महाराष्ट्र में सियासी घमासान और उठा-पटक जारी

महाराष्ट्र में सियासी घमासान और उठा-पटक जारी

महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान और उठा-पटक जारी है. उद्धव ठाकरे सीएम का आधिकारिक आवास छोड़कर अपने घर में शिफ्ट हो गए हैं. उधर, एकनाथ शिंदे ने ओपन लेटर लिखकर अनेक आरोप लगाए हैं. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस छिड़ी है. इसी बीच चर्चित कवि डाक्टर कुमार विश्वास ने अपना एक वीडियो साझा करते हुए प्रतिक्रिया दी है. वीडियो में वो सत्ता के अहंकार की बात कर रहे हैं.

कुमार विश्ववास ने अपना वीडियो शेयर करते हुए लिखा,”सत्ता के अहंकार में चूर सभी हिरण्यकश्यपों और अपनी सात्विकता के सहारे उनसे जूझने का पराक्रम दिखा रहे अनेक प्रह्लादों की ये कहानी सबको याद रखनी चाहिए. ताकि समय के शिलालेख पर हमारी पुण्य-साधनाएं वरदान-रक्षित होलिका के रूप में अंकित होने से बच सके.

कुमार ने जो वीडियो शेयर किया है उसमें वो हिरण्यकश्यप की कहानी बता रहे हैं और इस बहाने राजनीति में शुचिता की बात कर रहे हैं. उनके इस वीडियो पर अनेक यूजर्स ने भी प्रतिक्रिया दी है.अमित बिष्ट नाम के यूजर ने लिखा,” मौजूदा समय और राष्ट्र के हालात देखकर तो कभी-कभी ये लगता है कि ये सब कहानी मात्र है. जैसे किसी ने एक कहानी ये बुन दी कि मोदी जी बचपन में मगरमच्छ पकड़ लाये थे, हो सकता है कालांतर में इसे सच भी मान लिया जाए.

एनआर कदम ने लिखा,”कुमार भाई, बस इतना और बता दीजिए, वर्तमान क्राइसिस में हिरण्यकश्यप कौन है और प्रह्लाद कौन? मौका तो वही है, न अंदर न बाहर, न दिन है न रात, न अस्र है न शस्त्र! लेकिन हिरण्य कश्यप का वध तो निश्चित है. राजनीति में सबकुछ संभव है.” महेंद्र साहुगौरा ने लिखा,”ना जाने हमारे राष्ट्र के नेता ये कब समझेंगे कि सदा सत्ता में नहीं रहेंगे. एक दिन वो जरूर आएगा जब वो सत्ता से बाहर होंगे. प्रतिशोध की राजनीति शोभा नहीं देती. हिंदुस्तान जैसे महान और पवित्र राष्ट्र को गंदा करने का अधिकार किसी को नहीं.

एकनाथ शिंदे ने ट्वीट में बताई गवर्नमेंट की विफलता: आपको बता दें कि महाराष्ट्र गवर्नमेंट के मंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने बगावती रुख अपना लिया है. पार्टी के लगभग 40 विधायकों के साथ वे गुवाहाटी में डेरा डाले हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”पिछले ढाई वर्षों में, एमवी गवर्नमेंट ने सिर्फ घटक दलों को लाभ पहुंचाया और शिवसैनिकों को भारी हानि हुआ है. जहां घटक दल मजबूत हो रहे हैं, वहीं शिवसैनिक-शिवसेना का व्यवस्थित गबन हो रहा है. उन्होंने आगे लिखा कि पार्टी और शिवसैनिकों के अस्तित्व के लिए अस्वाभाविक गठबंधन से बाहर निकलना महत्वपूर्ण है. महाराष्ट्र के भलाई में अभी फैसला लेने की आवश्यकता है.

बता दें कि 22 जून को महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फेसबुक लाइव आकर पार्टी में चल रही बगावत पर बात की थी. उन्होंने बोला कि यदि बागी विधायक उनसे सामने आकर इस्तीफा मांगते हैं तो वे इसके लिए तैयार हैं.


