तुर्की ने फ्रांस के विरुद्ध खोला एक नया मोर्चा

तुर्की ने फ्रांस के विरुद्ध खोला एक नया मोर्चा

तुर्की ने ईरान के इस दावे का खंडन किया है कि तुर्की में एक बांध के निर्माण से क्षेत्र में रेत और धूल के तूफान पैदा हो रहे हैं.  तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता तंजू बिल्गिक ने एक बयान में बोला कि इस तरह के आरोपों की "कोई वैज्ञानिक वैधता नहीं थी.

बिल्गिक के अनुसार, कुछ ईरानी राजनेताओं और मीडिया ने ईरान की पर्यावरणीय समस्याओं के लिए तुर्की को दोषी ठहराया है, विशेष रूप से तेहरान में हाल ही में भारी वायु प्रदूषण रेत और धूल के तूफान के कारण. हालांकि, उनका दावा है कि ईरान अफ्रीका और मध्य पूर्व से रेगिस्तान की धूल से सबसे अधिक प्रभावित है, जो दुनिया की धूल के दो सबसे जरूरी उत्पादक हैं.

इसके अलावा, जलवायु बदलाव से संबंधित भूमि क्षरण, वनों की कटाई, मरुस्थलीकरण और सूखा इस तरह के तूफानों को तेज कर रहे हैं, बिल्गिक के अनुसार, जिन्होंने यह भी बोला कि प्रत्येक राष्ट्र जल और भूमि संसाधनों के स्थायी उपयोग के लिए जवाबदेह है.

बिल्गिक के अनुसार, तुर्की सीमापार जलमार्गों को रिपेरियन राष्ट्रों के बीच टकराव के कारण के बजाय योगदान के अवसर के रूप में देखता है.  उन्होंने कहा, "तुर्की इस मामले पर ईरान के साथ तर्कसंगत और वैज्ञानिक ढंग से काम करने के लिए तैयार है.

ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दोल्लाहियन के अनुसार, अरास नदी पर तुर्की का अपस्ट्रीम बांध-निर्माण, इस क्षेत्र में एक साझा जलमार्ग, "अस्वीकार्य" है. उन्होंने ईरानी संसद को बताया कि तेहरान इराकी प्रशासन के संपर्क में है क्योंकि तुर्की की बांध निर्माण योजनाओं से दोनों राष्ट्रों को हानि होगा.

ईरानी मंत्री ने बोला कि उनका राष्ट्र तुर्की के साथ वार्ता के माध्यम से इस मामले को हल करने का इरादा रखता है, और अंकारा को मुद्दों को संभालने के लिए एक संयुक्त जल समिति बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है.


किम जोंग उन के सामने गंभीर संकट

किम जोंग उन के सामने गंभीर संकट

 एक दशक से अधिक अवधि के दौरान उत्तर कोरिया (North Korea) के नेता के रूप में किम जोंग उन (Kim Jong-un) ने अपने शासन में ‘आत्म निर्भरता’ पर जोर दिया और अंतर्राष्ट्रीय योगदान को दरकिनार किया लेकिन अपने राष्ट्र में Covid-19 संक्रमण बढ़ने के कारण वह विदेशी योगदान लेने को लेकर गंभीर दुविधा में फंसे दिख रहे हैं

भारी दुविधा में फंसे किम जोंग उन

इसके पहले उन्होंने अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को घरेलू रणनीति से ठीक करने का कोशिश किया लेकिन उत्तर कोरिया में हजारों लोगों के Covid-19 से संक्रमित होने की संभावना के चलते किम का अभिमान दांव पर है किम इस समय चौराहे पर खड़े हैं, जहां उन्हें या तो अपने अभिमान से सौदा करके रोग से लड़ने के लिए विदेशी सहायता प्राप्त करनी होगी या फिर अकेले चलना होगा लेकिन अकेले चलने से बड़ी संख्या में लोगों के Covid-19 से मरने की संभावना है, जिससे उनका नेतृत्व कमजोर हो सकता है

अन्य राष्ट्रों की सहायता लेंगे किम जोंग उन?

