Haridwar Kumbh Mela 2021: 27 फरवरी से शुरू हो सकता है कुंभ, श्रद्धालुओं की होगी आरटीपीसीआर जांच

Haridwar Kumbh Mela 2021: 27 फरवरी से शुरू हो सकता है कुंभ, श्रद्धालुओं की होगी आरटीपीसीआर जांच

हरिद्वार कुंभ मेला 27 फरवरी से शुरू हो सकता है। राज्य सरकार ने वार्ता के दौरान केंद्र सरकार को यही प्रस्तावित तिथि बताई है। इस तिथि के हिसाब से ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने एसओपी जारी की है। मेले में प्रतिदिन 10 लाख और विशेष अवसरों पर 50 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान जताया गया है।

12 साल बाद आयोजित होने जा रहा कुंभ मेला 27 फरवरी से 30 अप्रैल तक आयोजित होगा। हालांकि अभी राज्य सरकार ने विधिवत इसकी घोषणा नहीं की है। राज्य सरकार से मिली जानकारी के आधार पर केंद्र ने माना है कि मेले में प्रतिदिन 10 लाख श्रद्धालु आएंगे।

विशेष स्नान पर इनकी संख्या 50 लाख तक पहुंच सकती है। मेले में 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा, 11 मार्च को महाशिवरात्रि, 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या, 14 अप्रैल को बैसाखी, 21 अप्रैल को राम नवमी और 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान होंगे। केंद्र ने अनुमान जताया गया है कि इन शाही स्नान पर हर की पौड़ी पर अत्यधिक भीड़ उमड़ सकती है। 

आईएमए को भी करना होगा सहयोग 
कुंभ मेले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) को भी अपने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों को प्रोत्साहित करना होगा। इसके लिए वह ऋषिकेश, हरिद्वार और निकटतम स्थानों पर कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, ताकि किसी मरीज में कोविड-19 के लक्षण पाए जाने पर वह तुरंत सरकार तक उसकी सूचना पहुंचा सकें। 

मेले के दौरान श्रद्धालुओं की होगी आरटीपीसीआर जांच

कुंभ मेले में आने वाले तीर्थयात्रियों की रैंडम आरटीपीसीआर जांच करनी होगी। इसके लिए कुंभ मेला प्रशासन को खास इंतजाम करने होंगे। एम्स ऋषिकेश, दून मेडिकल कॉलेज, हिमालयन मेडिकल कॉलेज जौलीग्रांट के साथ ही सात निजी लैब भी इन जांचों के लिए चिह्नित करनी होंगी, ताकि समय से कोविड रिपोर्ट आ सके।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एसओपी में मेला प्रशासन की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि कोरोना से बचाव के लिए कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। बड़ी संख्या में भीड़ को एकत्र नहीं होने दिया जाएगा। भीड़ का प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होगी। मेला प्रशासन के लिए क्या हिदायतें जारी की गई हैं।
 
ये होगी व्यवस्था
- शारीरिक दूरी बनाने के लिए कुंभ मेला क्षेत्र को चिन्ह्ति कर वहां पुख्ता इंतजाम करने होंगे। थर्मल स्क्रीनिंग, शारीरिक दूरी और सैनिटाइजेशन का पर्याप्त इंतजाम करना होगा।
- कुंभ मेले में प्रवेश और निकास के लिए विभिन्न द्वार बनाने होंगे। इन द्वारों पर हेल्प डेस्क स्थापित करनी होगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न हो।
- कुंभ मेले के प्रवेश द्वार पर संपर्क रहित (कांटेक्ट लैंस) हाईजीन और थर्मल स्क्रीनिंग के इंतजाम करने होंगे। अगर किसी के भीतर इस दौर लक्षण नजर आए तो उसे कुंभ मेले में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
- कुंभ मेला क्षेत्र में शारीरिक दूरी के नियम का पालन करने के लिए सभी जगहों पर गोले आदि बनाने होंगे।
- कुंभ मेला स्थल पर किसी भी तरह की प्रदर्शनी, ऐसी पूजा जिसमें भीड़ इकट्ठा हो, पर रोक रहेगी। ऐसे किसी भी आयोजन के लिए मेला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।
- पंडाल (अखाड़ा), फूड कोर्ट, पूजा स्थल आदि ऐसे स्थान जहां लोग बैठेंगे, वहां शारीरिक दूरी के नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
- लंगर, अन्न दान जैसे आयोजन में भी शारीरिक दूरी के नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा।
- पार्किंग, प्रतीक्षालय, स्टॉल्स आदि पर भीड़ प्रबंधन का खास इंतजाम करना होगा।
- मास्क और शारीरिक दूरी के नियमों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे।
- मेला स्थल पर पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस रखनी होंगी। इन एंबुलेंस के परिचालन के लिए कंट्रोल रूम को जिम्मेदारी देनी होगी।

