कीव के बाहर काम शुरू करेगा भारतीय दूतावास

कीव के बाहर काम शुरू करेगा भारतीय दूतावास

यूक्रेन में भारतीय दूतावास कीव के बाहर 17 मई से काम प्रारम्भ करेगा. भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह घोषणा की. 13 मार्च से भारतीय दूतावास अस्थायी रूप से पोलैंड के वार्सा से काम कर रहा है. कई पश्चिमी राष्ट्रों के यूक्रेन की राजधानी कीव में अपने दूतावास दोबारा खोलने के बाद यह फैसला लिया गया है. 26 फरवरी को लांच ऑपरेशन गंगा के अनुसार 20 हजार से अधिक हिंदुस्तानियों को यूक्रेन से निकालने के बाद दूतावास को वार्सा ले जाया गया था

ईरान में खाद्य दामों में वृद्धि
ईरान के दो दक्षिणी शहरों में सब्सिडी वाले खाद्यान्नों की कीमतों में अचानक की गई वृद्धि के विरूद्ध प्रदर्शन कर रहे कम से कम 22 लोगों को अरैस्ट किया गया है. ईरान में ये गिरफ्तारियां इस हफ्ते खाद्य तेल, चिकन, अंडा और दूध के दामों में 300 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा के बाद हुई हैं.

मूल्य वृद्धि के विरूद्ध लोगों में जबरदस्त गुस्सा है और वे प्रदर्शन कर रहे हैं. ईरान ने यह वृद्धि खाद्यान्न के प्रमुख निर्यातक यूक्रेन पर रूसी सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक आपूर्ति शृंखला के बाधित होने और पश्चिम एशियाई राष्ट्रों में खाने-पीने के सामान की कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर की है. जानकारी के मुताबिक, करीब 200 लोग खुजेस्तान प्रांत के अंदिमेश्क शहर में जमा हुए और प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव करने लगे.

नेपाल : वोटरों को ले जा रही जीप खाई में गिरी, 14 मरे, 10 घायल
स्यांगिया जिले के अरखलबास में क्षेत्रीय निकाय चुनाव में वोट डालने के लिए लोगों को लेकर जा रही एक जीप पहाड़ी सड़क से 500 फुट गहरी खाई में गिर गई. इससे 14 लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हैं. पुलिस ने बताया कि नेपाल में इन दिनों क्षेत्रीय निकायों के चुनाव चल रहे हैं.

भारत के साथ ‘सार्थक व रचनात्मक संवाद’ का माहौल नहीं : पाकिस्तान
पाक के विदेश मंत्रालय ने बोला है कि हिंदुस्तान के साथ लंबित मुद्दों पर कूटनीति के दरवाजे खुले हैं लेकिन ‘सार्थक व रचनात्मक संवाद का माहौल नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार ने एक पत्रकार वार्ता में हिंदुस्तान से रिश्तों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में यह टिप्पणी की.

पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ में छपी समाचार के अनुसार इफ्तिखार ने कहा, कूटनीति में आप दरवाजे कभी भी बंद नहीं करते हैं. उन्होंने माना, विवादों के कूटनीतिक निवारण की पाकिस्तानी ख़्वाहिश के बावजूद सार्थक, रचनात्मक संवाद का माहौल नहीं है. बता दें, हिंदुस्तान ने कई बार बोला है कि वह आतंक, हिंसा व शत्रुता से मुक्त माहौल में पड़ोसी से सामान्य संबंध की आकांक्षा रखता है और इस माहौल को बनाने की जिम्मेदारी पाक की है.

भारतीय उच्चायुक्त से मिले विक्रमसिंघे, सहायता पर चर्चा
पीएम बनने के बाद रानिल विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को पहली बार भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले को बुलाकर वार्ता की और आर्थिक संकट के समय वित्तीय सहायता के लिए भारतीय पीएम मोदी को धन्यवाद दिया. भारतीय दूतावास ने एक ट्वीट में बताया, नए पीएम के साथ लोकतांत्रिक ढंग से श्रीलंका के लोगों की भलाई, राष्ट्र में आर्थिक स्थिति सुधारने और स्थायित्व पर चर्चा हुई.

गैंगस्टर छोटा शकील के दो गुर्गे गिरफ्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खासमखास गैंगस्टर छोटा शकील के दो गुर्गों को अरैस्ट किया है. इन दोनों को भगोड़े दाऊद के आपराधिक सिंडिकेट के वित्तीय लेनदेन और अवैध गतिविधियों के संचालन और आतंकवादी फंडिंग मुद्दे में पश्चिमी मुंबई से पकड़ा गया है. 

आरिफ अबूबकर शेख को गोरेगांव पश्चिम और शब्बीर अबूबकर शेख को ठाणे जिले में मीरा रोड पूर्व से पकड़ा गया. आरिफ छोटा शकील का जीजा बताया जा रहा है. वह गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पंड्या की मर्डर मुद्दे में आरोपी है और उसे 2006 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था. एनआईए का बोलना है कि ये सभी लश्कर-ए-ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा जैसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के साथ जुड़े हुए हैं.


