BJP पर राहुल गांधी का बड़ा हमला - नागपुर का 'निकरवाला' कभी नहीं तय कर सकता किसी राज्य का भविष्य

BJP पर राहुल गांधी का बड़ा हमला - नागपुर का 'निकरवाला' कभी नहीं तय कर सकता किसी राज्य का भविष्य

धारापुरम (तमिलनाडु): कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने अपने तमिलनाडु दौरे के दौरान राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है। धारापुरम में रविवार को आयोजित रैली में राहुल ने कहा- 'हम नरेंद्र मोदी को भारत की नींव को नष्ट करने की अनुमति नहीं देंगे। वह नहीं समझते हैं कि केवल तमिल लोग ही तमिलनाडु के भविष्य का फैसला कर सकते हैं। नागपुर का 'निकरवाला' कभी भी राज्य का भविष्य तय नहीं कर सकता है।

आपको बता दें कि अगले तीन महीनों के भीतर तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले राहुल गांधी राज्‍य के तीन दिवसीय दौरे पर यहां पहुंचे हैं। अपने दौरे के दूसरे दिन रविवार इस दौरान वह कई जगहों पर रैलियां और रोडशो कर रहे हैं। इससे पहले तिरुपुर में भी पूर्व कांग्रेस अध्‍यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्‍होंने कहा कि चीन के सैनिकों ने भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है और ‘56 ईंच सीना’ रखने वाले व्यक्ति पड़ोसी देश का नाम तक नहीं ले सकते हैं।


'चीन का नाम तक नहीं ले रहा 56 ईंच सीने वाला शख्‍स'
इससे पहले इरोड में सभाओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाए कि मोदी महज पांच या छह उद्यमियों के लिए देश का शासन चला रहे हैं। पश्चिमी जिलों में प्रचार अभियान पर निकले गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों, मजदूरों या सूक्ष्म, लघु या मध्यम श्रेणी के उद्यमियों के लिए नहीं है जो देश का भाग्य हैं। उन्होंने कहा, ‘पहली बार भारत के लोग देख रहे हैं कि चीन की सेना भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा कर रही है। आज हम जब यहां बात कर रहे हैं उस समय हजारों चीनी सैनिक हमारे क्षेत्रों पर कब्जा कर रहे हैं और 56 ईंच सीने वाला व्यक्ति चीन का नाम तक नहीं ले सकता है। यह हमारे देश की हकीकत है।’

'बीजेपी को नहीं करने देंगे तमिल संस्‍कृति का अपमान'
लोगों से खुद को जोड़ने और बीजेपी पर प्रहार करने के लिए ‘तमिल भाषा और संस्कृति’ का जिक्र करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह दिल्ली में तमिल लोगों का रखवाला बनना चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि वह भगवा दल को तमिल संस्कृति का अपमान नहीं करने देंगे। एक रोडशो के दौरान कुछ स्थानों पर लोगों को संबोधित करते हुए गांधी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह लोगों पर एक संस्कृति और एक भाषा थोप रही है और तमिलनाडु को ‘दूसरे दर्जे का स्थान’ बना रही है।

'तमिल भावना और संस्‍कृति का करता हूं सम्‍मान'

अंग्रेजी में दिए गए भाषण में राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं तमिल भावना और संस्कृति को समझता हूं, स्वीकार करता हूं और उसका सम्मान करता हूं। मैं प्रधानमंत्री और बीजेपी को तमिल लोगों का अपमान नहीं करने दूंगा।’ जनता के लिए उनके भाषण का तमिल में अनुवाद किया गया। उन्होंने कहा कि भारत विविध संस्कृतियों, धर्मों और भाषाओं का देश है। गांधी ने कहा, ‘यह देश का संबल है। यह हमारा कर्तव्य है कि इस देश में हर भाषा, संस्कृति और धर्म की रक्षा करें।’

'मन की बात' पर किया तंज

पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम पर राहुल गांधी ने निशाना साधा। उन्‍होंने कहा कि तमिलनाडु का उनका दौरा लोगों को अपने ‘मन की बात’ कहने के लिए नहीं है या उन्हें सलाह देने या उन्हें क्या करना चाहिए, इस बारे में बताने के लिए नहीं है बल्कि उनकी बात सुनने के लिए है, उनकी समस्याएं समझने और उनका समाधान करने के लिए है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के इतिहास और भाषा से शेष भारत काफी कुछ सीख सकता है।


