बिड़ला ने कहा कि Vodafone-Idea को नहीं मिला सरकारी फंड तो बंद हो जाएगी कंपनी

बिड़ला ने कहा कि Vodafone-Idea को नहीं मिला सरकारी फंड तो बंद हो जाएगी कंपनी

नई दिल्ली: दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला (KumarMangalam Birla) ने शुक्रवार को टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया (Vodafone-Idea) को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। बिड़ला ने एनबीसी टीवी 18 की मैनेजिंग एडिटर शीरीन भान से वार्ता में बोला कि हमने ऐसा कल्चर कारोबार में पैदा किया है कि यदि अपेक्षा के अनुसार सरकारी सहायता नहीं मिली तो वह वोडाफोन आइडिया को बंद कर देंगे।

इस प्रोग्राम में एक सवाल के जवाब में बिड़ला ने इशारा दिया है अब बिड़ला ग्रुप वोडाफोन-आइडिया में कोई निवेश नहीं करेगा। उन्होंने बोला कि अच्छे रुपये को बुरे रुपये में निवेश का कोई मतलब नहीं है। सरकारी राहत नहीं मिलने पर कंपनी के कदम के सवाल पर बिड़ला ने बोला कि हम अपनी दुकान बंद कर देंगे। उन्होंने बोला कि राहत नहीं मिलने की स्थिति में कंपनी दिवालिया प्रक्रिया का रास्ता अपनाएगी।


सुप्रीम न्यायालय की ओर से एजीआर पर दिए गए निर्णय का वोडाफोन-आइडिया पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। इसके कारण कंपनी ने दूसरी तिमाही में 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा बताया है। रिलायंस जियो की लॉन्चिंग के बाद टेलीकॉम सेक्टर में बने रहने के लिए कुमार मंगलम बिड़ला ने अपनी आइडिया सेल्युलर का वोडाफोन इंडिया के साथ विलय कर दिया था व नयी कंपनी वोडाफोन आइडिया अस्तित्व में आई थी।

अभी कंपनी में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है बिड़ला ग्रुप की
पिछले वर्ष हुए विलय समझौते के अनुसार, वोडाफोन-आइडिया कंपनी में 45.1 प्रतिशत हिस्सेदारी वोडाफोन के पास है जबकि 26 प्रतिशत हिस्सेदारी आदित्य बिड़ला ग्रुप के पास है। अन्य शेयरहोल्डर्स के पास 28.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वोडाफोन-आइडिया का संचालन दोनों कंपनियां संयुक्त रूप से करती हैं।

वोडाफोन ने सरकार से मांगा था राहत पैकेज
वोडाफोन ने सरकार से स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए दो वर्ष का वक्त, लाइसेंस शुल्क में, उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर ब्याज व जुर्माने में छूट सहित एक राहत पैकेज की मांग की थी। वोडाफोन संसार की दूसरी बड़ी मोबाइल ऑपरेटर है व स्पेन और इटली में सुधार के संकेतों से उसके राजस्व में लगातार सुधार हो रहा है। कैलेंडर साल 2019 की पहली छमाही में उसके सेवा राजस्व में 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। वहीं कंपनी ने कठिन दौर को देखते हुए पहली बार मई में अपने डिविडेंट में कटौती की थी।