शशि थरूर कांग्रेस को बता रहे थे मजबूत विपक्ष, बिशन सिंह बेदी की 'गुगली' ने बंद की बोलती!

शशि थरूर कांग्रेस को बता रहे थे मजबूत विपक्ष, बिशन सिंह बेदी की 'गुगली' ने बंद की बोलती!

नई दिल्ली: पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी अक्सर क्रिकेट पर अपने ट्वीट्स को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। हालांकि बीच-बीच में वह अन्य मुद्दों पर भी ट्वीट करते नजर आते हैं। ऐसा ही कुछ रविवार को हुआ जब उन्होंने पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम पर चिंता जाहिर की। इस कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस को मजबूत विपक्ष बताते हुए मौके पर चौका मारने की कोशिश की, लेकिन बिशन सिंह बेदी की 'गुगली' उनके बोलती बंद कर दी।

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर जताया दुख
दरअसल, रविवार को पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी ने पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों पर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- 'मैं अपने एक करीबी दोस्त से बात कर रहा था जो गैस स्टेशन का मालिक है, उसने कहा कि पेट्रोल डीजल की आसमान छूती कीमतें आपराधिक हैं, फिर भी कोई एक आदमी इसको लेकर शिकायत नहीं कर रहा है। ताज्जुब होता है कि देश कहां जा रहा है या फिर यह एकदम सामान्य है?'

शशि थरूर ने की मौके पर चौका मारने की कोशिश
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मौके पर चौका मारते हुए ट्वीट किया, 'बिशन सिंह बेदी! विपक्ष इसकी शिकायत कर रहा है। मैंने इस मुद्दे पर दर्जनों बार ट्वीट किए, संसद में भी जिक्र किया। हमारी टैक्स-हैपी सरकार की ओर से बढ़ाए गए इन आपराधिक कीमतों के खिलाफ कांग्रेस सोशल मीडिया अभियान चला रही है, लेकिन उनका मानना है कि चुनावी बहुमत उन्हें कुछ भी करने का हक देता है।'

बेदी के जवाब से थरूर की बोलती बंद
हालांकि बिशन सिंह बेदी यहीं नहीं रुके। उन्होंने भी गुगली फेंकते हुए शशि थरूर की बोलती बंद कर दी। बिशन सिंह बेदी ने शशि थरूर को जवाब देते हुए लिखा- 'क्या सच में हमारे पास इस लायक विपक्ष है? क्या कांग्रेस के घर में सबकुछ ठीक है! मुझे ऐसे दिशाहीन देश को देखकर दुख होता है जो अपने नागरिकों को शिकार बना रहा है। हम सभी इसके लिए जिम्मेदार हैं जो हमें यह विश्वास दिलाया जा रहा है कि हमें जो मिल रहा है हम उसी के लायक हैं।'


बिशन सिंह बेदी के इस जवाब ने शशि थरूर को चुप करा दिया। खबर लिखे जाने तक शशि थरूर की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं आया है। वहीं, ट्विटर पर बिशन सिंह बेदी के इस जवाब की जमकर तारीफ हो रही है। विपक्ष वाली बात पर कई ट्विटर यूजर्स ने उनका समर्थन किया है।


75 फीसदी आरक्षण, हरियाणा से पलायन कर सकते हैं उद्योग

75 फीसदी आरक्षण, हरियाणा से पलायन कर सकते हैं उद्योग

हरियाणा की खट्टर सरकार ने 75 फीसदी आरक्षण कानून लाकर सबको चौंका दिया है। यह एक ऐसा कदम है जिसने वोट की राजनीति में राष्ट्रीय हितों व राज्य के हितों को तिलांजलि देने की एक मिसाल पेश की है। खुद उद्योग जगत को बढ़ावा देने में जुटी भारतीय जनता पार्टी के लिए यह फैसला चौंकाने वाला है और खासकर उद्योग जगत के लिए बड़ा झटका है ही। आरक्षण कानून आने के बाद इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि बड़ी संख्या में उद्योग हरियाणा से शिफ्ट करने पर विचार कर रहे हैं। जो कि हरियाणा के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। यदि इस कानून के लागू होने के बाद हरियाणा में उद्योग ही नहीं बचेंगे तो युवाओं को आरक्षण कहां से मिलेगा।

