काम करते समय स्किन अगर बर्न हो जाएं तो इस तरह करें घरेलू उपचार

काम करते समय स्किन अगर बर्न हो जाएं तो इस तरह करें घरेलू उपचार

किचन में काम करते समय लेडीज इतनी जल्दबाजी में काम करती हैं कि उन्हें अंदाजा ही नहीं होता कि कब गर्म पतीली को छू लिया, या फिर कैसे गर्म दूध या चाय हाथ पर गिर गई। किसी भी तरल गर्म पदार्थ के हाथ पर गिरने से स्किन पर असहनीय दर्द होता है। दर्द हमारी घबराहट को और भी ज्यादा बढ़ा देता है। स्किन जलने पर सबसे पहले आप जली हुई जगह सोफ्रोमाइसिन क्रीम का इस्तेमाल करें। अगर क्रीम नहीं है तो आप घर के कुछ सामान से स्किन जलने का उपचार कर सकती हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि स्किन कितनी तरह से जलती है और उसका उपचार कैसे कर सकते हैं।

स्किन तीन तरह से जलती है:

1.फर्स्ट डिग्री बर्न: जब शरीर का कोई हिस्सा कम जलता है तो इसे फर्स्ट डिग्री बर्न (प्रथम श्रेणी का जलना) कहते हैं। फर्स्ट डिग्री बर्न में चिकित्सीय उपचार की तब तक कोई खास जरूरत नहीं होती जब तक कि जलने का असर ऊतकों पर न पड़ा हो। 


2.सेकेंड डिग्री बर्न: इसमें जले हुए भाग में सूजन और रेडनेस आ जाती है। अगर घाव तीन इंच से बड़ा हो या त्वचा की अंदरूनी परत तक हो तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

3.थर्ड डिग्री बर्न: इसमें स्किन की तीनों परतों पर जलने का असर होता है। इससे त्वचा सफेद या काली और सुन्न पड़ जाती है। जले हुए स्थान के हेयर फॉलिकल, स्वेट ग्लैंड और तंत्रिकाओं के सिरे नष्ट हो जाते हैं। इससे रक्त संचरण बाधित हो जाता है।


जलने पर किए जाने वाले घरेलू उपचार 

जली हुई जगह पर आलू पीसकर लेप लगाएं, इससे जली हुई जगह पर ठंडक का अहसास होता है।
तुलसी के पत्तों का रस जले हुए हिस्से पर लगाएं, इससे जले हुए भाग पर दाग होने की संभावना कम होती है।
तिल को पीसकर लेप बनाइये और इसे लगायें। इससे जलन और दर्द नहीं होगा। तिल लगाने से जलने वाले भाग पर पड़े दाग-धब्बे भी चले जाते हैं।
गाय के घी का लेप करें या पीतल की थाली में सरसों का तेल व पानी को नीम की छाल के साथ मिलाकर मरहम बनाएं और जले हुए स्थान पर लगाएं।
गाजर पीसकर लगाने से जले हुए हिस्से में आराम मिलता है।
जलने पर नारियल का तेल लगाएं। इससे जलन कम होती है और जलने का निशान भई चला जाता है।
जलने पर तुरंत क्या करें:


जले हुए स्थान को साफ और ठंडे पानी से धीरे-धीरे धोएं। जली हुई जगह बरनाल लगाएं।
अगर आपके पास एलोवेरा जेल या एंटीबायोटिक क्रीम है तो उसे जले हुए भाग पर लगा सकते हैं। एलोवेरा घाव भरने के साथ ही त्वचा को ठंडक भी देता है।
सबसे पहले जले हुए हिस्से पर ठंडा पानी डालें। ठंडा पानी डालने से जलन कम होगी। बेहतर है ठंडे पानी के नीचे कुछ देर के लिए जले हुए अंग को रखें।
किसी भी जली हुई जगह पर सफेद टूथपेस्‍ट लगाएं और सूखने दें। आप इसे एक समय में 2-3 बार लगा सकते हैं। टूटपेस्ट दर्द को अच्छे से दूर करेगा। 
अगर आपके घर पर एलोवेरा का पौधा है तो उसके पत्ते को काट कर अपने जले हुए हिस्‍से पर तुरंत लगाएं।
हल्‍दी में लाजवाब औषधीय गुण होते हैं, हल्‍दी को जले हुए भाग पर लगाइये और सूखने दीजिये। जब यह सूख जाए तब इसे धोइये और दुबारा से इसका पेस्ट लगाइए। ऐसा बार-बार करने से आपका दर्द से राहत मिलेगी। 


जीवन को निरोगी, सुखद और सुंदर बनाना है तो रोज करें ये योग

जीवन को निरोगी, सुखद और सुंदर बनाना है तो रोज करें ये योग

योग सिर्फ आसन नहीं है। योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, क्रिया, मुद्रा आदि सभी का समावेश है। सभी को अपनाकर ही कोई व्यक्ति योगी बनता है। लेकिन आधुनिक मनुष्य के लिए यह सब संभव नहीं है। इसीलिए हमने योग के कुछ चुनिंदा क्रियाओं को यहां संक्षिप्त में बताया है। इन्हें अपनाकर आप जीवनभर निरोगी और खुश तो रहेंगे ही साथ ही आप जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने की क्षमता भी हासिल कर लेंगे।  

रोज करें ये योग:

यम और नियम : यम पांच है: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। नियम भी पांच है: शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान। जिनमें से आप सत्य और शौच को अपना सकते हैं।   

आसन : आसन या योगासन तो कई है लेकिन सूर्य नमस्कार में लगभग अधिकतर आसनों का समावेश है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार और शवासन को करके आप शारीरिक और मानसिक रूप में सुदृढ़ हो सकते हैं।

प्राणायाम : प्राणायम भी कई है लेकिन नियमित रूप से नाड़ीशोधन प्राणामाम किया जाना चाहिए। यह उम्र और आत्मविश्वास बढ़ाने तथा तनाव घटाने में सहायक है। 

प्रत्याहार : वासनाओं की ओर जो इंद्रियाँ निरंतर गमन करती रहती हैं, उनकी इस गति को अपने अंदर ही लौटाकर आत्मा की ओर लगाना या स्थिर रखने का प्रयास करना प्रत्याहार है।

 क्रिया : क्रियाएं महत्वपूर्ण होती है। नेती, धौति, बस्ती, न्यौली, त्राटक, कपालभाति, धौंकनी, बाधी, शंख प्रक्षालयन आदि योग की क्रियाएं हैं। उक्त क्रियाओं से शरीर की आंतरिक शुद्धि होती है।

मुद्रा : मुद्राएं दो तरह की होती है। एक योगमुद्रा और दूसरी हस्तमुद्रा। आप सभी तरह की हस्तमुद्राएं आसानी से सीख सकते हैं। प्रत्येक मुद्रा के चमत्कारिक लाभ मिलते हैं।


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