अमेरिका में रिपब्लिकन शासित राज्यों में पुलिस को ज्यादा अधिकार, जानें

अमेरिका में रिपब्लिकन शासित राज्यों में पुलिस को ज्यादा अधिकार, जानें

अमेरिका में साल भर चले पुलिस विरोधी आंदोलनों के मद्देनजर जिन रिपब्लिकन शासित राज्यों ने पुलिस विभाग में सुधार के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिए थे, अब वही राज्य पुलिस को ज्यादा अधिकार दे रहे हैं। नए अधिकारों के तहत पुलिस आंदोलनों के खिलाफ ज्यादा सख्ती कर सकेगी।

अमेरिका में पुलिसकर्मी द्वारा क्रूर तरीके से अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद अमेरिका में बड़े हिस्से में दंगे भड़क उठे थे। न्यूयॉर्क, पोर्टलैंड, मिनापोलिस जैसे बड़े शहर हिंसा की आग में जल उठे थे। दुनिया के कई देशों में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद अमेरिकी सरकार बैकफुट पर आ गई थी और उसने पुलिस को संयम बरतने के लिए कहा था। अप्रैल में फ्लोरिडा के राज्य प्रतिनिधि जुआन फर्नाडीज-बरक्विन ने कहा था कि सामूहिक हिंसा की वारदातों से निपटने के लिए हमें कानूनों को मजबूत करना होगा। जुआन रिपब्लिकन पार्टी के नेता हैं।

फ्लोरिडा उन राज्यों में शामिल है जिसने पुलिस के अधिकारों से संबंधित प्रस्ताव पारित कर उसे लागू कर दिया है। इसमें पुलिस को कार्रवाई के लिए ज्यादा अधिकार मिल गए हैं। जिन राज्यों ने पुलिस के अधिकार बढ़ाए हैं उनमें एरिजोना, आयोवा, ओक्लाहोमा, टेनेसी और योमिंग हैं। गुरुवार को आयोवा के गवर्नर किम रेनोल्ड्स ने इससे संबंधित विधेयक पर दस्तखत कर दिए। संशोधित कानून में पुलिस को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। इन सभी राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी पुलिस को ज्यादा अधिकार दिए जाने के पक्ष में है।

गन लॉ को लेकर विरोधाभासी हालात

अमेरिका की संघीय सरकार द्वारा बनाए गए आग्नेयास्त्र कानून (गन लॉ) को लेकर रिपब्लिकन शासित राज्यों में विरोधाभास की स्थिति है। मिसूरी ने हाल ही में संघीय कानून के खिलाफ जाकर हथियार खरीदने वाले के अधिकार में कटौती करने से इन्कार कर दिया। वहां पर हथियार विक्रेता को खरीदने वाले की पृष्ठभूमि जानने का अधिकार नहीं होगा। इस सिलसिले में पुलिस की कोई भूमिका नहीं होगी। कुछ अन्य राज्यों- एरिजोना, टेनेसी, अर्कासांस, नॉर्थ डकोटा, वर्जीनिया आदि ने भी पुरानी व्यवस्था ही कायम रखने की इच्छा जताई है।


तालिबानी आतंकवादियों में संघर्ष की समाचार हकीकत या झूठ? Mullah Baradar को खोलनी ही पड़ी जुबान

तालिबानी आतंकवादियों में संघर्ष की समाचार हकीकत या झूठ? Mullah Baradar को खोलनी ही पड़ी जुबान

काबुल: हक्कानी (Haqqani) गुट के साथ जंग में घायल होने की खबरों पर आज तालिबान (Taliban) ने आधिकारिक रूप से तालिबानी सरकार के उप-प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर (Mullah Baradar) के अफगानिस्तान के सरकारी चैनल RTA पश्तो को दिए गए साक्षात्कार को जारी किया है साक्षात्कार में मुल्ला बरादर हक्कानी गुट के साथ जंग की खबरों का खंडन कर रहा है और बता रहा है कि तालिबान में कोई आपसी संघर्ष नहीं चल रहा, सब एक परिवार का भाग हैं

साथ ही कतर के उप-प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री के अफगानिस्तान दौरे में शामिल ना होने पर मुल्ला बरादर ने बोला कि उसे पता ही नहीं था कि कतर के उप-प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री अफगानिस्तान के दौरे पर आ रहें हैं अन्यथा वो जरूर उपस्थित रहता

सवाल- मुल्ला बरादर अखुंद साहब आपके आपसी जंग में घायल होने और कई स्थान मृत्यु की खबरें भी मीडिया में दिखाई जा रही हैं आपका इस पर बोलना है क्या ये हकीकत है?

मुल्ला बरादर- नहीं ये हकीकत नहीं है जो आजकल खबरें फैलाई जा रही हैं कि हमारे बीच आपसी जंग चल रही है (बरादर गुट और हक्कानी गुट के बीच में) और मैं घायल हूं, ये सरासर गलत है हम एक परिवार की तरह हैं और प्यार-मोहब्बत से एक साथ कार्य कर रहे हैं मैं एक स्थान कार्य से यात्रा पर गया हुआ था जहां मीडिया उपस्थित नहीं था

सवाल- अभी कुछ दिन पहले कतर के विदेश मंत्री काबुल के दौरे पर आए थे लेकिन आप उसमें उपस्थित नहीं थे

मुल्ला बरादर- कतर के विदेश मंत्री के अफगानिस्तान के दौरे पर आने की जानकारी मुझे नहीं थी यदि मुझे पता होता कि वो आ रहे हैं तो मैं अपने यात्रा को कैंसिल करके उनके साथ मीटिंग में जरूर शामिल होता

सवाल- इस साक्षात्कार के लिए आपका शुक्रिया आप आखिर में कुछ बोलना चाहते हैं

मुल्ला बरादर- इससे पहले जब कतर में हमारे बीच शांति मीटिंग हो रही थी तब भी कुछ मीडिया अपने फायदे के लिए ऐसे ही असत्य दिखाती थी जैसा कि आज दिखा रहे हैं मैं मीडिया से दरख्वास्त करना चाहता हूं कि वो हकीकत दिखाएं ना कि अपने फायदे के लिए झूठ ये ठीक नही है साक्षात्कार के लिए आपका भी शुक्रिया