ज्ञानवापी विवाद जानिए उन पांच महिलाओं के बारे में

ज्ञानवापी विवाद जानिए उन पांच महिलाओं के बारे में

विस्तार वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर का पहले दिन का सर्वे शनिवार को पूरा हो गया. एडवोकेट कमिश्नर की मौजूदगी में सर्वेक्षण के दौरान पूरी टीम ने एक-एक चीज का बारीकी से निरीक्षण किया. एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्र और वादी-प्रतिवादी पक्ष के 50 से अधिक लोग परिसर के अंदर गए

यूं तो इस परिसर को लेकर वर्षों से टकराव चल रहा है, लेकिन जब न्यायालय ने सर्वे का आदेश दिया तो इस मुद्दे ने अधिक तूल पकड़ लिया. ये सर्वे पांच स्त्रियों की ओर से पंजीकृत याचिका पर हो रही है. वाराणसी की न्यायालय में याचिका दाखिल करने वाली इन पांच स्त्रियों में लक्ष्मी देवी, राखी सिंह, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक शामिल हैं. मुद्दे की प्रतिनिधित्व राखी सिंह कर रही हैं. आइए जानते हैं इन सभी पांच स्त्रियों के बारे में सबकुछ
  याचिका करने वाली पांच स्त्रियों की कहानी याचिकाकर्ता - फोटो : मीडिया मंदिर में पांचों की मुलाकात हुई और सहेली बन गईं  ज्ञानवापी में सर्वे - फोटो : मीडिया रेखा बताती हैं कि उनके साथ याचिका पंजीकृत करने वाली अन्य महिलाएं उनकी सहेली हैं. सभी की मुलाकात काशी विश्वनाथ में दर्शन के दौरान हुई थी. मंजू बताती हैं, 'हम पांचों महिलाएं मंदिर में मिलीं और सहेलियां बन गईं. हम सत्संग करते हैं. हम सब ने मिलकर सोचा कि कोई ऐसा काम करें कि मां शृंगार गौरी का मंदिर खुल जाए और प्रतिदिन उनके दर्शन हो सकें. 
  अब तक क्या-क्या हुआ? ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर. - फोटो : मीडिया ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी के प्रतिदिन दर्शन पूजन की मांग को लेकर पांच स्त्रियों की ओर से पंजीकृत वाद पर बीते आठ अप्रैल को सुनवाई हुई. न्यायालय ने अजय कुमार मिश्र को अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करते हुए ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण कर 10 मई तक न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था. 

छह मई को कमीशन की ओर से सर्वे प्रारम्भ तो हुआ लेकिन पूरा नहीं हो सका. सात मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर एडवोकेट कमिश्नर बदलने की मांग कर दी. वहीं वादी पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद की बैरिकेडिंग के अंदर तहखाने समेत अन्य उल्लिखित स्थलों का निरीक्षण करने का साफ आदेश देने की अपील की गई इस प्रार्थना पत्र पर तीन दिन तक न्यायालय में सुनवाई चली. न्यायालय के आदेश के बाद अब शनिवार से कमीशन ने सर्वे का काम फिर से प्रारम्भ किया है. विज्ञापन if(typeof _app_adv_status !==undefined && _app_adv_status == disable){ if(typeof is_mobile !=undefined && is_mobile()){googletag.cmd.push(function() { googletag.display("div-gpt-ad-1517823702248-0"); });} } 1. राखी सिंह  
दिल्ली के हौज खास की रहने वाली राखी सिंह इस मुद्दे की प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं. इस पूरे मुद्दे को 'राखी सिंह और अन्य बनाम यूपी सरकार' नाम दिया गया है. राखी के पति का नाम इंद्रजीत सिंह है. इनका दूसरा घर लखनऊ के हुसैनगंज में है. 

2. लक्ष्मी देवी 
ज्ञानवापी मुद्दे में दूसरी याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी हैं. लक्ष्मी वाराणसी के महमूरगंज क्षेत्र की रहने वाली हैं. पति चिकित्सक सोहन लाल आर्य ने भी 1996 में ज्ञानवापी को लेकर न्यायालय में एक मामला दर्ज कराया था. इसके बाद ज्ञानवापी का निरीक्षण भी हुआ था, लेकिन कोई सर्वे नहीं हो सका. लक्ष्मी ने मीडिया को बताया कि पति भी चाहते थे कि मैं इस मुद्दे को उठाऊं. ये मां शृंगार गौरी का मामला है. इसलिए मैंने याचिका पंजीकृत की. 

3. सीता साहू
वाराणसी के चेतगंज की रहने वाली सीता साहू इस मुद्दे में तीसरी याचिकाकर्ता हैं. सीता समाज सेविका हैं. पति का नाम बाल गोपाल साहू है. सीता का बोलना है, वह कई बार मां शृंगार गौरी की पूजा करने आ चुकी हैं. उनका दावा है कि मां शृंगार गौरी का मंदिर मस्जिद के अंदर बना है, लेकिन हम लोग अंदर नहीं जा सकते. इसकी अनुमति नहीं है. केवल बाहर से पैर छू पाते हैं. हमारी आराध्य देवी का मंदिर मस्जिद के अंदर है. इसे अब अतिक्रमण मुक्त करवाना है. 

