किसान संगठनों को फिर वार्ता का बुलावा, सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, कहा- बताएं तारीख और समय

किसान संगठनों को फिर वार्ता का बुलावा, सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, कहा- बताएं तारीख और समय

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने सरकार के वार्ता प्रस्तावों से भले ही मुंह फेर लिया हो, लेकिन सरकार बातचीत के रास्ते बंद नहीं करना चाहती है। इसीलिए सरकार की ओर से गुरुवार को एक बार फिर किसान संगठनों को बुलावा भेजा गया है। सरकार के पत्र में उन सभी बिंदुओं का विस्तार से जिक्र किया गया है, जिन्हें चिह्नित कर किसान संगठनों के पास पहले भी भेजा गया था।

इससे बचने की सलाह

कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने पत्र में उन बिंदुओं को वार्ता में शामिल करने से बचने को कहा है, जिनका ताल्लुक कृषि सुधार से संबंधित तीनों कानूनों से नहीं है। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रमुख है। वार्ता की तिथि और समय बताने का जिम्मा किसानों पर छोड़ दिया गया है। वार्ता विज्ञान भवन में मंत्री स्तरीय समिति के साथ होगी।

सरकार ने लिखा पत्र

किसान संगठनों द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों का जवाब देते हुए सरकार ने यह पत्र लिखा है। किसान संगठनों को इस बात पर एतराज है कि सरकार के 20 दिसंबर को भेजे पत्र में आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है। कृषि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि तीन दिसंबर की वार्ता के दौरान जितने मुद्दे चिह्नित किए गए थे, उन सभी मुद्दों के संबंध में लिखित प्रस्ताव दिया गया था। फिर भी सरकार उन मुद्दों पर भी चर्चा करने को तैयार है, जो इन कानूनों से संबंधित रह गए होंगे।

एमएसपी पर लिखित आश्वासन देने को तैयार

1- इन तीनों कृषि कानूनों के आने से MSP और उपज खरीद की व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

2- एमएसपी और सरकारी खरीद की व्यवस्था जारी रखने को लेकर सरकार लिखित आश्वासन देने को तैयार है।

3- इस संबंध में अब कोई नई मांग रखना अथवा वार्ता में शामिल करना उचित नहीं लगता है।

4- सरकार ने आंदोलन कर रहे सभी 40 किसान संगठनों के नेताओं को वार्ता का बुलावा पत्र भेजा है।

चर्चा वाले मुद्दों का विवरण दें किसान संगठन

विद्युत संशोधन अधिनियम और पराली जलाने संबंधी प्रावधानों को लेकर किसानों की चिंताओं के निराकरण के बारे में सरकार वार्ता करने को राजी है। पत्र में किसान संगठनों से अनुरोध किया गया है कि सरकार साफ नीयत और खुले मन से आंदोलन को समाप्त कराने के लिए वार्ता करती रही है और आगे भी इसके लिए तैयार है। जिन अन्य मुद्दों पर किसान संगठन चर्चा करना चाहते हैं, उनका विवरण दे दें, ताकि उन पर वार्ता के लिए तथ्यपूर्ण तैयारी कर ली जाए।

वार्ता से समाधान पर सरकार का जोर

कृषि कानूनों को रद करने और एमएसपी की गारंटी की मांग पर अड़े किसान संगठनों और सरकार के बीच पांच दौर की वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। छठे दौर की वार्ता के पहले ही किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर वार्ता तोड़ दी थी। फिर भी सरकार की ओर से चिह्नित मुद्दों की सूची के साथ वार्ता प्रस्ताव भेजा गया था। किसान नेताओं ने उसे खारिज करते हुए सरकार से कुछ ठोस प्रस्ताव लेकर आने को कहा। इसके जवाब में सरकार ने एक बार फिर उन्हें वार्ता से समस्या का समाधान तलाशने की सलाह देते हुए बुलावा भेजा है।


कोविड-19 की दूसरी लहर का बच्चों पर कहर, अब तक 2699 पॉजिटिव

कोविड-19 की दूसरी लहर का बच्चों पर कहर, अब तक 2699 पॉजिटिव

मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दूसरी लहर में कोविड-19 वायरस का कहर (Second Wave of Covid-19 ) बच्चों पर जारी है। अब तक 14 वर्ष तक के बच्चे सबसे अधिक संक्रमित हो रहे हैं। जबकि तीसरी लहर में बच्चों को सबसे अधिक खतरा बताया जा रहा है। ऐसे में भोपाल (Bhopal) का अब शासन-प्रशासन तैयारियों में युद्ध स्तर पर जुट गया है।

राजधानी में दूसरी लहर में अब तक 14 वर्ष तक के 2699 बच्चे पॉजिटिव हुए हैं और इनका शहर में 26 मुख्य हॉस्पिटल ों में उपचार हो रहा है। बच्चों के लिए उपचार के लिए शहर के 170 जानकार डॉक्टर, 27 डेडिकेटेड चाइल्ड हॉस्पिटल, बच्चों के उपचार वाले 121 हॉस्पिटल , एसएनसीयू पीआईसीयू बेड की संख्या 500, जनरल वार्ड में बच्चों के बेड की संख्या 800 और बच्चों के लिए वेंटिलेटर 125 हैं।

अभी भी 156 बच्चे हॉस्पिटल में भर्ती
तीसरी लहर के लिहाज से बच्चों के उपचार के लिए शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश भर में उपचार की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। अब सरकार इस व्यवस्था को बनाने का कार्य कर रही है, क्योंकि दूसरी लहर में तैयारी पहले से नहीं होने के कारण दशा अभी तक काबू में नहीं आ सके हैं। अप्रैल से अभी तक होम आइसोलेशन में 2122 बच्चे, स्वस्थ हो चुके 1462, हॉस्पिटल में भर्ती हुए 577, हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए 421 और हॉस्पिटल में अभी भी 156 बच्चे भर्ती हैं। तीसरी लहर में बच्चों में सबसे अधिक संक्रमण होने के चलते अभी से शासन प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटा है।

ये हो रही तीसरी लहर की तैयारी

भोपाल में तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी अभी से की जा रही है। शहर के पांच मेडिकल कॉलेज में 1885 ऑक्सीजन बेड बढ़ेंगे। हमीदिया हॉस्पिटल , चिरायु आरकेडीएफ, एलएन मेडिकल और पीपुल्स कॉलेज में अभी 2855 बेड हैं। बच्चों के लिए भिन्न-भिन्न आईसीयू बेड रिजर्व रखे जाएंगे। मेडिकल कॉलेज स्वयं के ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के साथ स्टोरेज प्लांट की क्षमता बढ़ाएंगे। यही नहीं, बच्चों के लिए 50 बेड का आईसीयू वार्ड बन रहा है, तो वहीं ब्लैक फंगस के मरीजों की बढ़ रही के मद्देनजर नजर ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल बनाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में इस रोग के मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग वार्ड बनाए जा रहे हैं। कोविड-19 से मृत्यु की गति हुई धीमी

दूसरी लहर में शहर में दशा कंट्रोल में आने लगे हैं। हालांकि अभी भी ग्रामीण इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। एक दिन में अब तक सबसे कम मृत्यु का आंकड़ा सामने आया है। कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुसार मंगलवार को 59 शवों का दाह संस्कार हुआ। भदभदा आराम घाट में 36 और सुभाष आराम घाट में 21 शवों का दाह संस्कार किया गया। जबकि झदा कब्रिस्तान में दो शवों को दफनाया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोविड-19 से 5 मौतें हुई हैं। जबकि सोमवार को 93 मृत्यु हुई थीं।


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