भरपेट भोजन को तरस रहे सीरिया के करोड़ों लोग तो खतरे में है कांगो के लाखों बच्‍चों का जीवन

भरपेट भोजन को तरस रहे सीरिया के करोड़ों लोग तो खतरे में है कांगो के लाखों बच्‍चों का जीवन

संयुक्‍त राष्‍ट्र की दो बड़ी एजेंसियां विश्‍व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और यूनिसेफ ने सीरिया और कांगो के लोगों के लिए चिंता जाहिर करते हुए एक खुलासा किया है। डब्‍ल्‍यूएफपी का कहना है कि वर्षों से गृहयुद्ध की आग झेल रहे सीरिया में सवा करोड़ लोगों को भरपेट खाना तक नहीं मिल पा रहा है। एजेंसी के मुताबिक ये यहां की कुल आबादी का करीब 60 फीसद है।

संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि पिछले एक वर्ष में सीरिया में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में जबरदस्‍त उछाल देखने को मिला है और इनकी कीमतों में करीब 250 फीसद की तेजी दर्ज की गई है। इसमें ये भी कहा गया है कि हालातों और बढ़ती कीमतों को देखते हुए मौजूदा वर्ष में आधी से अधिक जनता को अपने लिए पर्याप्‍त भोजन जुटाना भी मुश्किल होगा। इसी तरह से यूनिसेफ ने कांगो में मौजूद करीब 30 विस्‍थापित हुए बच्‍चों की गंभीर हालत पर चिंता जाहिर की है।


संगठन की तरफ से कहा गया है कि इन बच्‍चों को यहां पर विभिन्‍न गुटों के बीच चल रहे संघर्ष और भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है। संगठन की तरफ से बताया गया है कि शुक्रवार को विद्रोही गुटों ने एक पूरे गांव को आग लगा दी और स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों समेत कई स्‍कूलों में लूटपाट की। इसकी वजह से कई परिवारों के सामने खुद को बचाने की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आपको बता दें कि सीरिया और कांगो दोनों ही जगहों पर वर्षों से यहां के आम नागरिक इस तरह की घटनाओं से दो-चार हो रहे हैं।


इनको लेकर कई बार संयुक्‍त राष्‍ट्र में चिंता जाहिर की गई है। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते एक वर्ष में ही खाद्य असुरक्षा के गर्त में करीब 45 लाख अतिरिक्त सीरियाई नागरिक शामिल हुए हैं। कोरोना की वैश्विक महामारी ने इन लोगों की राह को और अधिक मुश्किल कर दिया है। लोगों के काम धंघे बंद हो गए हैं और रोजगार और कमाई के सभी साधन बंद हैं। ऐसे में हर रोज सैकड़ों लोग भुखमरी की तरफ खिसकते जा रहे हैं। इन लोगों का जीवन हर रोज मुश्किल में कट रहा है। डब्‍ल्‍यूएफपी में सीरियाई प्रतिनिधि और देशीय निदेशक शॉन ओब्रायन के मुताबिक इससे पहले हालात इतने खराब नहीं थे। वर्षों से संघर्ष के बीच जी रहे इन लोगों की पूंजी अब खत्‍म हो गई है।


यहां पर ब्रेड, चावल, दाल, तेल और चीनी की कीमत एक लाख 20 हजार सीरियाई पाउंड है। ये कीमत यहां के लोगों के औसत वेतन से कहीं ज्‍यादा है। लोगों से भरपेट भोजन लगातार दूर हो रहा है। यहां के लोगों की चिंता इस वजह से भी बढ़ी है क्‍योंकि देश की मुद्रा सीरियाई पाउंड में जबरदस्‍त गिरावट देखने को मिली है। डब्‍ल्‍यूएफपी की रिपार्ट के मुताबिक सीरिया में भुखमरी के शिकार हुए कर्ज के बोझ तले दबने को मजबूर हैं। वे अपने गुजारा करने लायक भोजन के लिए अब अपने मवेशियों को बेच रहे हैं। गौरतलब है कि सीरिया में डब्‍ल्‍यूएफपी हर महीने 50 लाख खाद्य सहायता मुहैया करवाता है। संगठन का कहना है कि यदि यही हालात रहे तो यहां पर जुलाई 2021 तक मानवीय राहत जरूरतों को पूरा करने के लिये करीब 37 करोड़ डॉलर की जरूरत पड़ेगी।


