12 अगस्त से भाद्रपद महीना शुरू हो गया है। जो कि 10 सितंबर तक रहेगा

12 अगस्त से भाद्रपद महीना शुरू हो गया है। जो कि 10 सितंबर तक रहेगा

12 अगस्त से भाद्रपद महीना प्रारम्भ हो गया है. जो कि 10 सितंबर तक रहेगा. इस बारिश के मौसम में आने वाला ये महीना लाइफ स्टाइल में परिवर्तन का समय होता है. जिससे बीमारियां न हों और हम लंबी उम्र जी सकें. इसके लिए ऋषियों ने पुराणों में भाद्रपद महीने से जुड़ी कुछ खास बातें बताई हैं. जैसे इन दिनों में क्या खाना-पीना चाहिए. किस तरह सोना और डेली रुटीन से जुड़ी अनेक बातों का जिक्र भी किया है.

भाद्रपद चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में दूसरा है. चातुर्मास धार्मिक और व्यावहारिक नजरिए से जीवनशैली में धैर्य और अनुशासन अपनाने का समय है. इस तरह ये महीना उल्लास और उमंग के साथ जीवन को सुखी बनाने वाला समय भी है.

इस महीने क्या करें और क्या नहीं
1.
शारीरिक शुद्धि के लिए पंचगव्य पीना चाहिए. पंचगव्य गाय के दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर को मिलाकर बनाया जाता है. इससे लक्ष्मीजी खुश होती हैं और पाप भी समाप्त होते हैं.
2. उगते हुए सूर्य को प्रणाम करना और एक समय खाना खाना चाहिए. इससे पाप समाप्त होकर पुण्य बढ़ते हैं.
3. अयाचित यानी बिना मांगा भोजन करना चाहिए. इसके अतिरिक्त उपवास भी किए जाते हैं.
4. इस महीने में लकड़ी के पलंग पर बिना गद्दे के सोना चाहिए.
5. तामसिक भोजन यानी लहसुन, प्याज और मांसाहार से बचना चाहिए.
6. हर तरह के नशे से बचना चाहिए.

क्या नहीं करें
1.
भाद्रपद महीने में गुड़ और शहद नहीं खाना चाहिए.
2. ऑयल मालिश नहीं करना चाहिए.
3. तले-गला खाना नहीं खाना चाहिए.
4. पत्तेदार सब्जियां, मूली एवं बैंगन नहीं खाना चाहिए.
5. दही और चावल नहीं खाना चाहिए.

महत्व: कर्म और बुद्धि के संतुलन से जुड़े त्योहार
भाद्रपद में हिन्दू धर्म के बड़े व्रत, पर्व और उत्सव मनाए जाते हैं. इस महीने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेशोत्सव, ऋषि पंचमी, डोल ग्यारस और अनंत चतुर्दशी जैसे त्योहार आते हैं. हमारे ऋषि-मुनियों ने भाद्रपद में इन त्योहारों से कर्म और बुद्धि के संतुलन को बताया है. इस साधना से जीवन में कामयाबी पाने का संदेश दिया है.