विज्ञानिकों को झटका: गिरा सबसे बड़ा एंटीना, अब एलियन्स का नहीं चल सकेगा पता

विज्ञानिकों को झटका: गिरा सबसे बड़ा एंटीना, अब एलियन्स का नहीं चल सकेगा पता

नई दिल्ली: विज्ञान की दुनिया बहुत बड़ी है। आज जो हम आधुनिक चीजें इस्तेमाल करते हैं या प्राचीन चीजों की जानकारी हमारे पास है वो विज्ञान की ही देन है। कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। एक ऐसा ही आविष्कार जो हमें दूसरी दुनिया की जानकारी देता था मंगलवार देर रात एक हादसे में दुनिया का सबसे ताकतवर टेलीस्कोप पूरी तरह से नष्ट हो गया। यह पूरा एंटीना 450 फीट नीचे गिरकर टूट गया।

एलियन ग्रहों और एस्टेरॉयड्स की खबरें आनी बंद हो गई
इस एंटीना के नष्ट होने की वजह से दुनिया को एलियन ग्रहों और एस्टेरॉयड्स की खबरें देने वाली ऑब्जरवेटरी ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया है। मंगलवार को एंटीना के ऊपर पूरा का पूरा एक टावर और बाकी केबल गिर पड़े। इसकी वजह से डिश एंटीना जमीन पर गिर गया। पिछले महीने ही इसका एक केबल टूटने से एंटीना क्षतिग्रस्त हुआ था। बता दें कि इस एंटीना के ऊपर जेम्स बॉन्ड सीरीज की मूवी गोल्डन आई की शूटिंग भी हुई थी।

ऑब्जरवेटरी को बनने में तीन साल लगे थे
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्यूर्टो रिको आर्सीबो ऑब्जरवेटरी (Arecibo Observatory) में ये एंटीना लगा हुआ था। यह एंटीना अंतरिक्ष की गहराइयों से आने वाले खतरों जैसे एस्टेरॉयड्स, मीटियॉर्स और एलियन दुनिया आदि की जानकारी दुनिया भर के वैज्ञानिकों को देता था। इस ऑब्जरवेटरी का संचालन एना जी मेंडेज यूनिवर्सिटी, नेशनल साइंस फाउंडेशन ( US National Science Foundation-NSF) और यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा मिलकर करते हैं।

इस ऑब्जरवेटरी को बनने में तीन साल लगे। इसका निर्माण कार्य 1960 में शुरू हुआ था। जो 1963 में पूरा हुआ। इस ऑब्जरवेटरी के जो केबल टूटे हैं उन पर 5.44 लाख किलोग्राम वजन था।

खगोलीय वस्तुओं के बारे में जानकारी देता था ये एंटीना
इस ऑब्जरवेटरी में एक 1007 फीट तीन इंच व्यास का बड़ा गोलाकार एंटीना है। जो सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों को पकड़ता है। इसका मुख्य काम धरती की तरफ आ रही खगोलीय वस्तुओं के बारे में जानकारी देना है। 1007 फीट व्यास वाले एंटीना में 40 हजार एल्यूमिनियम के पैनल्स लगे हैं जो सिग्नल रिसीव करने में मदद करते हैं। इस एंटीना को आर्सीबो राडार कहते हैं। आर्सीबो ऑब्जरवेटरी को बनाने का आइडिया कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलियम ई गॉर्डन को आया था।

बांधने के लिए 3.25 इंच मोटे स्टील के तारों का उपयोग
इस एंटीना के बीचो-बीच एक रिफलेक्टर है जो ब्रिज के जरिए लटका हुआ है। यहां ऐसे दो रिफलेक्टर्स है। पहला 365 फीट की ऊंचाई पर और दूसरा 265 फीट की ऊंचाई पर। सभी रिफलेक्टर्स को तीन ऊंचे और मजबूत कॉन्क्रीट से बने टावर से बांधा गया है। बांधने के लिए 3.25 इंच मोटे स्टील के तारों का उपयोग किया गया है। ऑर्सीबो राडार यानी एंटीना कुल 20 एकड़ क्षेत्रफल में फैला है।

इसकी गहराई 167 फीट है। इनमें से कुछ केबल टूट गए। जो केबल टूटे हैं उनपर 2.83 लाख किलोग्राम का वजन था। इसकी वजह से एंटीना के 100 फीट के हिस्से में छेद हो गया है। एल्यूमिनियम से बने एंटीना का बड़ा हिस्सा टूटकर जमीन पर गिर चुका है। आपको बता दें कि इस एंटीना की मदद से दुनिया भर के करीब 250 साइंटिस्ट अंतरिक्ष पर नजर रखते हैं।

हालीवुड की मशहूर फिल्म जेम्स बॉन्ड फिल्म की भी शूटिंग हुई थी
आपको बता दें कि इस ऑब्जरवेटरी में जेम्स बॉन्ड सीरीज की मशहूर फिल्म “गोल्डन आई” का क्लाइमैक्स सीन फिल्माया गया था। इस फिल्म में पियर्स ब्रॉसनन जेम्स बॉन्ड का किरदार निभा रहे थे। इसके अलावा इस ऑब्जरवेटरी में कई फिल्में, वेबसीरीज और डॉक्यूमेंट्रीज बन चुकी हैं। इसके अलावा जोडी फॉस्टर की फिल्म कॉन्टैक्ट की शूटिंग भी यहीं हुई थी।

