यूरिन इंफेक्शन क्यों हो जाता है महिलाओं को बार-बार ?

यूरिन इंफेक्शन क्यों हो जाता है महिलाओं को बार-बार ?

आज भी ज़्यादातर महिलाएं यूरिन इंफेक्शन के बारे में बात करने से कतराती हैं, लेकिन जब तकलीफ़ बढ़ जाती है, तो कई बार इसके ट्रीटमेंट के लिए उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट तक होना पड़ता है। यूरिन इंफेक्शन का उपचार बहुत सरल है, लेकिन समय पर उपचार न करने से समस्या जटिल हो सकती है, इसलिए इसके उपचार में देर बिल्कुल न करें।

यदि किसी महिला को यूरिन इंफेक्शन हुआ है, तो ज़रूरी नहीं कि वो यूरिन संबंधी शिकायत ही करे। उसे पैरों में दर्द, कमर में दर्द आदि की शिकायत भी हो सकती है। ऐसे में जब वो चिकित्सक के पास जाती है, तो कई बार चिकित्सक उसे कैल्शियम व विटामिन्स की दवाइयां देते हैं, वो उससे ये नहीं पूछते कि तुम्हारी यूरिन से बदबू तो नहीं आ रही है। ऐसे में जानकारी के अभाव में उसका ठीक उपचार नहीं हो पाता व समस्या जटिल हो जाती है। स्त्रियों में यूरिन इंफेक्शन कब, कैसे व क्यों होता है, बता रहे हैं कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एंड फिज़िशियन डाक्टर अरुण शाह व डाक्टर वसी शेख़।

जानें यूटीआई (UTI) के रिस्क फैक्टर्स
* यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) एक ऐसा इंफेक्शन है, जो यूरिनरी सिस्टम के किसी भी हिस्से में होने कि सम्भावना है, जैसे- किडनी, ब्लैडर, गर्भाशय आदि। लगभग 50% स्त्रियों को ज़िंदगी में कभी-न-कभी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता ही है, इसलिए स्त्रियों को यूरिन इंफेक्शन के कारण, बचाव व इसके ठीक उपचार के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
* आमतौर पर यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक ही सीमित रहता है, लेकिन इसका उपचार यदि समय पर नहीं किया गया, तो इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है।
* यूरिनरी इंफेक्शन की समस्या तब व जटिल हो जाती है, जब इसके लक्षण असामान्य होते हैं, जैसे- कमर दर्द, पैरों में दर्द आदि। ऐसी स्थिति में कई बार यूरिन इंफेक्शन का पता नहीं चल पाता व समस्या बढ़ जाती है।

यूटीआई (UTI) के कारण
आमतौर पर यूटीआई का प्रमुख कारण है बैक्टीरिया का मूत्रमार्ग से मूत्राशय में प्रवेश करना। स्त्रियों में यूटीआई के निम्न कारण हैं:
* पुरुषों की तुलना में स्त्रियों के मूत्रमार्ग की लंबाई छोटी होने के कारण उनमें यूटीआई का ख़तरा अधिक रहता है।
* सेक्सुअली एक्टिव स्त्रियों को यूटीआई होने की आसार ज़्यादा होती है। संभोग पार्टनर बदलने से भी यूटीआई होने की आसार बढ़ जाती है।
* शुक्राणुनाशक क्रीम का उपयोग करने से यूटीआई होने कि सम्भावना है।
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण कई स्त्रियों में यूरिन इंफेक्शन हो जाता है।
* जो लड़कियां पानी कम पीती हैं या पेशाब को रोककर रखती हैं, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की आसार ज़्यादा रहती है।
* जिन स्त्रियों को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने कि सम्भावना है।
* जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज़ है या जिनका डायबिटीज़ कंट्रोल में नहीं रहता, उनका ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने कि सम्भावना है।

यूटीआई (UTI) के लक्षण
जब तक यूरिन इंफेक्शन ब्लैडर तक सीमित रहता है, तब यूटीआई के ये लक्षण दिखाई देते हैं:
* पेशाब करते समय जलन होना।
* योनि में खुजली होना व बदबू आना।
* बार-बार पेशाब जाना।
* पेट के निचले हिस्से में दर्द या असहजता महसूस होना।
* पेशाब में खून आना।
* यूरिन इंफेक्शन के किडनी तक फैल जाने पर ठंड लगना व कंपकंपी के साथ तेज़ बुख़ार आना, पेटदर्द, थकान, बदनदर्द, मतली, उल्टी आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