75 फीसदी आरक्षण, हरियाणा से पलायन कर सकते हैं उद्योग

75 फीसदी आरक्षण, हरियाणा से पलायन कर सकते हैं उद्योग

हरियाणा की खट्टर सरकार ने 75 फीसदी आरक्षण कानून लाकर सबको चौंका दिया है। यह एक ऐसा कदम है जिसने वोट की राजनीति में राष्ट्रीय हितों व राज्य के हितों को तिलांजलि देने की एक मिसाल पेश की है। खुद उद्योग जगत को बढ़ावा देने में जुटी भारतीय जनता पार्टी के लिए यह फैसला चौंकाने वाला है और खासकर उद्योग जगत के लिए बड़ा झटका है ही। आरक्षण कानून आने के बाद इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि बड़ी संख्या में उद्योग हरियाणा से शिफ्ट करने पर विचार कर रहे हैं। जो कि हरियाणा के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। यदि इस कानून के लागू होने के बाद हरियाणा में उद्योग ही नहीं बचेंगे तो युवाओं को आरक्षण कहां से मिलेगा।

खट्टर सरकार लाई 75 फीसदी आरक्षण कानून
सरकारी सेक्टर में रोजगार के पर्याप्त अवसर न होने के बाद सिर्फ प्राइवेट सेक्टर ही उम्मीद की किरण नजर आता है जहां रोजगार के अवसर जुटाए जा सकते हैं और यदि वही सेक्टर भयभीत होकर भागने लगने तो बेरोजगारी बढ़नी तो तय है। इसके अलावा इस तरह के काम की नकल अगर दूसरे राज्य भी करने लगें तो एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

75 फीसदी आरक्षण कानून उद्योग जगत के लिए बड़ा झटका
यही वजह है कि हरियाणा को उद्योग जगत 75 फीसदी आरक्षण कानून को स्वीकार नहीं कर पा रहा है स्वयं केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण भी इस फैसले से हतप्रभ हैं। भारतीय वाणिज्य उद्योग महासंघ (फिक्की) भी इस पर चिंता का इजहार कर चुका है। देश के इस सबसे बड़े उद्योग संघ के अध्यक्ष उदय शंकर ने कहा है कि हरियाणा सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के उद्योगों की नौकरियों में स्थानीय युवाओं को 75 फीसदी तक आरक्षण दिए जाने का कानून राज्य के औद्योगिक विकास के लिये नुकसानदेह साबित होगा।

दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने पर विचार कर रहे उद्यमी
हरियाणा के उद्यमी इसे खतरनाक मानते हुए कह चुके हैं कि वह अपने उद्योग दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने के बारे में विचार कर सकते हैं। गौरतलब है कि हरियाणा का 25 फीसदी गारमेंट्स उद्योग पहले ही बंग्लादेश शिफ्ट हो गया है। मारुति की एक कंपनी दो साल पहले गुजरात के मेहसाणा में शिफ्ट हो चुकी है। अब इस तरह का कानून राज्य से उद्योगों के पलायन की रफ्तार बढ़ा देगा। यह सही है कि सरकारें वोट बैंक के लिए युवाओं को साथ रखना चाहती है। इसमें गलत भी नहीं है लेकिन उद्योगों की कीमत पर यह फैसला नहीं होना चाहिए।

वह भी तब जबकि उत्तर प्रदेश सहित तमाम राज्यों ने दूसरे राज्यों की औद्योगिक इकाइयों को अपने राज्यों में शिफ्ट कराने के लिए औद्योगिक नीति को सरल बनाने के संकेत दिए हैं।

सरकार से कानून में अनिवार्य शब्द हटाने की मांग
उद्योग संगठनों की मांग है कि सरकार इस कानून से अनिवार्य शब्द को हटाया जाना चाहिए। इसकी वजह साफ है कि उद्योगों को काम करने के लिए कुशल और योग्य लोगों की जरूरत होती है। हरियाणा में 75 फीसदी युवा निर्धारित अर्हता रखने वाले हो सकते हैं लेकिन उनमें कुशलता इतने बड़े स्तर पर होना संभव नहीं है।

ये कानून हरियाणा के औद्योगिक विकास पर कुठाराघात साबित हो सकता है। लोग वहां औद्योगिक इकाइयां लगाने से कतराने लगेंगे जो कि राज्य के युवाओं के लिए आत्मघाती साबित होगा।

कंपनियां दूसरे राज्यों में शिफ्ट हुईं तो राजस्व घटेगा
उद्योग जगत की मांग है कि इस कानून से अनिवार्यता को खत्म किया जाए। कंपनियां दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने के लिए मजबूर होंगी, जिससे राजस्व घटेगा। चूंकि सरकारी क्षेत्र की नौकरियों में किसी भी राज्य के लोगों को 75 फीसदी आरक्षण का कानून नहीं है। इसीलिए हरियाणा सरकार का यह कानून असंवैधानिक है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद -19 किसी भी राज्य में नौकरी के लिए देश के किसी भी राज्य के व्यक्ति को आवेदन करने के साथ-साथ नौकरी पाने का पूरा अधिकार देता है।


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