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इन गलतियों से बनती है पेट में गैस

इन गलतियों से बनती है पेट में गैस

भोजन के बाद गैस, पेट फूलना व असुविधा होना एक सामान्य समस्या है. कई दफा लोग इसकी चर्चा नहीं करते. पर, यह समस्या खुलकर जीने भी नहीं देती. अगर आए दिन आप इससे दो-चार हो रही हैं तो इसका कारण व समाधान बता रही हैं स्वाति शर्मा. अरे मिश्रा जी एक रोटी में क्या बिगड़ जाएगा, खा लीजिए न. तिवारी जी की मेहमानवाजी मिश्रा जी पूरी रात नहीं भूल पाएंगे.

कहने को तो एक रोटी हैपर इससे क्या कुछ बिगड़ सकता है, इसे वे सभी जानते हैं जो मिश्रा जी की तरह गले पड़े भोजन का शिकार होते हैं. लेट नाइट पार्टी हो या टीवी देखते हुए स्नैक्स खाने की आदतइन सभी आदतों में पहले मजा, बाद में सजा वाली कहानी सामने आती है. यानी गैस, अपच, पेट दर्द व पेट फूलना. कभी-कभार यह समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन इसका आए दिन बने रहना आपके ज़िंदगी को प्रभावित करने लगता है तो कुछ उपयोगी कदम उठाने की आवश्यकता है. 

सामान्य गलतियां हैं मुख्य कारण-
हमारी जीवनशैली की चौपट स्थिति हमारे स्वास्थ पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष दोनों तरह से असर डाल रही है. गैस बनने, पेट फूलने जैसी समस्या का भी यही मुख्य कारण है. जो लोग सामान्य तौर पर रात में भारी भोजन करते हैं, उन्हें इस तरह की समस्या बनी रहती है. इसके अतिरिक्त भोजन करने में समय का विशेष महत्व भी होता है. इसमें हुई गड़बड़ी भी आपको गैस की समस्या से जूझने पर विवश कर सकती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ पौष्टिक भोजन का ही नहीं, बल्कि उसे खाने के समय का ख्याल भी रखना होगा. इसके अतिरिक्त लोगों को कुछ खास चीजों से एलर्जी होती है, जिसकी वजह से उन्हें पेट में भारीपन महसूस होने लगता है. यह समस्या स्मोकिंग करने वालों को भी परेशान करती है.

विशेष परिस्थितियां भी हैं जिम्मेदार-
कुछ चिकित्सकीय परिस्थियों के कारण भी आपको गैस व पेट फूलने की शिकायत हो सकती है. मधुमेह व रक्तचाप में खाई जाने वाली दवाइयों के कारण ऐसी कठिनाई आ सकती है. इसके अतिरिक्त जिन लोगों को पित्त की थैली यानी गॉलब्लैडर में पथरी की शिकायत होती है, उन्हें भी गैस की समस्या होती है. अगर आप दिल रोगी हैं तो आपको खासतौर पर ब्लोटिंग से बचने की आवश्यकता है. कई बार रोगी अटैक व गैस के दर्द में अंतर नहीं कर पाता. लिवर सिरोसिस के मरीजों को भी इसकी शिकायत होती है, लेकिन समस्या गंभीर हो तो चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है. इन सभी परिस्थितियों में घरेलू नुस्खों या खानपान में लगाम से कार्य नहीं चलता. 

खास स्थितियां-
गर्भावस्था के अंतिम महीनों में गैस बनने की समस्या आम है. पर, कभी-कभी गर्भावस्था के शुरुआती माह में भी गैस की समस्या हो जाती है. इसका बड़ा कारण कब्ज होता है. गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों की चयापचय क्षमता में कमी आ जाती है, जिस कारण यह समस्या उभरती है. कई बार आयरन व कैल्शियम सप्लीमेंट्स से भी कब्ज व पेट फूलने जैसी समस्या होने लगती है.

अगर तकलीफ सामान्य है तो दवाइयों की कम डोज या खानपान में सुधार करके कार्य चल जाता है. समस्या ज्यादा हो तो खास दवाओं का सहारा लेना पड़ता है, साथ ही आयरन व कैल्शियम की आवश्यकता को भोजन से पूरा करने की प्रयास की जाती है. बच्चा होने के बाद इस समस्या का मुख्य कारण है वसा. पेट पर जमा अलावा चर्बी शरीर की अंदरूनी प्रणाली को प्रभावित करती है, जिससे पाचन तंत्र ठीक से कार्य नहीं कर पाता.

यूं पाएं निजात-
अगर आप इस समस्या से पीड़ित हैं, तो सबसे बड़ा उपचार है भोजन पर नियंत्रण. इस दौरान आपको बिना चबाने वाला भोजन ग्रहण करने की आवश्यकता है, यानी जो सरलता से पच जाए. समस्या होने पर टहलें, इससे एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव बढे़गा व पाचन क्रिया तेज होगी. समस्या अधिक होने पर आपको दवाओं का सहारा लेना पड़ेगा.

