तालिबानी आतंकवादियों में संघर्ष की समाचार हकीकत या झूठ? Mullah Baradar को खोलनी ही पड़ी जुबान

तालिबानी आतंकवादियों में संघर्ष की समाचार हकीकत या झूठ? Mullah Baradar को खोलनी ही पड़ी जुबान

काबुल: हक्कानी (Haqqani) गुट के साथ जंग में घायल होने की खबरों पर आज तालिबान (Taliban) ने आधिकारिक रूप से तालिबानी सरकार के उप-प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर (Mullah Baradar) के अफगानिस्तान के सरकारी चैनल RTA पश्तो को दिए गए साक्षात्कार को जारी किया है साक्षात्कार में मुल्ला बरादर हक्कानी गुट के साथ जंग की खबरों का खंडन कर रहा है और बता रहा है कि तालिबान में कोई आपसी संघर्ष नहीं चल रहा, सब एक परिवार का भाग हैं

साथ ही कतर के उप-प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री के अफगानिस्तान दौरे में शामिल ना होने पर मुल्ला बरादर ने बोला कि उसे पता ही नहीं था कि कतर के उप-प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री अफगानिस्तान के दौरे पर आ रहें हैं अन्यथा वो जरूर उपस्थित रहता

सवाल- मुल्ला बरादर अखुंद साहब आपके आपसी जंग में घायल होने और कई स्थान मृत्यु की खबरें भी मीडिया में दिखाई जा रही हैं आपका इस पर बोलना है क्या ये हकीकत है?

मुल्ला बरादर- नहीं ये हकीकत नहीं है जो आजकल खबरें फैलाई जा रही हैं कि हमारे बीच आपसी जंग चल रही है (बरादर गुट और हक्कानी गुट के बीच में) और मैं घायल हूं, ये सरासर गलत है हम एक परिवार की तरह हैं और प्यार-मोहब्बत से एक साथ कार्य कर रहे हैं मैं एक स्थान कार्य से यात्रा पर गया हुआ था जहां मीडिया उपस्थित नहीं था

सवाल- अभी कुछ दिन पहले कतर के विदेश मंत्री काबुल के दौरे पर आए थे लेकिन आप उसमें उपस्थित नहीं थे

मुल्ला बरादर- कतर के विदेश मंत्री के अफगानिस्तान के दौरे पर आने की जानकारी मुझे नहीं थी यदि मुझे पता होता कि वो आ रहे हैं तो मैं अपने यात्रा को कैंसिल करके उनके साथ मीटिंग में जरूर शामिल होता

सवाल- इस साक्षात्कार के लिए आपका शुक्रिया आप आखिर में कुछ बोलना चाहते हैं

मुल्ला बरादर- इससे पहले जब कतर में हमारे बीच शांति मीटिंग हो रही थी तब भी कुछ मीडिया अपने फायदे के लिए ऐसे ही असत्य दिखाती थी जैसा कि आज दिखा रहे हैं मैं मीडिया से दरख्वास्त करना चाहता हूं कि वो हकीकत दिखाएं ना कि अपने फायदे के लिए झूठ ये ठीक नही है साक्षात्कार के लिए आपका भी शुक्रिया


कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

बिजली के उत्पादन में कोयले का इस्तेमाल बंद करने के मुद्दे पर दुनिया के 20 सबसे संपन्न देशों में मतभेद पैदा हो गए हैं। धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का इस्तेमाल जरूरी माना गया है। इससे इटली की राजधानी रोम में 30-31 अक्टूबर को होने वाली जी 20 देशों के नेताओं की बैठक में पर्यावरण सुधार के मसले पर आमराय बनने की संभावना क्षीण हो गई है। यह बैठक स्काटलैंड के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले इसी साल पर्यावरण पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी बैठक के रूप में देखी जा रही है।

इसी साल जुलाई में नेपल्स में हुए दुनिया के ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रियों के सम्मेलन में कोयले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे चीन और भारत ने पर्यावरण सुधार के लिए जिन कदमों का आश्वासन दिया था, वह उन्होंने पूरा नहीं किया है। यह बात नाम स्पष्ट न किए जाने की शर्त पर तीन सूत्रों ने कही है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों विकासशील देश कोविड-19 महामारी से पैदा हुई मंदी से निपटने के लिए अपने ऊर्जा उत्पादन में कमी नहीं करना चाहते हैं। यही वजह कोयला इस्तेमाल में कमी नहीं होने दे रही। दोनों देशों का मानना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य विकसित देश 20 वीं सदी में कोयले का इस्तेमाल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए लाभ अर्जित कर चुके हैं। अब जबकि भारत और चीन अपनी जरूरत के लिए कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं तब उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कहा जा रहा है। भारत पश्चिमी देशों से पर्यावरण सुधार के लिए प्रदूषण मुक्त नई तकनीक के साथ ही कोयले का इस्तेमाल कम करने के बदले आर्थिक सहायता चाहता है। पेरिस समझौते में विकासशील देशों के लिए ये प्रविधान हैं। लेकिन सहायता में व्यवधान पड़ने के कारण कोयले का इस्तेमाल तेज गति से कम नहीं हो पा रहा है।


संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले हुए पेरिस समझौते में धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से कम करने पर सहमति बनी थी। इस समझौते की ग्लासगो में समीक्षा होनी है और भविष्य के लिए रूपरेखा तय होनी है। लेकिन कोविड महामारी के चलते बने हालात ने इस प्रक्रिया के बाधित होने की आशंका पैदा कर दी है।