वहीं दूसरी तरफ कांगो में यूनिसेफ का कहना है कि ये के विस्‍थापित हुए बच्‍चे डर के साए में रहकर केवल खुद को जिंदा बचाने के आगे नहीं सोच पा रहे हैं। इनके भविष्‍य पर गहरा संकट है। उनका कहना है कि यहां के इस विकराल होते संकट की तरफ दुनिया का कम ध्‍यान है। दुनिया इस क्षेत्र के प्रति लापरवाह हो रही है। जबकि इन बच्चों को एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने के लिए संसाधनों की आवश्यकता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के आंकड़े बताते हैं कि यहां पर करीब 52 लाख लोग विस्‍थापित हैं। इसमें ऐस आधे बीते एक वर्ष में विस्‍थापित हुए हैं। इनमें 30 लाख बच्‍चे भी शामिल हैं।


सोशल मीडिया पर बड़ी खबर! सरकार ला रही ये नया नियम

सोशल मीडिया पर बड़ी खबर! सरकार ला रही ये नया नियम

नई दिल्ली: बीते दिनों भारत सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) के बीच बड़ा बवाल देखने को मिला। जिसके बाद अब सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। दरअसल, सरकार जल्द ही सोशल मीडिया कंपनियों को काबू में रखने के लिए नए नियम ला सकती है। जिसके बाद किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई भी फेक न्यूज किसने और कब चलाया, सरकार यह जान सकेगी।

36 घंटे में हटाने होंगे विवादित पोस्ट
बताया जा रहा है कि इन प्लेटफॉर्म पर और इंटरनेट के जरिए वीडियो कंटेट का प्रचार कर रहे ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेट पर तीन लेवल पर निगरानी रखी जाएगी। इसके साथ ही नए नियम के मुताबिक, सोशल मीडिया (Social Media) कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से 36 घंटे के अंदर विवादित पोस्ट रिमूव करने होंगे। इसके अलावा जांच या साइबर सिक्योरिटी घटना में आग्रह के 72 घंटे के अंदर जानकारी देनी होगी।

नए नियमों के तहत अश्लील कंटेंट से जुड़ी पोस्ट को शिकायत के एक दिन के अंदर प्लेटफॉर्म से हटाना होगा। इतना ही नहीं, अब इन कंपनियों को चीफ कंप्लायंस ऑफिसर ग्रिवेंस रिड्रेसल ऑफिसर की भी नियुक्ति करनी होगी, जो कि भारतीय नागरिक होने चाहिए।

ओटीटी प्लेटफॉर्म के जरिए बीते एक साल में कई विवाद पैदा हुए। फिर चाहे वो कोई टीवी सीरीज रही हो, या फिर झूठे वीडियो, फोटो, संदेश, फैलाकर दंगे भड़काना या किसी भ्रामक तथ्य के जरिए किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाना हो। हालांकि बाद में ग से पैदा हुए। ओटीटी प्लेटफॉर्म माफी मांगकर उस कंटेंट को हटाकर या फिर नीतियां बदलकर बचते रहे हैं, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो जाता है।

सरकार की तीन स्तरीय निगरानी
ऐसे में अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपना मॉडरेटर रखना होगा। जो इनके जरिए फैलाई जा रही ही सामग्री के लिए जिम्मेदार होगा। अगर उनके मॉडरेशन में गलती पाई जाती है तो सजा दी ज सकेगी। दूसरे स्तर पर सरकार नियामक एजेंसी बनाएगी। इस एजेंसी में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हो सकते हैं।

इसके अलावा तीसरे स्तर पर सरकारी संस्थाएं होंगी जो इन प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखेंगे। साथ ही मामले सामने आने पर दोषी कंपनी को सजा दे सकेंगे। उनके पास खास पावर उस कंटेंट को ब्लॉक करने की होगी। वहीं, नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म तीन स्तरीय निगरानी प्रणाली के तहत रखे जाएंगे। शो को ‘यू’ और ‘ए’ रेटिंग देनी होगी।


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