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जानलेवा हंता वायरस, 5 सवालों से समझिए इसके लक्षण, बचाव व वजह

जानलेवा हंता वायरस, 5 सवालों से समझिए इसके लक्षण, बचाव व वजह

हेल्थ डेस्क। दुनियाभर में कोरोनावायरस के खौफ के बीच वायरस हंटावायरस से संक्रमण का मुद्दा सामने आया है. चाइना के ग्लोबल टाइम्स ने ट्वीट करके बताया कि युनान प्रांत में हंटावायरस की वजह से एक शख्स की मृत्यु हो गई. शख्स सोमवार को शैंगडॉन्ग प्रांत से युनान आया था. डब्ल्यूएचओ ने हंतावायरस से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए हैं जानिए क्या है यह वायरस व कैसे यह संक्रमित करता है

#Q-1) क्या है हंता वायरस व कैसे फैलता है?
अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) के मुताबिक, यह ऐसे समूह का वायरस जो खासतौर पर चीजों को कुतरने वाले जीवों (रोडेंट्स) से फैलताहै जैसे चूहे व गिलहरी. अमेरिका में इस वायरस को न्यू वर्ल्ड हंता वायरस व यूरोव और एशिया में ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस के नाम से जानाजाता है. यह हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम नाम की बीमारी की वजह है. हंता वायरस के कई प्रकार हैं जो रोडेंट्स की भिन्न-भिन्न प्रजातियों सेफैलते हैं. वायरस के वाहक चूहे के यूरिन, मल व लार के सम्पर्क में आने पर इंसान संक्रमित हो जाते हैं.

सीडीसी के मुताबिक, यह वायरस तीन तरह से फैलता है-

  • पहला: अगर वायरस का वाहक चूहा किसी इंसान को काट ले, हालांकि ऐसे मुद्दे कम ही सामने आते हैं.
  • दूसरा : किसी स्थान या वस्तु पर मौजूदचूहे का मल-मूत्र यालार के सम्पर्क मेंइंसान आता है व अपने नाक-मुंह को छूता है.
  • तीसरा : अगर इंसान ऐसी वस्तु खाता है जिस पर चूहे का मल-मूत्र या लार उपस्थित हो.

#Q-2) कौन ज्यादा खतरनाक हंता वायरस या कोरोना?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, हंता वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता फिरभी कोरोना वायरस के मुकाबले ज्यादा खतरनाक है. अमेरिका के सेंटर फॉरडिसीज कंट्रोल के मुताबिक, हंता वायरस भी जानलेवा है. दुनिया स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण मृत्यु काग्लोबल रेट सटीक तरह से पता लगने में कुछ वक्त लग सकता है. वैसे इसे 3-4% के बीच माना जा रहा है. वहीं, फरवरी में जारी रिपोर्टके मुताबिक नए कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित चाइना में यह दर 3.8% थी जो अब 4% पार कर चुकी है. वहीं, अमेरिका में तेजी सेफैल रहे कोरोना वायरस का डेथ रेट 1.2% है. यानी कि कोरोना वायरस के इन्फेक्शन होने पर बचने के चांस बहुत ज्यादा ज्यादा होते हैं.

वैज्ञानिकों ने अब तक हंतावायरस के 5 स्ट्रेन खोजे हैं, इनमें से सबसे ज्यादा खतरनाक अराराक्वॉरा वायरसहै जिसका इन्फेक्शन होने पर डेथ रेट54% पाया गया है. वहीं, एक दूसरा स्ट्रेन सिन नॉम्ब्रे वायरस है जिसके केस में डेथ रेट 40% है. तीसरा स्ट्रेन हंतान वायरस होता है. इसकाडेथ रेट 5-10% के बीच है. इन तीनों में से किसी से इन्फेक्शन होने पर मृत्यु का खतरा कोरोना की तुलना में कहीं ज्यादा होने कि सम्भावना है.

#Q-3) हंता वायरस कोरोना से कितना अलग है?
दोनों में एक बड़ा फर्क है कि कोरोना वायरस इंसान से इंसान में फैलता है जबकि हंता चूहों या गिलहरियों से फैलता है. दुनिया स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक,यदि कोई व्‍यक्ति चूहोंके मल, पेशाब आदि को छूने के बाद अपनी आंख, नाक व मुंह को छूता है तो उसके हंता वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है.सेंटर फॉरडिसीज कंट्रोल के मुताबिक, यह आमतौर पर इंसान से इंसान में नहीं लेकिन चिली व अर्जेंटीना में इसके दुर्लभ मुद्दे सामने आए थे. जिसमें संक्रमित मरीज से दूसरे इंसान में फैलने की बात सामने आई थी. यह हंता वायरस का एक प्रकार एंडेस वायरस था.

#Q-4) कैसे संक्रमित करता है हंता वायरस?
हंता वायरस आदमी के चूहे या गिलहरी के सम्पर्क में इंसान के आने से फैलता है. हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों में होता है. इस वायरस केकारण चूहों में कोई बीमारी नहीं होती, लेकिन इस वायरस के कारण इंसानों की मृत्यु हो जाती है. अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल केमुताबिक, घर में चूहों की मौजूदगी इस वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ाती है.