यूटीआई (UTI) का इलाज
* यूटीआई का उपचार यूरिन व ब्लड टेस्ट के बाद ही किया जा सकता है। उसके बाद इंफेक्शन की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सक उपचार करते हैं।
* महिला की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, यूटीआई का इतिहास देखते हुए अन्य टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं।
* यदि आपको हल्का बुख़ार है, आप खाने-पीने में सक्षम हैं, तो आपके लिए ओरल एंटीबायोटिक्स का एक छोटा कोर्स भी पर्याप्त होने कि सम्भावना है।
* असहनीय पेटदर्द, तेज़ बुख़ार, खाने-पीने में असमर्थता जैसी स्थिति में हॉस्पिटल में एडमिट भी होना पड़ सकता है।
* अच्छा महसूस करने पर भी उपचार बीच में न रोकें, अन्यथा फिर से इंफेक्शन होने की आसार बढ़ जाती है।
* एंटीबायोटिक्स के अतिरिक्त बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने के लिए ख़ूब सारा पानी पीएं।
यूटीआई (UTI) से बचाव
जिन स्त्रियों को बार-बार यूटीआई की तकलीफ़ होती है, उन्हें इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
* ख़ूब पानी पीएं।
* लंबे समय तक पेशाब न रोकें।
* प्राइवेट पार्ट्स की सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखें।
* शौच के समय जननांग की सफ़ाई आगे से पीछे की तरफ़ करें। ऐसा करने से मलद्वार की गंदगी योनि तक नहीं पहुंचती व संक्रमण की आसार कम रहती है।
* यदि आपको कब्ज़ की शिकायत रहती है, तो समय-समय पर पेट साफ़ करने की दवा लेते रहें।
* संभोग से पहले व संभोग के बाद पेशाब के समय जननांग साफ़ करें।
* संभोग के समय शुक्राणुनाशक क्रीम के इस्तेमाल से बचें।
* जिन स्त्रियों का मेनोपॉज़ हो गया है, उन्हें वेजाइनल एस्ट्रोजन से फ़ायदा होने कि सम्भावना है।
* यदि आपको बार-बार यूरिन इंफेक्शन हो जाता है, तो एहतियात के तौर पर आप चिकित्सक की बताई हुई एंटीबायोटिक्स ले सकती हैं।

महिलाओं को बार-बार क्यों हो जाता है यूरिन इंफेक्शन, जानने के लिए देखें वीडियो:

महिलाओं में आयु के अनुसार यूरिन इंफेक्शन
महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन कभी भी होने कि सम्भावना है, लेकिन हर आयु में इसके कारण व इशारा भिन्न-भिन्न होते हैं।
* पांच वर्ष तक की बच्ची यदि पेशाब रोककर रखती है, तो उसे यूरिन इंफेक्शन होने कि सम्भावना है। ऐसे में यदि वो बिना सर्दी-ज़ुकाम के बार-बार बीमार पड़ती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन का इशारा होने कि सम्भावना है।
* पांच से दस वर्ष की लड़की की पैंटी के रंग में यदि परिवर्तन नज़र आए, यदि उसकी टीचर शिकायत करे कि वो बार-बार पेशाब जाती है, वो रात में बार-बार पेशाब जाने के लिए उठती है, तो ये यूरिन इंफेक्शन के इशारा हो सकते हैं। ऐसे में उस लड़की को बुख़ार हो, ये ज़रूरी नहीं।
* प्यूबर्टी पीरियड में जब लड़की को पीरियड्स प्रारम्भ होते हैं, तो हाइजीन के अभाव में उसे यूरिन इंफेक्शन होने कि सम्भावना है। इस समय यूरिन इंफेक्शन के इशारा होते हैं- व्हाइट डिस्चार्ज, खुजली, पैंटी व वेजाइनल एरिया से बदबू आना।
* शादीशुदा स्त्रियों में विवाह के छह महीने से लेकर एक वर्ष तक यूरिन इंफेक्शन होना आम बात है, इसे हनीमून सिस्टाइटिस कहते हैं। इस समय तक महिला के शरीर को बाहरी ऑर्गन की आदत नहीं होती, इसलिए संभोग के दौरान उनका ब्लड फ्लो बढ़ सकता है। हाइजीन के अभाव में भी उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने कि सम्भावना है।
* प्रेग्नेंसी के दौरान व बच्चे के जन्म के बाद हाइजीन के अभाव में अक्सर स्त्रियों को यूरिन इंफेक्शन हो जाता है। प्रेग्नेंसी के समय यूरिन इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।
* मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के अभाव में स्त्रियों को यूरिन इंफेक्शन होने की आसार बढ़ जाती है। इस समय कई स्त्रियों को डायबिटीज़ हो जाता है, जिसके कारण भी यूरिन इंफेक्शन होने की आसार बढ़ जाती है।
* जिन स्त्रियों को डायबिटीज़ या किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन होने की आसार ज़्यादा होती है।

डॉक्टर से न छुपाएं संभोग की बात
सेक्सुअली एक्टिव अविवाहित लड़कियों को यूरिन इंफेक्शन होने की आसार ज़्यादा रहती है। ऐसे में जब लड़कियां यूरिन इंफेक्शन की शिकायत लेकर चिकित्सक के पास जाती हैं व संभोग की बात छुपाती हैं, तो उनका ठीक उपचार नहीं हो पाता व उनकी हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है। अत: जो लड़कियां सेक्सुअली एक्टिव हैं, उन्हें चिकित्सक से ये बात नहीं छुपानी चाहिए व अपना ठीक इलाज कराना चाहिए।