राहुल भट्ट की मर्डर को लेकर कश्मीरी पंडितों में भारी आक्रोश

राहुल भट्ट की मर्डर को लेकर कश्मीरी पंडितों में भारी आक्रोश

एक बड़े घटनाक्रम में उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने सामूहिक तौर पर अपनी नौकरियों से त्यागपत्र दे दिया है जिन्हें आल पीएम पैकेज के अनुसार कश्मीर में सरकारी नौकरियां दी गई थीं. सामूहिक त्यागपत्र की प्रतिलिपि उपराज्यपाल, पीएमओ तथा गृह मंत्रालय को भी भेजी गई हैं.

दरअसल राहुल भट्ट की मर्डर को लेकर कश्मीरी पंडितों में भारी आक्रोश है. इस कारण 350 सरकारी कर्मचारियों ने शुक्रवार को मर्डर के विरोध में इस्तीफा दे दिया. सभी ने अपना इस्तीफा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को भेज दिया है. ये सभी कश्मीरी पंडित पीएम पैकेज के कर्मचारी हैं. इनका बोलना है कि आतंकियों द्वारा सरकारी कर्मचारी राहुल भट्ट की मर्डर के बाद वे घाटी में स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. वहीं, उन्होंने कश्मीरी पंडित लाल चौक पर भी आंदोलन करने का फैसला लिया है. आल पीएम पैकेज एम्पलायज फोरम का बोलना था कि इस पैकेज के अनुसार नियुक्त सभी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने त्यागपत्र दिया है. इस मुद्दे पर राहुल भट्ट की पत्नी मीनाक्षी ने पत्रकारों से बात करते हुए बोला कि चडूरा में राहुल असुरक्षित महसूस कर रहे थे. वह दो वर्ष से क्षेत्रीय प्रशासन से हेडक्वाटर भेजने की अपील कर रहे थे. मीनाक्षी ने बताया कि जब कश्मीर में दो टीचर्स की मर्डर हुई थी, तब भी राहुल ने सुरक्षा की बात कहकर ट्रांसफर मांगा था, लेकिन उनका ट्रांसफर नहीं किया गया.


घूस लेकर चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

घूस लेकर चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

सीबीआई ने पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम के बेटे और कांग्रेस पार्टी सांसद कार्ति चिदंबरम के विरूद्ध एक और मामला दर्ज कर उनके करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की ये छापेमारी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा में की गई है सीबीआई ने कार्ति चिंदबरम और दूसरे आरोपियों के विरूद्ध जो मामला दर्ज किया है उसमें आरोप है कि कार्ति ने 50 लाख रुपये घूस लेकर गृह मंत्रालय से चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाया हैय

चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

सीबीआई में दर्ज मुद्दे के अनुसार पंजाब के मानसा में तलवंडी साबो पावर प्लांट लग रहा था इस थर्मल पावर प्लांट की क्षमता 1980 मेगा वॉट थी जिसे लगाने का जिम्मा चीन की Shandong Electric Power Construction Corp (SEPCO) को दिया गया था

यही वजह थी कि इस प्लांट को लगाने के लिये चीन के इंजीनियरों को प्रोजेक्ट वीजा दिया गया था लेकिन काम में देरी के चलते कंपनी को अधिक चीनी इंजीनियरों की आवश्यकता थी जिसके लिये वे वीजा स्वीकृति चाहिये थे क्योंकि इससे पहले जो प्रोजेक्ट वीजा दिये गये थे वो तय समय से अधिक हो चुके थे और फिर से वीजा के लिये गृह मंत्रालय से स्वीकृति महत्वपूर्ण थी

एक कपंनी के जरिए 50 लाख की घूस

इसके लिये पावर प्लांट ने कार्ति चिंदबरम को संपर्क किया और फिर 50 लाख रुपयों के बदले कार्ति चिदंबरम ने गृह मंत्रालय से 263 Re-use प्रोजेक्ट वीजा की स्वीकृति दिलवाई ध्यान देने वाली बात ये है कि वर्ष 2011 में जब ये स्वीकृति दिलवाई गई उस दौरान कार्ति के पिता पी चिदंबरम राष्ट्र के गृहमंत्री थे  

एजेंसी के अनुसार चीनी इंजीनियरों को वीजा दिलाने के बदले जो 50 लाख की घूस दी गई थी वो मुंबई की एक कंपनी M/s Bell Tools Ltd के जरिये दी गई थी कार्ति की कंपनी ने कंस्लटेंसी के नाम पर फर्जी बिल इस कंपनी के नाम बनाया जिसके बदले ये रिशवत दी गई