किम जोंग उन के सामने गंभीर संकट

किम जोंग उन के सामने गंभीर संकट

 एक दशक से अधिक अवधि के दौरान उत्तर कोरिया (North Korea) के नेता के रूप में किम जोंग उन (Kim Jong-un) ने अपने शासन में ‘आत्म निर्भरता’ पर जोर दिया और अंतर्राष्ट्रीय योगदान को दरकिनार किया लेकिन अपने राष्ट्र में Covid-19 संक्रमण बढ़ने के कारण वह विदेशी योगदान लेने को लेकर गंभीर दुविधा में फंसे दिख रहे हैं

भारी दुविधा में फंसे किम जोंग उन

इसके पहले उन्होंने अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को घरेलू रणनीति से ठीक करने का कोशिश किया लेकिन उत्तर कोरिया में हजारों लोगों के Covid-19 से संक्रमित होने की संभावना के चलते किम का अभिमान दांव पर है किम इस समय चौराहे पर खड़े हैं, जहां उन्हें या तो अपने अभिमान से सौदा करके रोग से लड़ने के लिए विदेशी सहायता प्राप्त करनी होगी या फिर अकेले चलना होगा लेकिन अकेले चलने से बड़ी संख्या में लोगों के Covid-19 से मरने की संभावना है, जिससे उनका नेतृत्व कमजोर हो सकता है

अन्य राष्ट्रों की सहायता लेंगे किम जोंग उन?

सियोल स्थित क्यूंगनम यूनिवर्सिटी (Yeungnam University) के सूदूर पूर्वी शोध संस्थान की प्रोफेसर लिम एउल-चुल कहते हैं कि यिद किम अमेरिकी या पश्चिमी राष्ट्रों की सहायता स्वीकार करते हैं, तो उन्होंने जिस ‘आत्म निर्भरता’ की नीति का पालन दृढ़ता से किया है, उसे झटका लग सकता है और उन पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है

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प्रोफेसर कहते हैं कि यदि वे कुछ नहीं करते यानी अकेले चलते हैं, तो संक्रमण से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु के रूप में एक आपदा का सामना करना पड़ सकता है उन्होंने बोला कि पिछले सप्ताह Covid-19 संक्रमण बढ़ने के बाद से उत्तर कोरिया में 56 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि डेढ़ लाख से अधिक अन्य लोग बीमार हैं

कोरोना एक गंभीर संकट

बाहरी पर्यक्षकों का बोलना है कि रोग के ज्यादातर मुद्दे कोविड-19 वायरस के कारण हैं उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया कुछ भी कहे, लेकिन कोविड-19 वायरस संक्रमण के कई गुना और गंभीर होने की संभावना है उत्तर कोरिया में Covid-19 की पर्याप्त जांच का अभाव है और जानकारों के अनुसार उत्तर कोरिया Covid-19 के कारण होने वाली मौतों को छिपा रहा है, ताकि संभावित अस्थिरता से बचा जा सके क्योंकि जनता में अस्थिरता किम को सियासी रूप से हानि पहुंचा सकता है

मौत का आंकड़ा छुपा रहे हैं किम जोंग उन?

कुछ पर्यक्षकों ने बोला कि उत्तर कोरिया में बताया गया मृत्यु का आंकड़ा कम है, जहां कि 2.6 करोड़ जनसंख्या में से ज्यादातर लोगों को Covid-19 का टीका नहीं लगाया गया है उत्तर कोरिया सार्वजनिक रूप से मौतों की असली संख्या को छिपाने में सक्षम हो सकता है, लेकिन राष्ट्र में आवाजाही और पृथकवास नियमों को लेकर कड़े प्रतिबंध इसकी कृषि को हानि पहुंचा सकते हैं 2 वर्ष से अधिक समय से जारी महामारी और सीमा बंद रहने के कारण इसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही डांवाडोल है

सियोल यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कोरियन स्टडीज के प्रोफेसर यांग मू-जिन ने बोला कि उत्तर कोरिया चिकित्सा आपूर्ति और भोजन और दैनिक आवश्यकताओं की कमी को लेकर भी चिंतित है, जो सीमा बंद होने के दौरान बाजारों से नदारद हैं किम ने इसके पहले संयुक्त देश समर्थित ‘कोवाक्स’ वितरण कार्यक्रम द्वारा दी जाने वाली टीकों की लाखों खुराक को अस्वीकार कर दिया था

क्या निर्णय लेंगे किम जोंग उन?

एक अन्य प्रोफेसर ने बोला कि किम अंततः चीनी सहायता प्राप्त करना चाहेंगे, लेकिन वह दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका या कोवाक्स से सहायता नहीं लेंगे, क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित होगी बाहरी सहायता प्राप्त करना उत्तर कोरिया को एक मुश्किल स्थिति में डाल देगा किम ने पिछले दो सालों के दौरान बार-बार अपने राष्ट्र को महामारी के लिए ‘अभेद्य’ बताया था लेकिन गत शनिवार को उन्होंने बोला कि उनका राष्ट्र ‘उथल-पुथल’ का सामना कर रहा है