#Q-5) कैसे पहचानें कि हंता वायरस से संक्रमित हैं?
तेज बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, पेट में दर्द, उल्टी, डायरिया जैसे लक्षण संक्रमण का संकेत करते हैं. लक्षण सामने आने के बाद उपचार में देरीकरने पर फेफड़ों में पानी भरना प्रारम्भ हो जाता है व सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. चाइना में भी मृत्यु से पहले पीड़ित में ऐसे ही लक्षणनजर आए थे.

#Q-6) चूहे की कौन सी प्रजाति हंता वायरस का वाहक है?

सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के मुताबिक, चूहों की चार प्रजातियां ऐसी हैं जो हंता वायरस का वाहक हैं. इनमें सबसे अहम हैं अमेरिका में पाया जाने वाला डियर माउस. यह आम चूहों के मुकाबले थोड़ा छोटा होता है. इसके शरीर की लंबाई 2-3 इंच होती है. शरीर के मुकाबले इसकी आंख व कान बड़े होते हैं. साथ शरीर पर बाल अधिक होते हैं. अन्य तीन प्रजातियों में कॉटन रैट, राइस रैट व व्हाइट फूटेड माउस शामिल हैं.

#Q-7) किस तरह के इलाके में वायरस का खतरा अधिक?

सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के मुताबिक, के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों जहां पेड़-पौधे अधिक हैं वहांहंता वायरस के फैलने का खतरा अधिक होता है.

#Q-8)क्या इसकी कोई वैक्सीन है?
सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के मुताबिक, अब तक इसकी वैक्सीन तैयार नहीं हो सकी है व न ही कोई तय उपचार है. ऐसे मरीजों को विशेष केयर की आवश्यकता होती है व ऑक्सीजन थैरेपी दी जाती है. जितनी जल्दी मुद्दा पकड़ में आता है उतना ही बेहतर है.


नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम होने कि सम्भावना है कमजोर

नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम होने कि सम्भावना है कमजोर

कोरोना वायरस (coronavirus) से बचाव के लिए सारे देश में लॉकडाउन (Lockdown) है। लॉकडाउन के चलते कई लोग वर्क फ्रॉम होम भी कर रहे हैं। इस दौरान वो लैपटॉप की स्क्रीन या फिर अपने मोबाइल फोन के सम्पर्क में कई घंटे रहते हैं। कार्य समाप्त होने के बाद भी कुछ लोग मोबाइल स्क्रॉल करते रहते हैं जिससे वजह से उन्हें नींद आने में बहुत ज्यादा कठिनाई होती है। रात को देर से सोना व प्रातः काल शिफ्ट के लिए जल्दी उठ जाने से कई बार लोगों की नींद पूरी नहीं होती है जिसका सीधा प्रभाव न केवल उनके चेहरे व स्वभाव पर पड़ता है बल्कि उनकी इम्यूनिटी क्षमता भी बहुत ज्यादा निर्बल हो जाती है। लेकिन क्या आप कम सोने के नुकसान जानते हैं। एनडीटीवी के हवाले से आइए जानते कम नींद लेने के नुकसान

इम्यूनिटी सिस्टम पर पड़ता है बुरा असर:
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप कम नींद लेते हैं तो इम्यूनिटी बहुत ज्यादा कम हो सकती है। हालांकि निर्बल इम्यूनिटी के पीछे व भी कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं।

सेक्सुअल डिसऑर्डर की समस्या:

नींद कम ले पाने का सीधा असर लोगों की यौन क्षमता पर भी पड़ता है। दरअसल, टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की वजह से ही स्त्रियों व पुरुषों में यौन संबंध बनाने की ख़्वाहिश होती है। जब आप सोते हैं तो टेस्टोस्टेरॉन का लेवल बढ़ जाता है।

याददाश्त होती है कमजोर:
कम नींद लेने से लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसका सीधा प्रभाव उनकी याददाश्त पर भी पड़ता है। लोगों की लॉन्ग टर्म मेमोरी प्रभावित होती है व वो बातों को बहुत ज्यादा जल्दी भूलने लगते हैं।

निर्णय लेने की क्षमता होती है प्रभावित:
कम नींद लेने से आपकी फैसला लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कई बार आपने शायद ऐसा महसूस किया होगा कि आप किसी बात को लेकर क्विक डिसिजन नहीं ले पा रहे हैं व फैसला लेने के बाद भी आप उसे लेकर श्योर नहीं हैं। नींद कम लेने की वजह से अक्सर फैसला लेते वक्त लोग असमंजस का शिकार हो जाते हैं।

बढ़ सकता है स्ट्रेस:
कम नींद लेने का सीधा प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। दरअसल, सोने से दिमाग फ्रेश रहता है व ऊर्जा से भरा रहता है। लेकिन जब नींद पूरी नहीं हो पाती है तो दिमाग भी फ्रेश नहीं महसूस करता हैं। यही वजह है कि कम नींद लेने से स्ट्रेस बढ़ सकता है।