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OH NO! इस लड़की का 2 घंटे में 12 दरिंदों ने किया रेप, सुनकर सभी के होश उड़ गए

OH NO! इस लड़की का 2 घंटे में 12 दरिंदों ने किया रेप, सुनकर सभी के होश उड़ गए

हाल ही में जो क्राइम का मुद्दा सामने आया है वह झारखंड के रांची का है. जहाँ लॉ की स्टूडेंट के साथ हवस की गई है. इस मुद्दे में 12 आरोपी दोषी पाए गए हैं व इस मुद्दे को सुनकर सभी के होश उड़ गए हैं. इस मुद्दे में सड़क पर खड़ी लड़की का किडनैपिंग किया गया व फिर 2 घंटे में 12 दरिंदों ने 15 से ज्यादा बार उसके साथ दुष्कर्म किया. वहीं न्यायालय में 3 मार्च को दरिंदो की सजा का निर्धारण होने वाला है.

वहीं इनमें से एक आरोपी ने खुद को नाबालिग बताया है व समाचार मिली है कि अगर वह मेडिकल टेस्ट में क्राइम करने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम पाया गया तो भले ही उसकी आयु 18 वर्ष से कम हो, उसे भी वयस्क क्रिमिनल की तरह सजा दी जाए. इस मुद्दे में मिली जानकारी के मुताबिक शाम करीब 5.30 बजे पीडि़ता बस स्टॉप पर बैठकर अपने दोस्त के साथ वार्ता कर रही थी लेकिन इसी दौरान पल्सर बाइक से दो युवक वहां पहुंचे. वहीं वह उसे घूरने लगे व उसके बाद दोनों उसके पास आकर गाली-ग्लौज करने लगे. वहीं जब लड़की ने उन्हें मां-बाप को बता देने की धमकी दी तो दोनों उसके दोस्तों से हाथापाई करने लगे व पीडि़ता से उसकी मां से बात कराने को कहा. तभी पीडि़ता भय गई व मोबाइल निकालकर अपनी मां को फोन किया व एक अभियुक्त से बात करायी. वहीं अभियुक्तों ने उसके मां को भी भद्दी-भद्दी गालियां देनी प्रारम्भ कर दीऔर फिर उसकामोबाइल बंद कर अपने जेब में रख लिया.

इसके बाद दोनों अभियुक्त ने आपस में कुछ वार्ता किया उसके बाद पीडि़ता को जबरदस्ती अपनी बाइक पर बैठाकर वहां से ले गए. वहीं जब पीडि़ता के दोस्त ने उन्हें रोकने की प्रयास की तो उन्होंने सभी के साथ हाथापाई की. रास्ते में लाल रंग की कार से लड़कों के दोस्त आए व पीडि़ता के साथ उन्हें कार में बैठाकर संग्रामपुर ले गए. उसके बाद दो युवक वापस बस स्टॉप पर गए व उसके दोस्त को कब्जे में ले लिया व उसकी स्कूटी लेकर घटना स्थल गए. वहां ईंट भट्ठा पहुंचने पर कार से युवती को निकाल कर स्कूटी पर बैठाकर सुनसान खेत में ले गया जहां बारी-बारी से अभियुक्तों ने उसके साथ बलात्कार किया. अब इस मुद्दे में न्यायालय फैसला लेने वाली है.


महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर मंडराया कोरोना का खतरा

महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर मंडराया कोरोना का खतरा

देश पर कोरोना वायरस का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित प्रदेश महाराष्ट्र है. इस हालात में माना जा रहा है कि प्रदेश में जारी लॉकडाउन की अवधि बढ़ सकती है. वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के सीएम उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर भी इसका खतरा मंडरा रहा है. वह वर्तमान में प्रदेश के किसी भी सदन के मेम्बर नहीं हैं. यानी वह न तो विधायक है व न ही विधान परिषद के मेम्बर ही हैं. कोरोना संकट के कारण प्रदेश में होने वाले विधान परिषद के चुनाव को टाल दिया गया है. वहीं 28 मई से पहले उन्हें किसी सदन का मेम्बर बनना आवश्यक है.

क्या कहता है कानून
उद्धव ठाकरे ने पिछले वर्ष नवंबर में महाराष्ट्र के सीएम के तौर पर शपथ ली थी. संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार ठाकरे को छह महीने के अंदर प्रदेश के किसी सदन का मेम्बर होना जरूरी है. वर्तमान में ठाकरे किसी भी सदन के मेम्बर नहीं हैं. उन्हें मिली छह महीने की छूट 28 मई को समाप्त हो रही है. ऐसे में उन्हें 28 मई से पहले किसी भी सदन का मेम्बर बनना आवश्यक है.

