पाकिस्तान के लिए एडा क्लास के 4 युद्धपोत बना रहा तुर्की, जानें भारत के लिए कितना खतरनाक

पाकिस्तान के लिए एडा क्लास के 4 युद्धपोत बना रहा तुर्की, जानें भारत के लिए कितना खतरनाक

अंकारा: इस्लामी देशों का मसीहा बनने की कोशिश में जुटा तुर्की अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान को जंगी साजो-सामान दे रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने शनिवार को पाकिस्तान के लिए बनाए जा रहे मिल्गम प्रोजक्ट (MILGEM Project) के तहत एडा क्लास के चार युद्धपोतों में से तीसरे युद्धपोत के निर्माण कार्य का उद्घाटन किया। इस अवसर पर तुर्की में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद साइरस सज्जाद काजी भी उपस्थित रहे।

एर्दोगन ने पाकिस्तान को बताया भाई
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने पाकिस्तान को अपना भाई बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंधों को और बढ़ाने की बात भी दोहराई। एर्दोगन ने कहा कि पाकिस्तान और तुर्की दोनों कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में रह रहे हैं और समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया कि तुर्की रक्षा क्षेत्र में पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण और समर्थन करना जारी रखेगा।

2018 में पाकिस्तान ने किया था समझौता
2018 में तुर्की की सरकारी स्वामित्व वाली डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर फर्म ASFAT इंक के साथ पाकिस्तान मिलिट्री ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) ने मैग्नम परियोजना के तहत एडा क्लास के चार युद्धपोतों के लिए करार किया था। योजना के अनुसार, इनमें से दो का निर्माण तुर्की में किया जाएगा और अन्य दो पाकिस्तान में कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स-पाकिस्तान नौसेना के विशेष जहाज निर्माण प्रभाग में बनाए जाएंगे। इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी शामिल है।

कितना ताकतवर है तुर्की का यह कॉर्वेट

तुर्की ने मध्यम श्रेणी के एडा क्लास की कॉर्वेट (Ada-class corvette) का निर्माण शुरू में अपनी नौसेना के लिए किया था। बाद में पाकिस्तान के साथ हुई डील में इसमें से दो को कराची में बनाया जा रहा है। एडा क्लास की परियोजना के जरिए बहुउद्देशीय कॉर्वेट और फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। यह युद्धपोत टोही, सर्विलांस, अर्ली वॉर्निंग, एंटी सबमरीन वॉरफेयर जैसे मिशन को अंजाम दे सकती है। इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी तैनात होती हैं। इस परियोजना के तहत तुर्की पाकिस्तान की नौसेना के लिए चार जिन्ना-श्रेणी के फ्रिगेट भी बना रहा है।

भारत के लिए खतरे की बात नहीं
तुर्की के ये युद्धपोत भारत के लिए विशेष खतरा नहीं बन पाएंगे। क्योंकि, ये युद्धपोत मध्यम श्रेणी के माने जाते हैं। इनको रडार पर पकड़ना भी भारत के लिए काफी आसान होगा भारतीय नौसेना में पहले से ही ऐसे डिस्ट्रायर और पनडुब्बियां हैं जो तुर्की के इस कार्वेट को बर्बाद करने की क्षमता रखते हैं।

तुर्की और चीन से युद्धपोत खरीद रहा पाकिस्तान
पाकिस्तानी नौसेना के पूर्व चीफ एडमिरल जफर महमूद अब्बासी ने कुछ दिन पहले ही अपने विदाई भाषण में कहा था कि हम अगले कुछ वर्षों में चार चीनी फ्रिगेट्स और 2023 से 2025 के बीच में तुर्की में बने हुए मध्यम श्रेणी के कई जहाजों को शामिल करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि चीन के सहयोग के चल रही हेंगर पनडुब्बी परियोजना अपनी योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है। इसस प्रोजक्ट के जरिए पाकिस्तान और चीन के लिए चार-चार पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।

चीन से 8 पनडुब्बी खरीद रहा पाकिस्तान

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी नौसेना अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए चीनी डिजाइन पर आधारित टाइप 039 बी युआन क्लास की पनडुब्बी खरीद रही है। डीजल इलेक्ट्रिक चीन की यह पनडुब्बी पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत में इजाफा करने में सक्षम है। जिसमें एंटी शिप क्रूज मिसाइल लगी होती हैं। यह पनडुब्बी एयर इंडिपैंडेंट प्रपल्शन सिस्टम के कारण कम आवाज पैदा करती है। जिससे इसे पानी के नीचे पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।


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नई दिल्ली। भारत के खिलाफ दुश्मन देश पाकिस्तान आतंकियों की नई फौज खड़ी करना चाहता है। आए दिन हो रहे हमलों से तबाह हो रहे अफगानिस्तान को पाकिस्तान तालिबानी आतंकियों के हाथों में सौंप देना चाहता है। ऐसे में अमेरिका अफगानिस्तान में शांति के लिए तालिबानियों और अफगान नेताओं के बीच संधि कराने की लगातार कोशिशों में लगा हुआ है। यदि पाक की मंशा कुछ और ही है। ऐसे में भारत अफगानिस्तान में लोकतंत्र स्थापित करना चाहता है और इसके लिए वह अमेरिका के कदमों का समर्थन कर रहा है।

लोकतंत्र से ज्यादा गनतंत्र
ऐसे में इन सबको ध्यान में रखते हुए पाकिस्तानी सरकार के लिए लोकतंत्र से ज्यादा गनतंत्र अहम है। वहीं पाकिस्तान चाहता है कि काबुल में तालिबानी सत्ता संभाले। जबकि भारत का इस मामले में सीधा रुख है कि अफगानिस्तान में अफगान नेताओं का राज होना चाहिए।


इस बीच अमेरिका ने तालिबान के साथ फिर से बातचीत शुरू करने की घोषणा की है। धमाकों से हिले अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जालमे खलीलजाद जल्द ही काबुल, दोहा और अन्य क्षेत्रीय राजधानी का दौरा करेंगे।

पाकिस्तान तालिबानियों का मददगार
जिससे अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिरता लाई जा सके। रविवार को अमेरिकी प्रशासन ने बयान जारी कर यह बात कही थी। जोकि बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद खलीलजाद का ये पहला दौरा होगा। इस बारे में अमेरिका द्वारा जारी बयान के मुताबिक विशेष प्रतिनिधि जल्द ही दिल्ली और इस्लामाबाद का भी दौरा कर सकते हैं।

वहीं पाकिस्तान तालिबानियों का मददगार भी बना हुआ है। सालों पहले 2001 में जब अमेरिका ने हमला किया तो बहुत से तालिबानी नेताओं ने भागकर पाकिस्तान में शरण ले ली थी। वहीं पाक की धरती से ही तालिबानी लगातार अफगानिस्तान में हमले करने में लगे हुए हैं।


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