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अगर बुखार हो तो लापरवाही न करें, जानें ये खास बातें

अगर बुखार हो तो लापरवाही न करें, जानें ये खास बातें

बुखार कई रोगों का इशारा या कारण होता है, जैसे वायरल, डेंगू या मलेरिया. लक्षणों के अनुसार बुखार की दस किस्म हैं, जिनका इलाज व समयावधि अलग हैं. बुखार कैसा भी हो थोड़ी-सी भी लापरवाही तकलीफ बढ़ा सकती है.

स्वाइन फ्लू -
मौसमी फ्लू के रोगी इसके जल्द शिकार होते हैं. रोगी के सम्पर्क या सांस के जरिए स्वाइन फ्लू तेजी से फैलता है. इसलिए एहतियान संक्रमित व्यक्तिसे दूरी बनाएं.

सीजनल फ्लू -
मौसम और तापमान बदलने से बुखार आता है. सामान्यत: दो दिन सीजनल फ्लू परेशान करता है लेकिन लापरवाही तकलीफ बढ़ा सकती है. इसलिए चिकित्सक को दिखाएं.

फ्लू -
कंपकपी, नाक बहना, सिरदर्द फ्लू के प्रारंभिक लक्षण हैं. इसे लो ग्रेड फीवर माना जाता है. इसके लिए डॉक्टरी सलाह से दवा लें. खांसते या छींकते समय मुंह पर कपड़ा रखें.

इंफेक्शन -
खराब जीवनशैली और गंदगी की वजह से कीटाणुओं के सम्पर्क में आने पर संक्रमण होता है. पेट या गले में इंफेक्शन से भी बुखार आता है इसलिए साफ-सफाई का ध्यान रखें.

वायरल फीवर -
इस बुखार से पीडि़त आदमी के सम्पर्क से या प्रदूषित खाद्य पदार्थ और पानी से वायरल फीवर होता है. यदि लगातार नाक बहे, सिरदर्द या खांसी हो तो चिकित्सक को दिखाएं. वायरल फीवर से बचने का सबसे असरकारक उपाय है हाइजीन का खयाल. इसलिए साफ-सुथरे वातावरण में रहें व ताजा खानपान लें.

डेंगू फीवर -
आंखों या सिर में दर्द या स्किन रैशेज के साथ आकस्मित तेज बुखार डेंगू फीवर के लक्षण हो सकते हैं. ऐसा बुखार 24 घंटे से ज्यादा रहे तो चिकित्सक से परामर्श लें व उनके बताए अनुसार जांचें करवाएं.

मलेरिया -
सर्दी लगकर बुखार आना मलेरिया के लक्षण होने कि सम्भावना है. इसमें पसीना भी बहुत आता है. मलेरिया की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें. घर में या आसपास पानी जमा न होने दें.

लो और हाई ग्रेड फीवर -
नाम से ही स्पष्ट है कि कम तापमान यानी लो ग्रेड और 103 डिग्री फारेनहाइट या इससे ज्यादा यानी हाई ग्रेड फीवर. लो ग्रेड फीवर एक दिन से ज्यादा समय तक बना रहे तो विशेषज्ञ से परामर्श लें.

टायफॉइड -
सालमोनेला टाइफी बैक्टीरिया इसका कारण है. प्रदूषित खाद्य पदार्थ या पानी से टायफॉइड होता है. टायफॉइड होने पर शरीर का तापमान 104 फारेनहाइट तक पहुंच जाता है. पेट में दर्द होता है और डायरिया हो जाता है. ऐसे में दवाओं के साथ-साथ शरीर को आराम दें व ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं.


नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम होने कि सम्भावना है कमजोर

नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम होने कि सम्भावना है कमजोर

कोरोना वायरस (coronavirus) से बचाव के लिए सारे देश में लॉकडाउन (Lockdown) है। लॉकडाउन के चलते कई लोग वर्क फ्रॉम होम भी कर रहे हैं। इस दौरान वो लैपटॉप की स्क्रीन या फिर अपने मोबाइल फोन के सम्पर्क में कई घंटे रहते हैं। कार्य समाप्त होने के बाद भी कुछ लोग मोबाइल स्क्रॉल करते रहते हैं जिससे वजह से उन्हें नींद आने में बहुत ज्यादा कठिनाई होती है। रात को देर से सोना व प्रातः काल शिफ्ट के लिए जल्दी उठ जाने से कई बार लोगों की नींद पूरी नहीं होती है जिसका सीधा प्रभाव न केवल उनके चेहरे व स्वभाव पर पड़ता है बल्कि उनकी इम्यूनिटी क्षमता भी बहुत ज्यादा निर्बल हो जाती है। लेकिन क्या आप कम सोने के नुकसान जानते हैं। एनडीटीवी के हवाले से आइए जानते कम नींद लेने के नुकसान

इम्यूनिटी सिस्टम पर पड़ता है बुरा असर:
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप कम नींद लेते हैं तो इम्यूनिटी बहुत ज्यादा कम हो सकती है। हालांकि निर्बल इम्यूनिटी के पीछे व भी कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं।

सेक्सुअल डिसऑर्डर की समस्या:

नींद कम ले पाने का सीधा असर लोगों की यौन क्षमता पर भी पड़ता है। दरअसल, टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की वजह से ही स्त्रियों व पुरुषों में यौन संबंध बनाने की ख़्वाहिश होती है। जब आप सोते हैं तो टेस्टोस्टेरॉन का लेवल बढ़ जाता है।

याददाश्त होती है कमजोर:
कम नींद लेने से लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसका सीधा प्रभाव उनकी याददाश्त पर भी पड़ता है। लोगों की लॉन्ग टर्म मेमोरी प्रभावित होती है व वो बातों को बहुत ज्यादा जल्दी भूलने लगते हैं।

निर्णय लेने की क्षमता होती है प्रभावित:
कम नींद लेने से आपकी फैसला लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कई बार आपने शायद ऐसा महसूस किया होगा कि आप किसी बात को लेकर क्विक डिसिजन नहीं ले पा रहे हैं व फैसला लेने के बाद भी आप उसे लेकर श्योर नहीं हैं। नींद कम लेने की वजह से अक्सर फैसला लेते वक्त लोग असमंजस का शिकार हो जाते हैं।

बढ़ सकता है स्ट्रेस:
कम नींद लेने का सीधा प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। दरअसल, सोने से दिमाग फ्रेश रहता है व ऊर्जा से भरा रहता है। लेकिन जब नींद पूरी नहीं हो पाती है तो दिमाग भी फ्रेश नहीं महसूस करता हैं। यही वजह है कि कम नींद लेने से स्ट्रेस बढ़ सकता है।