लिवर की सफाई करने के लिए रोज पिएं ये ड्रिंक, नहीं होगी लिवर की समस्या

लिवर की सफाई करने के लिए रोज पिएं ये ड्रिंक, नहीं होगी लिवर की समस्या

हमारे स्वस्थ शरीर के लिए लीवर का सही तरीके से काम करना बहुत जरूरी होता है। लीवर शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने के साथ ही खाने को पचाने में भी मदद करता है। लीवर में खराबी होने पर हेपेटाइटिस, फैटी लीवर, लीवर सिरोसिस, एल्कोहलिक लीवर और लीवर कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

किशमिश ड्रिंक:

ड्रिंक बनाने के लिए सबसे पहले दो कप पानी को उबलने के लिए रख दें। जब पानी उबलने लगे तो इस में किशमिश डालकर 20 मिनट तक उबालें।

अब इस पानी को रात भर के लिए ऐसे ही छोड़ दें। रोजाना सुबह खाली पेट में इस पानी का सेवन करें। किशमिश को फेंकने की जगह नाश्ते में चबा चबा कर खाएं। 

लगातार तीन दिनों तक इस ड्रिंक का सेवन करने से लीवर में मौजूद विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर निकल जाएंगे। लीवर साफ होने पर पेट से जुड़ी कोई भी समस्या आपको परेशान नहीं करेगी।


जीवन को निरोगी, सुखद और सुंदर बनाना है तो रोज करें ये योग

जीवन को निरोगी, सुखद और सुंदर बनाना है तो रोज करें ये योग

योग सिर्फ आसन नहीं है। योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, क्रिया, मुद्रा आदि सभी का समावेश है। सभी को अपनाकर ही कोई व्यक्ति योगी बनता है। लेकिन आधुनिक मनुष्य के लिए यह सब संभव नहीं है। इसीलिए हमने योग के कुछ चुनिंदा क्रियाओं को यहां संक्षिप्त में बताया है। इन्हें अपनाकर आप जीवनभर निरोगी और खुश तो रहेंगे ही साथ ही आप जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने की क्षमता भी हासिल कर लेंगे।  

रोज करें ये योग:

यम और नियम : यम पांच है: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। नियम भी पांच है: शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान। जिनमें से आप सत्य और शौच को अपना सकते हैं।   

आसन : आसन या योगासन तो कई है लेकिन सूर्य नमस्कार में लगभग अधिकतर आसनों का समावेश है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार और शवासन को करके आप शारीरिक और मानसिक रूप में सुदृढ़ हो सकते हैं।

प्राणायाम : प्राणायम भी कई है लेकिन नियमित रूप से नाड़ीशोधन प्राणामाम किया जाना चाहिए। यह उम्र और आत्मविश्वास बढ़ाने तथा तनाव घटाने में सहायक है। 

प्रत्याहार : वासनाओं की ओर जो इंद्रियाँ निरंतर गमन करती रहती हैं, उनकी इस गति को अपने अंदर ही लौटाकर आत्मा की ओर लगाना या स्थिर रखने का प्रयास करना प्रत्याहार है।

 क्रिया : क्रियाएं महत्वपूर्ण होती है। नेती, धौति, बस्ती, न्यौली, त्राटक, कपालभाति, धौंकनी, बाधी, शंख प्रक्षालयन आदि योग की क्रियाएं हैं। उक्त क्रियाओं से शरीर की आंतरिक शुद्धि होती है।

मुद्रा : मुद्राएं दो तरह की होती है। एक योगमुद्रा और दूसरी हस्तमुद्रा। आप सभी तरह की हस्तमुद्राएं आसानी से सीख सकते हैं। प्रत्येक मुद्रा के चमत्कारिक लाभ मिलते हैं।


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