मेला क्षेत्र में बनाना होगा मेगा अस्पताल

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून के अस्पतालों में कुल 2800 बेड की क्षमता है। श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते इसे बढ़ाने की जरूरत है। लिहाजा, मेला स्थल पर कम से कम 1000 बेड का अस्थायी अस्पताल बनाना होगा, जिसमें दो हजार बेड तक लग सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से मदद ले सकती है। इन अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में पीपीई किट, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की व्यवस्था रखनी होगी। क्लीनिकल मैनेजमेंट के लिए एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ कुंभ मेला क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करेगी। 

बचाव के यह इंतजाम भी करने होंगे
पूरे कुंभ मेल क्षेत्र को रोजाना कम से कम दो बार सैनिटाइज करना होगा। इसके लिए एक प्रतिशत सोडियम हाइपोक्लोराइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे स्थान जहां ज्यादा हाथ लगते हैं, उन्हें रोजाना सैनिटाइज करना होगा। शौचालय, हाथ धोने की जगह और पीने के पानी की जगह को रोजाना कम से कम तीन से चार बार सैनिटाइज करना होगा। कुंभ मेला क्षेत्र में कोविड-19 से बचाव के लिए क्या करें, क्या न करें की जानकारी विभिन्न माध्यमों से श्रद्धालुओं के बीच पहुंचानी होगी।

 


तमिलनाडु चुनाव से पहले बड़ा फैसला, शशिकला ने छोड़ी राजनीति, संन्यास का एलान

तमिलनाडु चुनाव से पहले बड़ा फैसला, शशिकला ने छोड़ी राजनीति, संन्यास का एलान

तमिलनाडु की सियासत में बीते कई दिनों से शशिकला के राजनीतिक सफर को लेकर चल रही अटकलों के बीच आज बड़ी खबर आई है। तमिलनाडु की छोटी अम्मा शशिकला ने राजनीति से संन्यास लेने का एलान कर दिया है। बता दें कि हाल ही में शशिकला 4 साल की कैद की सजा पूरी कर जेल से आजाद हुई हैं। जिसके बाद से माना जा रहा था कि शशिकला दोबारा राजनीति में सक्रिय हो सकती हैं और आगामी चुनावों में बड़ी भूमिका में नजर आ सकती है। लेकिन उन्होंने इन सबकी अफवाहों पर विराम लगा दिया।

शशिकला ने राजनीति से लिया संन्यास
5 दिसंबर 2016 को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद शशिकला का सीएम बनना तय था। शशिकला ने सबसे पहले उस व्यक्ति से इस्तीफा लिया, जिसे जयललिता ने जीते जी अपनी जगह बिठाया था।

जयललिता के निधन के बाद शशिकला का सीएम बनना था तय
बाद में 6 फरवरी को अन्नाद्रमुक के विधायकों ने पार्टी महासचिव वीके शशिकला को विधायक दल का नेता चुन लिया। इससे 62 वर्षीय शशिकला के तमिलनाडु की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। कहा जा रहा था कि तमिलनाडु की पहली महिला सीएम जानकी रामचंद्रन, दूसरी जयललिता के बाद तीसरी महिला सीएम शशिकला बनेंगी।

शशिकला के नाम का प्रस्ताव मौजूदा मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने इस्तीफा देकर प्रस्तावित किया था जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाने से उनका यह सपना अधूरा रह गया। शशिकला के ही आशीर्वाद से ई पलानीस्वामी (ईपीएस) मुख्यमंत्री बने और ओ पनीरसेल्वम (ओपीएस) डिप्टी सीएम बने थे।

4 साल की कैद के बाद जेल से शशिकला की रिहाई
शशिकला को चार साल की कैद के बाद जनवरी में परप्पाना अग्रहारा केंद्रीय जेल से रिहा किया गया है। उन्हें 14 फरवरी, 2017 को बेनामी संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया गया था और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना देने के बाद रिहा कर दिया गया। अगर वह 10 करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं भरतीं तो उन्हें 13 महीने और जेल में काटने पड़ते।

बेनामी संपत्ति के इस मामले में पहली आरोप जयललिता थीं। उन दिनों शशिकला को सोने की देवी कहा जाता था। चर्चा यहां तक रही कि जब इनके घर में छापा पड़ा तो सुरंग खोदकर सोना निकाला गया था।


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