सियोल स्थित क्यूंगनम यूनिवर्सिटी (Yeungnam University) के सूदूर पूर्वी शोध संस्थान की प्रोफेसर लिम एउल-चुल कहते हैं कि यिद किम अमेरिकी या पश्चिमी राष्ट्रों की सहायता स्वीकार करते हैं, तो उन्होंने जिस ‘आत्म निर्भरता’ की नीति का पालन दृढ़ता से किया है, उसे झटका लग सकता है और उन पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है

यह भी पढ़ें: 

प्रोफेसर कहते हैं कि यदि वे कुछ नहीं करते यानी अकेले चलते हैं, तो संक्रमण से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु के रूप में एक आपदा का सामना करना पड़ सकता है उन्होंने बोला कि पिछले सप्ताह Covid-19 संक्रमण बढ़ने के बाद से उत्तर कोरिया में 56 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि डेढ़ लाख से अधिक अन्य लोग बीमार हैं

कोरोना एक गंभीर संकट

बाहरी पर्यक्षकों का बोलना है कि रोग के ज्यादातर मुद्दे कोविड-19 वायरस के कारण हैं उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया कुछ भी कहे, लेकिन कोविड-19 वायरस संक्रमण के कई गुना और गंभीर होने की संभावना है उत्तर कोरिया में Covid-19 की पर्याप्त जांच का अभाव है और जानकारों के अनुसार उत्तर कोरिया Covid-19 के कारण होने वाली मौतों को छिपा रहा है, ताकि संभावित अस्थिरता से बचा जा सके क्योंकि जनता में अस्थिरता किम को सियासी रूप से हानि पहुंचा सकता है

मौत का आंकड़ा छुपा रहे हैं किम जोंग उन?

कुछ पर्यक्षकों ने बोला कि उत्तर कोरिया में बताया गया मृत्यु का आंकड़ा कम है, जहां कि 2.6 करोड़ जनसंख्या में से ज्यादातर लोगों को Covid-19 का टीका नहीं लगाया गया है उत्तर कोरिया सार्वजनिक रूप से मौतों की असली संख्या को छिपाने में सक्षम हो सकता है, लेकिन राष्ट्र में आवाजाही और पृथकवास नियमों को लेकर कड़े प्रतिबंध इसकी कृषि को हानि पहुंचा सकते हैं 2 वर्ष से अधिक समय से जारी महामारी और सीमा बंद रहने के कारण इसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही डांवाडोल है

सियोल यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कोरियन स्टडीज के प्रोफेसर यांग मू-जिन ने बोला कि उत्तर कोरिया चिकित्सा आपूर्ति और भोजन और दैनिक आवश्यकताओं की कमी को लेकर भी चिंतित है, जो सीमा बंद होने के दौरान बाजारों से नदारद हैं किम ने इसके पहले संयुक्त देश समर्थित ‘कोवाक्स’ वितरण कार्यक्रम द्वारा दी जाने वाली टीकों की लाखों खुराक को अस्वीकार कर दिया था

क्या निर्णय लेंगे किम जोंग उन?

एक अन्य प्रोफेसर ने बोला कि किम अंततः चीनी सहायता प्राप्त करना चाहेंगे, लेकिन वह दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका या कोवाक्स से सहायता नहीं लेंगे, क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित होगी बाहरी सहायता प्राप्त करना उत्तर कोरिया को एक मुश्किल स्थिति में डाल देगा किम ने पिछले दो सालों के दौरान बार-बार अपने राष्ट्र को महामारी के लिए ‘अभेद्य’ बताया था लेकिन गत शनिवार को उन्होंने बोला कि उनका राष्ट्र ‘उथल-पुथल’ का सामना कर रहा है