क्या है समस्या
विधायकों के कोटे से नौ विधान परिषद की सीटें 24 अप्रैल को खाली हो रही हैं व द्विवार्षिक चुनावों के दौरान ठाकरे को एमएलसी के रूप में चुना जाना तय था. वह किसी सीट से चुनाव लड़ने वाले थे. हालांकि कोरोना वायरस महामारी व पूर्ण देशबंदी के मद्देनजर चुनाव आयोग ने चुनाव ही टाल दिए हैं.

क्या है विकल्प
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने गुरुवार को गवर्नर कोटे से प्रदेश विधान परिषद के मेम्बर के रूप में ठाकरे के नामांकन की सिफारिश करने का निर्णय किया. वर्तमान में गवर्नर कोटे से परिषद में दो सीटें खाली हैं क्योंकि दो एमएलसी ने पिछले वर्ष अक्तूबर में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल होने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस छोड़ दी थी. इन दोनों खाली सीटों की समयावधि जून मध्य तक है.

इस तरह बच सकती है उद्धव की सीट
यदि गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी मंत्रिमंडल की सिफारिश मानकर सरकार द्वारा भेजे गए नाम पर सहमत हो जाते हैं तो ठाकरे की कुर्सी बच सकती है. ठाकरे के पास दूसरा विकल्प यह है कि वह अपनी छह महीने की अवधि पूरी होने से पहले सीएम लेटर से त्याग पत्र दे सकते हैं. इसके बाद वह दोबारा प्रदेश के सीएम के तौर पर शपथ ले सकते हैं. जिससे उन्हें छह महीने का अलावा समय मिल जाएगा. हालांकि इसमें एक पेंच यह है कि यदि वह त्याग पत्र देते हैं तो इसे सारे मंत्रिमंडल का त्याग पत्र माना जा सकता है व फिर सारे मंत्रिमंडल को दोबारा शपथ लेनी होगी.

उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत नहीं कर सकते राज्यपालः चंद्रकांत पाटिल

महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का बोलना है कि गवर्नर उद्धव ठाकरे को विधान परिषद मेम्बर मनोनीत नहीं कर सकते. उन्हें चुनाव का सामना करना पड़ेगा. इसके बाद ही दुबारा सीएम बन सकते हैं.

पाटिल ने अमर उजाला से वार्ता में बोला कि उद्धव को अब तक विधान परिषद मेम्बर बनने के तीन मौका मिले, लेकिन उन्होंने मौका गंवा दिया. फिलहाल, जो दो सीटें रिक्त होने की बात कही जा रही है उसका कार्यकाल अभी 6 जून 2020 तक है. जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के तहत सदन में रिक्त जगह भरने का नियम है, लेकिन अधिनियम की धारा 151 ए के उपनियम (ए) में स्पष्ट किया गया है कि यदि एक साल से कम कालावधि है तो रिक्त सीट के लिए उपचुनाव नहीं कराया जा सकता.

ऐसे में दो महीने कार्यकाल शेष होते हुए किसी को भी मनोनीत किया जाना संविधान की मूल भावना के विरूद्ध है. तीन महीने पहले गवर्नर के पास एनसीपी के दो लोगों को मनोनीत करने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन गवर्नर ने इन्ही नियमों के आधार पर प्रस्ताव वापस भेज दिया था.

पेच है, लेकिन पूरी तरह से गवर्नर के विवेक पर निर्भरः अनंत कलसे
महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व प्रधान सचिव अनंत कलसे का बोलना है कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने में कानूनी पेच तो है ही. लेकिन, यह पूरी तरह से गवर्नर के विवेक पर निर्भर है. यदि गवर्नर ने उद्धव ठाकरे को विधान परिषद मेम्बर मनोनीत कर दिया तो उनको समय मिल जाएगा. क्योंकि इसमें भी दो चीजें हैं. एक तो कुछ लोग कहते हैं कि उद्धव को 6 वर्ष का टर्म मिल सकता है.

वहीं, कुछ लोगों का बोलना है कि उन्हें 6 जून तक का ही कार्यकाल मिल पाएगा. फिर भी 6 जून 2020 तक ही सही, यदि उद्धव ठाकरे तब तक के लिए एमएलसी बन गए तो उसके बाद दूसरे विकल्प अपना सकते हैं. तब तक शायद करोना वायरस भी चला जाएगा. अभी तो हर हाल में उद्धव ठाकरे के लिए विधानमंडल के किसी भी सदन का मेम्बर बनना आवश्यक है. वरना उन्हें सीएम पद से त्याग पत्र देना ही होगा.