना ज़रूरी है कि आखिर विटामिन-डी है क्या?

क्या है विटामिन-डी और इसकी ज़रूरत क्यों पड़ती है?

विटामिन-डी को सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है क्योंकि यह सूर्य के प्रकाश की प्रतिक्रिया में शरीर द्वारा उत्पन्न किया जाता है। यह एक घुलनशील विटामिन के समूह में आता है यानी यह हमारी वसा कोशिकाओं में संचित रहता है और लगातार कैल्शियम के चयापचय (मेटाबोलिज्म) और हड्डियों के निर्माण में उपयोगी होता है। इसलिए कहा जाता है कि यह शरीर में कैल्शियम तथा फॉस्फेट के अवशोषण को बढ़ाता है। ये हमारे इम्यून सिस्टम में भी अहम रोल अदा करता है, इसलिए अच्छी और मज़बूत इम्यूनिटी के लिए इसका सेवन ज़रूरी है। दालें, अंड़े, मच्छली और मटन विटामिन-डी के अच्छे स्त्रोत हैं। इसके अलावा ये दूध और अनाज में भी होता है।

क्या कोरोना वायरस से बचाव कर सकता है विटामिन-डी?

विटामिन-डी प्रतिरक्षा प्रणाली के समुचित कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो वायरस और कीटाणुओं के खिलाफ शरीर में सबसे पहले बचाव करती है। रिसर्च की मानें तो विटामिन में एंटी-इंफ्लामेटरी और इम्यूनोरेगूलेटरी गुण पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम के काम के लिए बेहद ज़रूरी हैं। विटामिन-डी के कम स्तर को संक्रमण, बीमारियों और प्रतिरक्षा संबंधी स्थितियों के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है। कई शोध में पाया गया है कि विटामिन-डी इम्यूनिटी को बढ़ावा देता है और साथ ही सांस संबंधी इंफेक्शन से बचाता भी है। 

क्या लॉकडाउन की वजह से विटामिन-डी की कमी हो सकती है?

इस वक्त लॉकडाउन की वजह से सभी लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हैं। क्योंकि घर में पर्याप्त सूरज की रौशनी नहीं मिल पाती है, इसलिए ये सवाल खड़ा होना लाज़िम है कि क्या लॉकडाउन की वजह से शरीर विटामिन-डी की कमी हो रही होगी? हालांकि, लॉकडाउन को छोड़ दिया जाए, तब भी ज़्यादातर लोग ऐसे मौसम में बाहर निकलना पसंद नहीं करते हैं और घरों या ऑफिस में एसी में बैठना पसंद करते हैं। यही वजह है कि ज़्यादातर लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है। 

भारत में विटामिन-डी की कमी आम

पूरी दुनिया में विटामिन-डी की कमी आम समस्या है। खासकर, भारत में ये 80-90 प्रतिशत है। इसके पीछे संतुलन डाइट का न होना, पर्याप्त सूरज की किरणें न मिलना और त्वचा में मेलानिन ज़्यादा होना अहम वजह है। इसके अलावा किडनी और लिवर की समस्या की वजह से भी विटामिन-डी की कमी होती है।

क्या होता है विटामिन-डी की कमी से

इसकी कमी से हड्डियां कमज़ोर होती है, जिसकी वजह से हड्डी टूटने के आसार बढ़ जाते हैं। इसके अलावा विटामिन-डी की कमी से इंफेक्शन के अलावा डायबिटीज़, उच्च रक्त चाप, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, डिसलिपिडेमिया और कैंसर भी हो सकता है।

विटामिन-डी की कमी को कैसे रोकें

सूरज की किरणें लें, लॉकडाउन के बावजूद सूरज में कुछ देर बैठें, इसके लिए चाहें वॉक करें या छट पर वर्कआउट। इसके साथ ही संतुलित आहार लें। अपने खाने में दालें, दही, मच्छली, अंडे और मीट जैसी चीज़ें शामिल करें और साथ ही मौसमी सब्ज़ियां और फल। 


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