खट्टर सरकार लाई 75 फीसदी आरक्षण कानून
सरकारी सेक्टर में रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने के बाद सिर्फ प्राइवेट सेक्टर ही उम्मीद की किरण नजर आता है जहां रोजगार के अवसर जुटाए जा सकते हैं और यदि वही सेक्टर भयभीत होकर भागने लगने तो बेरोजगारी बढ़नी तो तय है। इसके अलावा इस तरह के काम की नकल अगर दूसरे राज्य भी करने लगें तो एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

75 फीसदी आरक्षण कानून उद्योग जगत के लिए बड़ा झटका
यही वजह है कि हरियाणा को उद्योग जगत 75 फीसदी आरक्षण कानून को स्वीकार नहीं कर पा रहा है स्वयं केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण भी इस फैसले से हतप्रभ हैं। भारतीय वाणिज्य उद्योग महासंघ (फिक्की) भी इस पर चिंता का इजहार कर चुका है। देश के इस सबसे बड़े उद्योग संघ के अध्यक्ष उदय शंकर ने कहा है कि हरियाणा सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के उद्योगों की नौकरियों में स्थानीय युवाओं को 75 फीसदी तक आरक्षण दिए जाने का कानून राज्य के औद्योगिक विकास के लिये नुकसानदेह साबित होगा।

दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने पर विचार कर रहे उद्यमी
हरियाणा के उद्यमी इसे खतरनाक मानते हुए कह चुके हैं कि वह अपने उद्योग दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने के बारे में विचार कर सकते हैं। गौरतलब है कि हरियाणा का 25 फीसदी गारमेंट्स उद्योग पहले ही बंग्लादेश शिफ्ट हो गया है। मारुति की एक कंपनी दो साल पहले गुजरात के मेहसाणा में शिफ्ट हो चुकी है। अब इस तरह का कानून राज्य से उद्योगों के पलायन की रफ्तार बढ़ा देगा। यह सही है कि सरकारें वोट बैंक के लिए युवाओं को साथ रखना चाहती है। इसमें गलत भी नहीं है लेकिन उद्योगों की कीमत पर यह फैसला नहीं होना चाहिए।

वह भी तब जबकि उत्तर प्रदेश सहित तमाम राज्यों ने दूसरे राज्यों की औद्योगिक इकाइयों को अपने राज्यों में शिफ्ट कराने के लिए औद्योगिक नीति को सरल बनाने के संकेत दिए हैं।

सरकार से कानून में अनिवार्य शब्द हटाने की मांग
उद्योग संगठनों की मांग है कि सरकार इस कानून से अनिवार्य शब्द को हटाया जाना चाहिए। इसकी वजह साफ है कि उद्योगों को काम करने के लिए कुशल और योग्य लोगों की जरूरत होती है। हरियाणा में 75 फीसदी युवा निर्धारित अर्हता रखने वाले हो सकते हैं लेकिन उनमें कुशलता इतने बड़े स्तर पर होना संभव नहीं है।

ये कानून हरियाणा के औद्योगिक विकास पर कुठाराघात साबित हो सकता है। लोग वहां औद्योगिक इकाइयां लगाने से कतराने लगेंगे जो कि राज्य के युवाओं के लिए आत्मघाती साबित होगा।

कंपनियां दूसरे राज्यों में शिफ्ट हुईं तो राजस्व घटेगा
उद्योग जगत की मांग है कि इस कानून से अनिवार्यता को खत्म किया जाए। कंपनियां दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने के लिए मजबूर होंगी, जिससे राजस्व घटेगा। चूंकि सरकारी क्षेत्र की नौकरियों में किसी भी राज्य के लोगों को 75 फीसदी आरक्षण का कानून नहीं है। इसीलिए हरियाणा सरकार का यह कानून असंवैधानिक है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद -19 किसी भी राज्य में नौकरी के लिए देश के किसी भी राज्य के व्यक्ति को आवेदन करने के साथ-साथ नौकरी पाने का पूरा अधिकार देता है।


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