...तो इसलिए कहा जाता है 'चिकनपॉक्स' को माता!

...तो इसलिए कहा जाता है 'चिकनपॉक्स' को माता!

अक्सर छोटे बच्चों में चिकनपॉक्स की बीमारी हो जाती है। इस बीमारी को हम चेचक भी कहते हैं और भारत के अधिकतर लोग इसे माता भी कहते हैं। अब ये किसी को समझ में नहीं आता कि इस बीमारी को माता क्यों कहते हैं। शायद आप भी नहीं जानते होंगे इस बारे में।

'चिकनपॉक्स' को क्यों कहते है माता:

सिर्फ गाँव ही नहीं बल्कि शहर के लोग भी इसे हिंदी में माता ही कहते हैं। चिकनपॉक्स एक ऐसी बीमारी है जो खसरा के फैलने से होती हैं। ये सीधे-सीधे 'हाइजीन' से जुड़ी हुई है। इसे माता की सजा कहा जाता है और इस दौरान दवाई भी लेना मना होता है। जब चेचक किसी को भी होता है तो उस समय सिर्फ नीम की डालियाँ या फिर नीम के पत्ते से ही उपाय किया जाता है। 

माता की पूजा:

दरअसल, इस बीमारी के चलते मरीज को ले जा कर शीतला माता की पूजा की जाती है जिससे उनका प्रकोप ठंडा होता है। इसलिए भी इस बीमारी को माता कहा जाता है। शीतला माता के एक हाथ में झाड़ू और दूसरे हाथ में पवित्र जल का पात्र होता है और इसी झाड़ू से माता रोग देती है और सही पूजा और सफाई रखने से और साफ़ जल से बीमारी को खत्म भी कर देती है।

शीतला अष्टमी:

इसमें शीतला अष्टमी भी बनाई जाती है। इस खास दिन पर घर में कुछ भी गर्म नहीं पकाया जाता है और माता के भोग के लिए भी खाना एक दिन पहले पकाया जाता है। साथ ही ये कहते हैं कि इसी के बाद माता अपनी सजा से इंसान को मुक्त कर देती है।


रोज शराब का सेवन करने से बढ़ता का कैंसर का खतरा

रोज शराब का सेवन करने से बढ़ता का कैंसर का खतरा

शराब पीना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। लेकिन यह बहुत ही कम लोग जानते होंगे की इससे कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है। ज्यादा शराब पीने से त्वचा कैंसर के होने का खतरा बना रहता है। शराब पीने के और भी कई नुकशान है। जिससे दिन पर दिन इंसान अपनी जिंदगी खत्म कर रहा है। 

शराब पीने से बढ़ता है कैंसर का खतरा:

‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी’ ने हाल ही में एक रिसर्च किया था। जिसमे में पाया गया है कि रोजाना दस ग्राम ज्यादा शराब लेने से बेसल सेल कार्सिनोमा (बीसीसी) का खतरा 7 फीसदी और स्किन स्केव्मस सेल कार्सिनोमा (सीएससीसी) का खतरा 11 फीसदी बढ़ जाता है। ये नॉन-मेलनोमा त्वचा कैंसर के दो सामान्य प्रकार हैं।

क्या है इसके लक्षण:

मेलानोमा सबसे घातक होता है। इस कैंसर में गले में सूजन या खुजली महसूस कर सकते हैं, यह शरीर पर कहीं भी हो सकता है। इसमें घाव जल्दी जल्दी बढ़ने लगते हैं। घाव के भी कई रंग हो सकते हैं जैसे काला या गुलाबी। सही समय पर इसका उपचार करना बहुत जरुरी होता है वरना धीरे धीरे ये गंभीर रूप ले लेता है।


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