कहीं आप तो नहीं चटकाते हैं अपने हाथों की अंगुलियाँ, होते हैं ये बड़े नुकसान

कहीं आप तो नहीं चटकाते हैं अपने हाथों की अंगुलियाँ, होते हैं ये बड़े नुकसान

अक्सर इंसान बिना काम के बैठे रहता है तो कुछ ना कुछ करते रहता है और ऐसे में अंगुलियां चटकाना कई लोगों की आम आदत में शुमार होता है। अक्सर लोग इसे शौक या मामूली आदत मानते हैं। भले ही उंगुलियों के चटकने के बाद हाथों को काफी आराम मिलता है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आपका ये शौक आपको गंभीर बीमारी का शिकार बना सकता है।

उंगलियों को चटकाने के नुकसान

उंगलियों को चटकाने से हडि्डयों बुरा प्रभाव पड़ता है। हाथ, पैर की उंगलियां चटकाने से काम करने की क्षमता कमजोर होती है। इसलिए उंगलियां चटकाने की आदत को छोड़ना होगा।


उंगलियों के जोड़ और घुटने के जोड़ों में सिनोवियल फ्लूइड लिक्विड पाया जाता है। यह लिक्विड हड्डियों को जोड़ने में मददगार है। सिनोवियल फ्लूइड लिक्विड के ख़त्म होने से अर्थराइटिस हो सकता है।

उंगलियां चटकाने से हाथ में सॉफ्ट टिश्यूज में सूजन आ सकती है। लंबे समय से उंगलियां चटकाने का बुरा असर पड़ सकता है। 


कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने इस पर रिसर्च करके बताया है कि इस तरह से उंगलियों को चटकाने से हड्डियां कमजोर होती हैं।


जीवन को निरोगी, सुखद और सुंदर बनाना है तो रोज करें ये योग

जीवन को निरोगी, सुखद और सुंदर बनाना है तो रोज करें ये योग

योग सिर्फ आसन नहीं है। योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, क्रिया, मुद्रा आदि सभी का समावेश है। सभी को अपनाकर ही कोई व्यक्ति योगी बनता है। लेकिन आधुनिक मनुष्य के लिए यह सब संभव नहीं है। इसीलिए हमने योग के कुछ चुनिंदा क्रियाओं को यहां संक्षिप्त में बताया है। इन्हें अपनाकर आप जीवनभर निरोगी और खुश तो रहेंगे ही साथ ही आप जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने की क्षमता भी हासिल कर लेंगे।  

रोज करें ये योग:

यम और नियम : यम पांच है: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। नियम भी पांच है: शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान। जिनमें से आप सत्य और शौच को अपना सकते हैं।   

आसन : आसन या योगासन तो कई है लेकिन सूर्य नमस्कार में लगभग अधिकतर आसनों का समावेश है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार और शवासन को करके आप शारीरिक और मानसिक रूप में सुदृढ़ हो सकते हैं।

प्राणायाम : प्राणायम भी कई है लेकिन नियमित रूप से नाड़ीशोधन प्राणामाम किया जाना चाहिए। यह उम्र और आत्मविश्वास बढ़ाने तथा तनाव घटाने में सहायक है। 

प्रत्याहार : वासनाओं की ओर जो इंद्रियाँ निरंतर गमन करती रहती हैं, उनकी इस गति को अपने अंदर ही लौटाकर आत्मा की ओर लगाना या स्थिर रखने का प्रयास करना प्रत्याहार है।

 क्रिया : क्रियाएं महत्वपूर्ण होती है। नेती, धौति, बस्ती, न्यौली, त्राटक, कपालभाति, धौंकनी, बाधी, शंख प्रक्षालयन आदि योग की क्रियाएं हैं। उक्त क्रियाओं से शरीर की आंतरिक शुद्धि होती है।

मुद्रा : मुद्राएं दो तरह की होती है। एक योगमुद्रा और दूसरी हस्तमुद्रा। आप सभी तरह की हस्तमुद्राएं आसानी से सीख सकते हैं। प्रत्येक मुद्रा के चमत्कारिक लाभ मिलते हैं।


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