मंगलवार की रात इसके सारे केबल टूट गए और यह डिश एंटीना पर गिर पड़े, जिसकी वजह से पूरा का पूरा डिश एंटीना क्षतिग्रस्त हो गया। एंटीना के ऊपर लटका हुआ ढांचा भी गिर गया। जिससे काफी ज्यादा नुकसान हुआ है। ऑर्सीबो ऑब्जरवेटरी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि विज्ञान की दुनिया के एक युग का अंत। ऑर्सीबो टेलीस्कोप टूट गया लेकिन इससे किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत के लिए बनाया गया था
इस एंटीना को जब बनाया गया था तब इसका मकसद रक्षा प्रणाली को मजबूत करना था। इसके जरिए प्यूर्टो रिको एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत करना चाहता था। बाद में इसका उपयोग वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया जाने लगा। इस एंटीना ने सिर्फ अंतरिक्ष से आने वाले खतरों की ही जानकारी नहीं दी है। बल्कि आसपास के देशों को कई प्राकृतिक आपदाओं की सूचनाएं भी मुहैया कराई हैं।

  900 टन का यह ढांचा कुछ ही केबल्स पर टिका था
इस एंटीना ने पिछले 50 सालों में कई चक्रवातों, भूकंपों और हरिकेन्स की जानकारियां भी दी हैं। अब साइंटिस्ट हैरान है कि करीब 900 टन का यह ढांचा कुछ ही केबल्स पर टिका है। इसे तत्काल रिपेयरिंग की जरूरत है। अगर जल्द ही इसकी मरम्मत नहीं की गई तो पूरा का पूरा ढांचा गिर सकता है। अगर यह ढांचा गिर गया तो इसे वापस बनाने में काफी समय लग जाएगा। साइंटिस्ट ने टूट-फूट का आकलन किया था तो पता चला कि करीब 89।46 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। अगले महीने तक नए केबल आने की उम्मीद है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ऑब्जरवेटरी के प्रमुख ने नेशनल साइंस फाउंडेशन से मरम्मत के लिए नुकसान हुए रकम की मांग की थी।


नेपाल में प्रचंड धड़े ने पीएम केपी शर्मा ओली को पार्टी से निकाला, स्पष्टीकरण नहीं देने पर कार्रवाई

नेपाल में प्रचंड धड़े ने पीएम केपी शर्मा ओली को पार्टी से निकाला, स्पष्टीकरण नहीं देने पर कार्रवाई

काठमांडू। नेपाल की राजनीति में कई दिनों से जारी उथल-पुथल के बीच सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी विभाजन की ओर बढ़ रही है। रविवार को प्रचंड धड़े ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं पुष्प कमल दहल प्रचंड और प्रधानमंत्री ओली के बीच हाल के दिनों में कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। ओली द्वारा संसद भंग किए जाने के बाद से दोनों नेता खुलकर आमने-सामने आ गए हैं।

मांगा था स्पष्टीकरण 

सूत्रों ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने ओली से उनके हाल के कदमों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था। इसका जवाब देने में असफल रहने के बाद स्थायी समिति की बैठक में ओली को पार्टी से निकालने का फैसला किया गया। इससे पहले दिसंबर में प्रचंड धड़े ने ओली को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उनकी जगह माधव कुमार नेपाल को पार्टी का दूसरा अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी के पहले अध्यक्ष प्रचंड खुद हैं।

जवाब नहीं देने पर निकाला 

15 जनवरी को प्रचंड धड़े ने ओली को पत्र लिखकर कहा कि उनकी गतिविधियां पार्टी की नीतियों के खिलाफ जा रही हैं। इसको लेकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। लेकिन, ओली द्वारा किसी तरह का जवाब नहीं दिए जाने के बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। ओली का विरोधी खेमा उन पर पार्टी संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है।

हमलावर है प्रचंड गुट 

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले ही प्रचंड धड़े ने काठमांडू में एक बड़ी सरकार विरोधी रैली की थी। रैली को संबोधित करते हुए प्रचंड ने संसद भंग करने को असंवैधानिक करार दिया था। उनका कहना था कि ओली के इस कदम से देश की संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। माधव कुमार नेपाल का कहना था कि संविधान ने प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार नहीं दिया है।

ओली ने दी थी यह दलील 

बताते चलें कि प्रचंड के साथ चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच पिछले 20 दिसंबर को ओली ने संसद को भंग कर दिया था। इसके बाद से देश में राजनीतिक संकट और गहरा गया। ओली को चीन के प्रति रुझान रखने वाला नेता माना जाता है। उनके इस फैसले की देशभर में प्रतिक्रिया हुई और इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया गया। दूसरी तरफ ओली का कहना था कि उन्हें जब पता चला कि प्रचंड धड़ा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है, तब वे संसद भंग करने के लिए मजबूर हुए। 

आम लोग भी कर रहे विरोध 

बता दें कि दोनों राजनीतिक दलों का विलय विगत 2018 में हुआ था। नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के अध्‍यक्ष ओली जबकि नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी (माओ) के प्रमुख पुष्प कमल दहल प्रचंड थे। नेपाल में गहराए सियासी संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आम लोग भी ओली की मुखालफत में उतर आए हैं। काठमांडू में आए दिन प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग संसद भंग करने के ओली के फैसले की निंदा कर रहे हैं। यही नहीं कई प्रदर्शनों में तो राजशाही को भी बहाल करने तक की मांग की गई है। 


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