आखिर ऐसा क्या हुआ कि डर से कांपे लोग, चारों तरफ मची अफरा-तफरी

आखिर ऐसा क्या हुआ कि डर से कांपे लोग, चारों तरफ मची अफरा-तफरी

नई दिल्ली: दुनियाभर के अलग-अलग देशों में आए दिन भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। बार-बार भूकंप आने की वजह से दुनिया के लोगों के मन में खौफ बैठ गया है। भूकंप ने वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है। वैज्ञानिक शोध करन में लगे हुए हैं कि भूकंप इतनी जल्दी-जल्दी क्यों आ रहा है और इसका क्या कारण है।

अब मंगोलिया में भूकंप के तेज झटके महसूस किए हैं। रिक्टर स्केल पर इसी तीव्रता 6.8 मापी गई है। फिलहाल जान-माल के नुकसान को लेकर कोई खबर नहीं मिली है। मंगलवार को स्‍थानीय समय के अनुसार सुबह 5 बजकर 33 मिनट भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह रूस-मंगोलिया सीमा पर आया है।

भूकंप का केंद्र रूस की सीमा से करीब 55 किलोमीटर या मंगोलिया के उत्‍तरी दक्षिण क्षेत्र के इरकुत्स्क से 288 किमी की दूरी पर खोव्सग्ल झील में था। जिस क्षेत्र में भूकंप आया है वहां ज्यादा घनी आबादी नहीं है। हालांकि झील के पास के कई गांव हैं जिसमें हैटल और टर्ट शामिल हैं। यहां की आबादी करीब 5,000 है, अभी फिलहालहताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने कहा कि भूकंप की तीव्रता रिक्‍टर पैमाने पर 6.8 थी। यह अभी तक यह झील के आसपास के क्षेत्र में आए सबसे तेज भूकंपों में से एक था। भूकंप जमीन में 10 किलोमीटर गहराई में था।

सोमवार को भारत में भी लगे भूकंप के झटके
इस पहले भारत के जम्मू-कश्मीर में सोमवार को तेज भूकंप के झटके महसूस किये गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गयी है। जम्मू संभाग के उधमपुर, डोडा, किस्तवाड़, पुंछ के साथ ही कश्मीर घाटी में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया था रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गई।


प्रेसिडेंट इलेक्ट ने 1.9 ट्रिलियन डॉलर के राहत पैकेज का ऐलान किया, हर जरूरतमंद के खाते में 1400 डॉलर आएंगे

प्रेसिडेंट इलेक्ट ने 1.9 ट्रिलियन डॉलर के राहत पैकेज का ऐलान किया, हर जरूरतमंद के खाते में 1400 डॉलर आएंगे

20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति बनने जा रहे जो बाइडेन ने अपना सबसे अहम चुनावी वादा निभाने का ऐलान कर दिया। बाइडेन ने कोरोना की वजह से गंभीर रूप से प्रभावित हुई अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 1.9 ट्रिलियन डॉलर के राहत पैकेज का ऐलान किया। इसको कुछ हिस्सों में बांटा गया है।

पैकेज को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पास कराना होगा। मोटे तौर पर देखें तो पैकेज लागू होने के बाद हर अमेरिकी के खाते में 1400 डॉलर आएंगे। इस पैकेज में छोटे कारोबारियों को भी राहत दी गई है। पैकेज को अमेरिकन रेस्क्यू प्लान नाम दिया गया है।

पैकेज में किसके लिए क्या
बाइडेन के पैकेज का सिर्फ एक मकसद है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जाए। पैकेज में जिस तरह फंड अलॉकेट करने का प्रपोजल है, उससे साफ हो जाता है कि कारोबार, शिक्षा और हर अमेरिकी को राहत देने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही वैक्सीनेशन पर भी फोकस किया गया है।

  • 415 अरब डॉलर : कोरोना के खिलाफ जंग पर खर्च किए जाएंगे।
  • 440 अरब डॉलर : स्मॉल स्केल बिजनेस (छोटे कारोबारों) की हालत सुधारने पर खर्च होंगे।
  • हर एलिजिबल अमेरिकी के अकाउंट में 1400 डॉलर​ ​ट्रांसफर होंगे।
  • प्रति घंटे के हिसाब से कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन (मिनिमम वेज) 15 डॉलर ​​​दिया जाएगा। पहले यह 7 डॉलर था।

क्या पैकेज में कुछ दिक्कत आ सकती है?
बिल्कुल आ सकती है। नवंबर-दिसंबर में जब ट्रम्प राहत पैकेज लेकर आए थे तब, बाइडेन और उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई सवाल उठाए थे। सीनेट में अब भी रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। वो आपत्ति जता सकते हैं। दूसरी बात, पैकेज में डिफेंस सेक्टर के लिए अलग से कोई ऐलान नहीं किया गया है। इस पर आपत्ति हो सकती है।

बाइडेन ने क्या कहा?
बाइडेन ने कहा- संकट बड़ा और रास्ता मुश्किल है। अब हम और वक्त बर्बाद नहीं कर सकते। जो करना है वो, फौरन करना है। बाइडेन चाहते हैं कि 100 दिन में करीब 10 करोड़ अमेरिकी नागरिकों को वैक्सीनेट किया जाए। वे बेरोजगारी भत्ता 300 डॉलर से बढ़ाकर 400 डॉलर हर महीने करना चाहते हैं। स्कूल फिर खोलने के लिए 130 अरब डॉलर खर्च किए जाने की योजना है।

भारत की कुल अर्थव्यवस्था के आधे से ज्यादा का राहत पैकेज
भारत की कुल अर्थव्यवस्था इस वक्त करीब 3 ट्रिलियन डॉलर की है। इस लिहाज से देखें तो बाइडेन ने जो राहत पैकेज घोषित किया है वो भारत की अर्थव्यवस्था के आधे से भी ज्यादा है।


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