जाने किन चीजों पर लगा बैन और पकड़े जाने पर कितना जुर्माना

जाने किन चीजों पर लगा बैन और पकड़े जाने पर कितना जुर्माना
केंद्र गवर्नमेंट ने 1 जुलाई, 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगा दिया है. सिंगल यूज प्लास्टिक का मतलब प्लास्टिक से बने वह उत्पाद जिनको मात्र एक बार प्रयोग में लाया जा सकता है.

नई दिल्ली (एएनआई). प्लास्टिक प्रदूषण के खतरे को कम करने के लिए केंद्र गवर्नमेंट ने एक महत्वपर्ण कदम उठाया है. केंद्र गवर्नमेंट ने राज्यों को गाइडलाइन जारी कर 1 जुलाई, 2022 से सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर बैन लगाने के लिए बोला है. सिंगल-यूज प्लास्टिक आमतौर पर ऐसी वस्तुएं होती हैं जिन्हें सिर्फ एक बार उपयोग करने के बाद फेंक दिया जाता है और रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के लिए नहीं भेजा जाता है. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी वस्तुओं को खत्म करने के लिए दिए गए साफ आह्वान के अनुरूप, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 12 अगस्त, 2021 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021 को अधिसूचित किया था.

इन उत्पादों पर लगा है बैन
बैन हुए प्लास्टिक के उत्पादों में प्लास्टिक की स्टिक्स के साथ ईयरबड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक की स्टिक्स , प्लास्टिक के झंडे, कैंडी की स्टिक्स, आइसक्रीम की स्टिक्स, सजावट के लिए पॉलीस्टाइनिन (थर्मोकोल), प्लेट, कप, गिलास, कटलरी जैसे कांटे, चम्मच, चाकू, पुआल, ट्रे, रैपिंग या पैकिंग मिठाई बक्से, निमंत्रण कार्ड, और सिगरेट के पैकेट, प्लास्टिक या पीवीसी बैनर जिनका स्टिरर 100 माइक्रोन से कम हो. इस सभी उत्पादों से काफी प्रदूषण होता है.

प्लास्टिक की स्थान इन चीजों किया जाए उपयोग
1. कागज, जूट, कांच, लकड़ी और मिट्टी, प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का एक बेहतर और कम लागत वाला विकल्प हो सकता है. राष्ट्र में कई छोटे उद्यम और उद्यमी हैं जो ऐसे विकल्पों की बढ़ती मांग को पूरा कर सकते हैं.
2. विभिन्न धातुओं जैसे लोहा, क्रोमियम, निकल आदि से बने स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल किया जा सकता है.
3. बांस एक प्रमुख विकल्प हो सकता है क्योंकि यह राष्ट्र में बहुतायत में पैदा होता है. यह एक अत्यधिक बायोडिग्रेडेबल आइटम है.
4. लकड़ी भी बायोडिग्रेडेबल है, और इसमें सबसे अच्छे वैकल्पिक निवारण में से एक होने की क्षमता है.

पकड़े जाने पर लगेगा जुर्माना
यदि कोई आदमी मानदंडों का उल्लंघन करता है या सिंगल यूज प्लास्टिक का निर्माण, आयात, स्टॉकिंग, वितरण, बिक्री और इस्तेमाल करता हुआ पाया जाता हे तो उसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अनुसार निर्धारित दंड दिया जाएगा. अधिनियम के मुताबिक यदि कोई भी आदमी प्रावधानों का पालन करने में विफल रहता है, उसे एक अवधि के लिए जेल की सजा हो सकती है जिसे पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या 1 लाख तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है. सजा में जेल और जुर्माना दोनों भी हो सकते हैं. यदि मानदंडो का उल्लंघन जारी रहता है, तो उस आदमी को प्रत्येक दिन पांच हजार रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.

ऐसे की जाएगी नज़र
ऐसी प्लास्टिक वस्तुओं को खत्म करने की प्रक्रिया की उचित नज़र के लिए, प्रतिबंध के प्रवर्तन की नज़र के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में एक राष्ट्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है. इसके अतिरिक्त राज्य बोर्डों को सोशल मीडिया अभियान सहित व्यापक जागरूकता गतिविधियों को प्रारम्भ करने के लिए बोला गया है. उद्योगों, कॉलेजों, विद्यालयों और अन्य संस्थानों के साथ संवादात्मक बैठकें की जाएगीं. राज्य बोर्डों को प्रतिबंध के कारगर कार्यान्वयन के लिए औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण को तेज करने का निर्देश दिया गया है. कई उद्योगों ने पहले तर्क दिया था कि हिंदुस्तान में ऐसी प्रतिबंधित वस्तुओं के वैकल्पिक समाधानों की उत्पादन क्षमता कम है, और इस तरह की वस्तुओं की किसी भी कमी से विनिर्माण लागत बढ़ सकती है और उनके मार्जिन को हानि पहुंच सकता है. उत्पादन में तेजी लाने के लिए, विभिन्न सरकारी एजेंसियों की भागीदारी के साथ प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के विकल्प के निर्माण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए उद्योग इकाइयों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है.