4. मंजू व्यास 
ज्ञानवापी मुद्दे में चौथी याचिकाकर्ता मंजू व्यास भी वाराणसी की रहने वाली हैं. यहां उनका राम घाट में घर है. पति का नाम विक्रम व्यास है. मंजू भी समाज सेविका हैं. वह कहती हैं, प्रतिदिन मां शृंगार गौरी के दर्शन की अनुमति होनी चाहिए. अभी हम लोग चौखट के दर्शन करके लौट आते हैं. 

5. रेखा पाठक 
पांचवी याचिकाकर्ता रेखा पाठक भी वाराणसी की रहने वाली हैं. रेखा का घर वाराणसी के हनुमान फाटक के पास है. पति का नाम अतुल कुमार पाठक है. रेखा कहती हैं, ज्ञानवापी हम सभी के आस्था का केंद्र बिंदु है. इसपर अतिक्रमण हुआ है. इसे छुड़ाने तक ये लड़ाई जारी रहेगी. 
  रेखा बताती हैं कि उनके साथ याचिका पंजीकृत करने वाली अन्य महिलाएं उनकी सहेली हैं. सभी की मुलाकात काशी विश्वनाथ में दर्शन के दौरान हुई थी. मंजू बताती हैं, 'हम पांचों महिलाएं मंदिर में मिलीं और सहेलियां बन गईं. हम सत्संग करते हैं. हम सब ने मिलकर सोचा कि कोई ऐसा काम करें कि मां शृंगार गौरी का मंदिर खुल जाए और प्रतिदिन उनके दर्शन हो सकें. 
  ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी के प्रतिदिन दर्शन पूजन की मांग को लेकर पांच स्त्रियों की ओर से पंजीकृत वाद पर बीते आठ अप्रैल को सुनवाई हुई. न्यायालय ने अजय कुमार मिश्र को अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करते हुए ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण कर 10 मई तक न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था. 

छह मई को कमीशन की ओर से सर्वे प्रारम्भ तो हुआ लेकिन पूरा नहीं हो सका. सात मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर एडवोकेट कमिश्नर बदलने की मांग कर दी. वहीं वादी पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद की बैरिकेडिंग के अंदर तहखाने समेत अन्य उल्लिखित स्थलों का निरीक्षण करने का साफ आदेश देने की अपील की गई इस प्रार्थना पत्र पर तीन दिन तक न्यायालय में सुनवाई चली. न्यायालय के आदेश के बाद अब शनिवार से कमीशन ने सर्वे का काम फिर से प्रारम्भ किया है.


घूस लेकर चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

घूस लेकर चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

सीबीआई ने पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम के बेटे और कांग्रेस पार्टी सांसद कार्ति चिदंबरम के विरूद्ध एक और मामला दर्ज कर उनके करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की ये छापेमारी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा में की गई है सीबीआई ने कार्ति चिंदबरम और दूसरे आरोपियों के विरूद्ध जो मामला दर्ज किया है उसमें आरोप है कि कार्ति ने 50 लाख रुपये घूस लेकर गृह मंत्रालय से चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाया हैय

चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

सीबीआई में दर्ज मुद्दे के अनुसार पंजाब के मानसा में तलवंडी साबो पावर प्लांट लग रहा था इस थर्मल पावर प्लांट की क्षमता 1980 मेगा वॉट थी जिसे लगाने का जिम्मा चीन की Shandong Electric Power Construction Corp (SEPCO) को दिया गया था

यही वजह थी कि इस प्लांट को लगाने के लिये चीन के इंजीनियरों को प्रोजेक्ट वीजा दिया गया था लेकिन काम में देरी के चलते कंपनी को अधिक चीनी इंजीनियरों की आवश्यकता थी जिसके लिये वे वीजा स्वीकृति चाहिये थे क्योंकि इससे पहले जो प्रोजेक्ट वीजा दिये गये थे वो तय समय से अधिक हो चुके थे और फिर से वीजा के लिये गृह मंत्रालय से स्वीकृति महत्वपूर्ण थी

एक कपंनी के जरिए 50 लाख की घूस

इसके लिये पावर प्लांट ने कार्ति चिंदबरम को संपर्क किया और फिर 50 लाख रुपयों के बदले कार्ति चिदंबरम ने गृह मंत्रालय से 263 Re-use प्रोजेक्ट वीजा की स्वीकृति दिलवाई ध्यान देने वाली बात ये है कि वर्ष 2011 में जब ये स्वीकृति दिलवाई गई उस दौरान कार्ति के पिता पी चिदंबरम राष्ट्र के गृहमंत्री थे  

एजेंसी के अनुसार चीनी इंजीनियरों को वीजा दिलाने के बदले जो 50 लाख की घूस दी गई थी वो मुंबई की एक कंपनी M/s Bell Tools Ltd के जरिये दी गई थी कार्ति की कंपनी ने कंस्लटेंसी के नाम पर फर्जी बिल इस कंपनी के नाम बनाया जिसके बदले ये रिशवत दी गई