आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों की अब खैर नहीं, केरल पुलिस अधिनियम संशोधन अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी

आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों की अब खैर नहीं, केरल पुलिस अधिनियम संशोधन अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी

तिरुवनंतपुरम। केरल की एलडीएफ सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे साइबर क्राइम पर लगाम लगाने के लिए गंभीरता से कदम उठा रही है। शनिवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसे लेकर लाए गए केरल पुलिस अधिनियम संशोधन अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश के तहत यदि सोशल मीडिया पर कोई व्यक्ति किसी भी तरह की ऐसी जानकारी भेजता है या बनाता है, जो अपमानजनक है या किसी को अपमानित करने या धमकी देने के इरादे से कोई पोस्ट करता है तो, ऐसे में उस व्यक्ति को पांच साल की जेल की सजा या 10 हजार रुपये जर्माना या दोनों का प्रावधान है।

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इसे लेकर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि वो केरल सरकार के इस नियम से आश्चर्य में हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, 'केरल की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर तथाकथित भड़काऊ आपत्तिजनक पोस्ट करने के कारण पांच साल की सजा के नियम से आश्चर्य में हूं।'

कांग्रेस के नेता ने रमेश चेन्नीथला समेत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए जांच एजेंसी को मंजूरी देने के राज्य सरकार के फैसले पर भी आश्चर्य व्यक्त किया है। बता दें कि केरल सरकार ने राज्यपाल और विधानसभा स्पीकर से कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला और दो पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच की इजाजत मांगी है। सरकार की तरफ से यह कदम बार रिश्वत मामले में खुलासे के बाद उठाया गया है। हाल ही में शराब कारोबारी बीजू रमेश ने आरोप लगाया था कि उसने पूर्व यूडीएफ सरकार के दौरान कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला, जो उस समय पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे, को रिश्वत दी थी। इस मामले में चेन्नीथला के अलावा पूर्व आबकारी मंत्री के बाबू और स्वास्थ्य मंत्री वीएस शिवकुमार का भी नाम सामने आया है।


रोशनी घोटाले में फंसे फारूक अब्दुल्ला, अब दी अपनी सफाई

रोशनी घोटाले में फंसे फारूक अब्दुल्ला, अब दी अपनी सफाई

जम्मू-कश्मीर: जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir) के रोशनी जमीन घोटाले (Roshni Land Scam) में बड़े-बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। उन्होंने मामले पर सफाई देते हुए उन पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

फारूक अब्दुल्ला ने पेश की अपनी सफाई
रोशनी जमीन घोटाले में नाम सामने आने के बाद फारूक अब्दुल्ला ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि इलाके में केवल मेरा घर ही नहीं है बल्कि सैकड़ों घर हैं। उन्होंने कहा कि ये मुझे परेशान करने की कोशिश है और उन्हें करने दीजिए। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप है कि जम्मू के सजवान में 10 कनाल जमीन में बने उनके घर के लिए 7 कनाल जंगल की जमीन और केवल तीन कनाल उनकी जमीन का इस्तेमाल किया गया है।

फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) पर इस जमीन को रोशनी एक्ट (Roshni Act) के तहत गलत तरीके से लेने का आरोप लगा है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से रोशनी घोटले की लिस्ट को सार्वजनिक कर दिया गया है। कोर्ट के आदेश पर इस लिस्ट को सरकार की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।

हसीब द्राबू ने भी दी अपनी सफाई
रोशनी जमीन घोटाले (Roshni Land Scam) में कई बड़े राजनेता और बड़े नौकरशाहों के नाम सामने आ रहे हैं। इस स्कैम में PDP, NC, कांग्रेस के कई नेताओं के नाम सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू (Haseeb Drabu) का भी नाम सामने आया है। जिसके बाद हसीब द्राबू ने भी अपनी सफाई दी है। उन्होंने एक मीडिया हाउस से बातचीत में कहा कि कोई घोटाला नहीं हुआ है। मुझे गलत मकसद से बदनाम किया जा रहा है।

जम्मू और कश्मीर का सबसे बड़ा जमीन घोटाला
ये जमीन घोटाला करीब 25 हजार करोड़ रुपये का है, जिसे जम्मू और कश्मीर का सबसे बड़ा जमीन घोटाला मामला कहा जाता है। इस मामले की जांच CBI कर रही है। आपका बता दें कि जम्मू-कश्मीर सरकार के ‘रोशनी एक्ट’ के तहत सरकारी जमीनों की खूब बंदरबांट हुई है। इसे सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को मालिकाना हक देने के लिए बनाया गया था। इसके बदले उनसे सरकार द्वारा तय एक निश्चित रकम ली जाती थी।

2001 में फारूक अब्दुल्ला की सरकार ने जब यह कानून लागू किया तब सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को मालिकाना हक देने के लिए 1990 को कट ऑफ वर्ष निर्धारित किया गया। शुरू में तो सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले किसानों को उद्देश्यों के लिए स्वामित्व अधिकार दिए गए थे। हालांकि मुफ्ती सईद और गुलाम नबी आजाद की सरकार के दौरान इस अधिनियम में दो बार संशोधन किए गए। पहले कट ऑफ 2004 और बाद में 2007 कर दी गई।

हाई कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी जांच
लेकिन साल 2014 में आई CAG रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि 2007 से 2013 के दौरान जमीन ट्रांसफर करने के मामले में खूब गड़बड़ी की गई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार 25 हजार करोड़ के बजाय केवल 76 करोड़ रुपये ही जमा कर पाई। वहीं हाई कोर्ट के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।


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