महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले 10 दिनों की राजनीतिक में उथल-पुथल

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले 10 दिनों की राजनीतिक में उथल-पुथल
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले 10 दिनों की सियासी उथल-पुथल और आश्चर्य से भरे रहे हैं. 21 जून को पार्टी के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के विधायकों के एक बड़े वर्ग ने विद्रोह प्रारम्भ किया था, जो कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) गवर्नमेंट के पतन का कारण बना. ठाकरे ने 29 जून को महाराष्ट्र के सीएम के रूप में इस्तीफा दे दिया, जब उच्चतम न्यायालय ने 30 जून को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने के महाराष्ट्र के गवर्नर के निर्देश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. आश्चर्य तब हुई, जब हर कोई देवेंद्र फडणवीस की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में वापसी की आशा कर रहा था, लेकिन उन्होंने स्वयं घोषणा किया कि शिंदे राज्य में नयी गवर्नमेंट के अगले मुखिया होंगे.

हालांकि फडणवीस ने घोषणा की थी कि वह नयी महाराष्ट्र गवर्नमेंट में कोई पद नहीं लेंगे, लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने उन्हें शिंदे के डिप्टी के रूप में नयी गवर्नमेंट में शामिल होने के लिए कहा. शिंदे और फडणवीस ने 30 जून की शाम को महाराष्ट्र के सीएम और डिप्टी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार की अगली पीढ़ी के भविष्य के बारे में लोगों के विचार जानने के लिए सीवोटर-इंडियाट्रैकर ने आईएएनएस की ओर से एक राष्ट्रव्यापी सर्वे किया.

सर्वे के दौरान, महाराष्ट्र के भविष्य के सियासी परि²श्य पर एक जन नेता के रूप में उभरने के लिए उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे की सियासी भविष्य को लेकर हिंदुस्तानियों की राय विभाजित दिखी.

सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, जहां 49 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि आदित्य ठाकरे में महाराष्ट्र की राजनीति में एक जन नेता के रूप में उभरने की क्षमता है, वहीं 51 फीसदी उत्तरदाताओं ने इस भावना से सहमत नहीं थे.

सर्वे ने इस मामले पर एनडीए के मतदाताओं और विपक्षी समर्थकों के विचारों में सियासी ध्रुवीकरण को उजागर किया. सर्वे के दौरान, जबकि 61 फीसदी विपक्षी मतदाताओं ने बोला कि आदित्य अपने दादा बालासाहेब ठाकरे की विरासत को आगे बढ़ाने और राज्य की राजनीति में लोकप्रिय नेता के रूप में उभरने में सक्षम होंगे, वहीं एनडीए के 68 फीसदी मतदाताओं ने उनकी राजनीति को लेकर पूरी तरह से अलग राय व्यक्त की.

सर्वे में महाराष्ट्र की राजनीति में आदित्य ठाकरे के भविष्य को लेकर विभिन्न सामाजिक समूहों की राय में अंतर सामने आया. सर्वे के दौरान, अधिकतर अनुसूचित जाति (एससी)- 66 फीसदी और अनुसूचित जनजाति (एसटी)- 69 फीसदी उत्तरदाताओं ने बोला कि आदित्य ठाकरे भविष्य में जन नेता के रूप में उभरेंगे, वहीं अधिकतर अन्य पिछड़ा वर्ग 60 फीसदी और उच्च जाति हिंदुओं (यूसीएच) के अनुपात- 59 फीसदी ने उनके बारे में भावना साझा नहीं की.

सर्वे के आंकड़ों के अनुसार इस मामले पर मुसलमानों की राय बंटी हुई थी. सर्वे के दौरान, जहां 55 फीसदी मुसलमानों ने आदित्य ठाकरे की महाराष्ट्र में जन नेता के रूप में उभरने की क्षमता में विश्वास व्यक्त किया, वहीं समुदाय के 45 फीसदी उत्तरदाताओं ने पूरी तरह से अलग विचार व्यक्त किए.