संपत्ति की कीमतों में वृद्धि के साथ ही आवास ऋ ण दरों के बढ़ने से मांग पर असर

संपत्ति की कीमतों में वृद्धि के साथ ही आवास ऋ ण दरों के बढ़ने से मांग पर असर

दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में घरों की बिक्री अप्रैल-जून, 2022 में तिमाही आधार पर 19 फीसद घटकर 15,340 इकाई रह गई. संपत्ति सलाहकार एनाराक ने यह जानकारी दी है. एनाराक के मुताबिक, संपत्ति की कीमतों में वृद्धि के साथ ही आवास ऋ ण दरों के बढ़ने से मांग पर असर पड़ा है.

गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में जनवरी-मार्च, 2022 में आवासीय बिक्री 18,835 इकाई थी. एनाराक के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन अवधि में दिल्ली-एनसीआर में नयी पेशकश या आपूर्ति 56 फीसद घटकर 4,070 इकाई रह गई, जो इससे पिछली तिमाही में 9,300 इकाई थी. इस क्षेत्र में बिना बिके घरों की संख्या जून तिमाही के अंत में सात फीसद घटकर 1,41,235 इकाई रह गई, जो 31 मार्च 2022 को 1,51,500 इकाई थी.

एनाराक ने बोला कि गुरुग्राम में घरों की बिक्री 8,850 इकाइयों से घटकर 7,580 इकाई रह गई. यहां नयी पेशकश 7,890 इकाइयों से घटकर 2,830 इकाई रह गई है. इसी तरह, नोएडा में आवास की बिक्री अप्रैल-जून, 2022 में घटकर 1,650 इकाई रह गई, जो इससे पिछली तिमाही में 2,045 इकाई थी. शहर में जून तिमाही में कोई भी नयी पेशकश नहीं हुई. ग्रेटर नोएडा में घरों की बिक्री 3,450 इकाइयों से गिरकर 2,750 इकाई रह गई, जबकि नयी पेशकश में बढ़ोतरी देखने को मिली. दिल्ली-एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में भी घरों की बिक्री में गिरावट का रुख रहा.

कार्यालय स्थल पट्टे पर लेने में आई 26 फीसद गिरावट

देश के सात प्रमुख शहरों में कार्यालय स्थल को पट्टे पर पर लेने में अप्रैल-जून के दौरान 26 प्रतिशत की गिरावट आई और यह आंकड़ा 85 लाख वर्गफुट रहा. रियल एस्टेट परामर्शदाता कंपनी जेएलएल इण्डिया ने यह जानकारी दी. इस साल जनवरी-मार्च में कुल 115.5 लाख वर्गफुट क्षेत्र को पट्टे पर लिया गया था.

हालांकि, पिछले साल की अप्रैल-जून तिमाही के 29.8 लाख वर्गफुट के मुकाबले यह आंकड़ा करीब तीन गुना है. 2021 की अप्रैल-जून तिमाही में कोविड-19 विषाणु की दूसरी लहर के कारण कार्यालय की मांग में खासी गिरावट आई थी. जेएलएल ने बोला कि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कार्यालय स्थल पर निर्माण पूरा होने में देरी हुई, जो पट्टे में कमी की वजह हो सकता है. कंपनी के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून 2022 में बंगलुरु में 41.2 लाख वर्गफुट कार्यालय स्थल को पट्टे पर लिया गया जो पिछले तिमाही के 16.7 लाख वर्गफुट क्षेत्रफल की तुलना में कहीं अधिक है. पिछले साल अप्रैल-जून के दौरान यहां 17.8 लाख वर्गफुट स्थल पट्टे पर लिए गए थे. चेन्नई में 5.3 लाख वर्गफुट कार्यालय स्थल पट्टे पर लिए गए जो जनवरी-मार्च तिमाही के 12.1 लाख वर्ग फुट से कम है.

एक वर्ष पहले समान अवधि में 1.1 लाख वर्गफुट स्थल किराये पर लिया गया था. दिल्ली-एनसीआर में अप्रैल-जून के दौरान 13.2 लाख वर्गफुट स्थल किराये पर लिया गया, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 13.4 लाख वर्गफुट था.हैदराबाद में अप्रैल-जून तिमाही में 7.5 लाख वर्गफुट स्थल किराये पर लिया गया, वहीं कोलकाता में 1.9 लाख वर्गफुट स्थल किराये पर लिया गया. मुंबई और पुणे में भी पट्टे पर कार्यालय स्थल लेने में तिमाही आधार पर गिरावट आई.