प्रेसिडेंशियल अकाउंट ‘पोटस’ को जो बाइडेन को ट्रांसफर करेगी TWITTER!

प्रेसिडेंशियल अकाउंट ‘पोटस’ को जो बाइडेन को ट्रांसफर करेगी TWITTER!

लॉस एंजिलिस। ट्विटर अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक ‘पोटस’ अकाउंट का नियंत्रण राष्ट्रपति चुनाव में विजयी हुए जो बाइडन को 20 जनवरी को उनके शपथ ग्रहण करते ही सौंप देगी। ट्विटर ने कहा है कि भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में हार नहीं मानी है लेकिन वह इस हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करेगी। पोटस (प्रेसीडेंट ऑफ यूएस या पीओटीयूएस) अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक ट्विटर खाता है और यह डोनाल्ड ट्रंप के उस खाते से अलग है, जिससे वह ट्वीट किया करते हैं। बाइडन (78) शपथ ग्रहण करने के बाद अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन जाएंगे।

ट्विटर ने कहा कि अकाउंट को सौंपने की प्रक्रिया में ट्रंप की टीम और नये राष्ट्रपति बनने जा रहे बाइडन की टीम के बीच सूचना साझा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। कंपनी ने कहा कि इस खाते पर मौजूदा सभी ट्वीट को संग्रह कर रखा जाएगा और शपथ ग्रहण के दिन बिना किसी ट्वीट के नये खाते के रूप में उसे बाइडन को सौंप दिया जाएगा। ट्विटर के प्रवक्ता निक पेसिलियो ने एक ई-मेल में कहा, ‘‘ट्विटर 20 जनवरी, 2021 को व्हाइट हाउस के संस्थागत ट्विटर खातों के हस्तांतरण की सक्रियता से तैयारी कर रही है।’’ कंपनी के अनुसार, इसी तरह व्हाइट हाउस, उप राष्ट्रपति आदि के ट्विटर खातों के साथ भी होगा।


बाइडेन ने भारत के इस दोस्त को बनाया विदेश मंत्री

बाइडेन ने भारत के इस दोस्त को बनाया विदेश मंत्री

वॉशिंगटन: अमेरिका में जो बाइडेन की ताजपोशी की तैयारी शुरू हो गई है। इस बीच जो बाइडेन ने अपने कैबिनेट में शामिल होने वाले चेहरों का ऐलान कर दिया है। बाइडेन की इस लिस्ट में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय के राजनयिक एंटनी ब्लिंकन का भी है। बाइडेन ने एंटनी ब्लिंकन को विदेश मंत्री नियुक्त किया है।

विदेश नीति सलाहकार रह चुके हैं ब्लिंकन
58 वर्षीय ब्लिंकन ने ओबामा प्रशासन के दौरान उप विदेश मंत्री और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर कार्य किया है। बता दें कि इस बार अमेरिकी चुनाव में ब्लिंकन, बाइडन के राष्ट्रपति अभियान के लिए विदेश नीति सलाहकार भी रहे। इसके अलावा एंटनी ब्लिंकन ने मध्य पूर्व, चीन, यूरोप, ईरान और भारत पर बाइडन के अपने विचारों को आकार देने में मदद की है।

भारत के लिए अहम
अमेरिका में ब्लिंकन को मंत्रिपद मिलना भारत के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि जब भारत-अमेरिका परमाणु समझौते की पुष्टि हुई थी, उस दौरान ब्लिंकन ही थे; जिन्होंने सीनेट भारत का पक्ष रखा था। क्योंकि तब सौदे के लिए दोनों दलों का समर्थन था। वहीं ओबामा इस सौदे को लेकर शुरुआती दौर में कुछ असमंजस में थे। ऐसे में ब्लिंकन ने भारत का पक्ष रखा था, इसलिए उन्हें भारत का पुराना दोस्त कहा जा सकता है।

इसके अलावा हाल ही में ब्लिंकन से एक इवेंट में पूछा गया था कि वे भारत और अमेरिका के संबंध को कैसे देखते हैं? इसपर ब्लिंकन ने कहा था कि मुझे लगता है कि उपराष्ट्रपति रहते हुए जो बाइडन के दृष्टिकोण से भारत के साथ संबंध को मजबूत करना और गहरा करना एक बहुत ही उच्च प्राथमिकता है। यह आम तौर पर इंडो-पैसिफिक के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों बड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं।


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