अपनाएं बचाव के तरीके-
 यहां आप एक्सीडेंट से सावधानी भली वाला फॉर्मूला अपनाएं. सबसे पहले अपने भोजन पर गौर करें. ऐसी चीजों को पहचानें, जिनको ग्रहण करने से आपको ये समस्या आमतौर पर हो जाती है. आपको ग्लूटन, मूंगफली, खोया या दूध के अन्य उत्पाद जैसी किसी भी वस्तु से एलर्जी हो सकती है. इनके अतिरिक्त कुछ सामान्य-सी बातों को अपनाने से आप पेट फूलने की इस समस्या से बच सकती हैं:
-रात के भोजन व सोने के बीच कम से कम दो-तीन घंटे का अंतराल रखें. भोजन के तुरंत बाद लेटे नहीं, टहलें. इससे खाना पचने में सरलता होगी.
-खाली पेट चाय न पिएं. अगर पहली चाय के साथ कुछ नहीं खातीं तो उससे पहले गुनगुना पानी जरूर पिएं.
-त्योहारों में या गरिष्ठ खानपान के बाद गुनगुना पानी पिएं.
-भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं. केला खाएं.
-तनाव से बचें. प्राणायाम कर सकती हैं.
-कुछ पेल्विक अभ्यास (ताड़ासन, शलभासन) आपकी मदद कर सकती हैं.


नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम होने कि सम्भावना है कमजोर

नींद कम लेने से इम्यून सिस्टम होने कि सम्भावना है कमजोर

कोरोना वायरस (coronavirus) से बचाव के लिए सारे देश में लॉकडाउन (Lockdown) है। लॉकडाउन के चलते कई लोग वर्क फ्रॉम होम भी कर रहे हैं। इस दौरान वो लैपटॉप की स्क्रीन या फिर अपने मोबाइल फोन के सम्पर्क में कई घंटे रहते हैं। कार्य समाप्त होने के बाद भी कुछ लोग मोबाइल स्क्रॉल करते रहते हैं जिससे वजह से उन्हें नींद आने में बहुत ज्यादा कठिनाई होती है। रात को देर से सोना व प्रातः काल शिफ्ट के लिए जल्दी उठ जाने से कई बार लोगों की नींद पूरी नहीं होती है जिसका सीधा प्रभाव न केवल उनके चेहरे व स्वभाव पर पड़ता है बल्कि उनकी इम्यूनिटी क्षमता भी बहुत ज्यादा निर्बल हो जाती है। लेकिन क्या आप कम सोने के नुकसान जानते हैं। एनडीटीवी के हवाले से आइए जानते कम नींद लेने के नुकसान

इम्यूनिटी सिस्टम पर पड़ता है बुरा असर:
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप कम नींद लेते हैं तो इम्यूनिटी बहुत ज्यादा कम हो सकती है। हालांकि निर्बल इम्यूनिटी के पीछे व भी कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं।

सेक्सुअल डिसऑर्डर की समस्या:

नींद कम ले पाने का सीधा असर लोगों की यौन क्षमता पर भी पड़ता है। दरअसल, टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की वजह से ही स्त्रियों व पुरुषों में यौन संबंध बनाने की ख़्वाहिश होती है। जब आप सोते हैं तो टेस्टोस्टेरॉन का लेवल बढ़ जाता है।

याददाश्त होती है कमजोर:
कम नींद लेने से लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसका सीधा प्रभाव उनकी याददाश्त पर भी पड़ता है। लोगों की लॉन्ग टर्म मेमोरी प्रभावित होती है व वो बातों को बहुत ज्यादा जल्दी भूलने लगते हैं।

निर्णय लेने की क्षमता होती है प्रभावित:
कम नींद लेने से आपकी फैसला लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कई बार आपने शायद ऐसा महसूस किया होगा कि आप किसी बात को लेकर क्विक डिसिजन नहीं ले पा रहे हैं व फैसला लेने के बाद भी आप उसे लेकर श्योर नहीं हैं। नींद कम लेने की वजह से अक्सर फैसला लेते वक्त लोग असमंजस का शिकार हो जाते हैं।

बढ़ सकता है स्ट्रेस:
कम नींद लेने का सीधा प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। दरअसल, सोने से दिमाग फ्रेश रहता है व ऊर्जा से भरा रहता है। लेकिन जब नींद पूरी नहीं हो पाती है तो दिमाग भी फ्रेश नहीं महसूस करता हैं। यही वजह है कि कम नींद लेने से स्ट्रेस बढ़ सकता है।