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नेताजी सुभाष बोस के परिवार ने हिंदुस्तान रत्न सम्मान लेने से...

नेताजी सुभाष बोस के परिवार ने हिंदुस्तान रत्न सम्मान लेने से...

आज का दिन भारतीय इतिहास के लिहाज से खास है। आज ही के दिन हमारे देश में हिंदुस्तान रत्न (Bharat Ratna) देने की आरंभ हुई थी। पहली बार 2 जनवरी 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने देश के सर्वोच्च सम्मान (Highest Civilian Award) हिंदुस्तान रत्न देने की परंपरा प्रारम्भ की थी। पहले पहल ये सम्मान साहित्य, कला, विज्ञान व सामाजिक क्षेत्र में किसी शख्सियत के उसके विशिष्ट सहयोग के लिए दी जाती थी। बाद में इसका दायरा बढ़ाकर किसी भी क्षेत्र में देशसेवा में दिए सहयोग की वजह से दिया जाने लगा।



यह सम्मान हिंदुस्तान के किसी भी नागरिक को दिया जा सकता है, चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, व्यवसाय या लिंग से संबंध रखता हो। 1954 में सबसे पहले ये सम्मान हिंदुस्तान के एकलौते गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, हिंदुस्तान के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन व 1930 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक सीवी रमन को मिला।

इसके अगले वर्ष 1955 में स्वतंत्रता सेनानी भगवान दास, सर विश्वेश्वरैया व हिंदुस्तान के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू को दिया गया। इसके बाद के सालों में स्वतंत्रता सेनानी गोविंद बल्लभ पंत, धोंडो केशव, बीसी रॉय, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे कई गणमान्य लोगों को दिया गया। हिंदुस्तान रत्न सम्मान देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल व मोरारजी देसाई जैसे महान शख्सियतों को भी दिया जा चुका है।

जब सुभाषचंद्र बोस को दिया जाने वाला था हिंदुस्तान रत्न

1991 में हिंदुस्तान सरकार ने सुभाषचंद्र बोस को हिंदुस्तान रत्न देने की तैयारी की थी। हालांकि सुभाषचंद्र बोस के परिवार ने इस सम्मान को लेने से मना कर दिया था। सुभाषचंद्र बोस को हिंदुस्तान रत्न सम्मान देने की हिंदुस्तान सरकार की योजना के बारे में बहुत बाद में पता चला। नेताजी से संबंधित कुछ फाइलों के सरकार द्वारा डिक्लासीफाई करने के बाद जानकारी मिली कि 1991 में पीवी नरसिम्हाराव की सरकार ने सुभाषचंद्र बोस को मरणोपरांत हिंदुस्तान रत्न देने का निर्णय किया था।

इस बारे में तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव ने 10 अक्टूबर 1991 को राष्ट्रपति आर वेंकटरमन को एक खत लिखा था। राव ने लिखा था, 'भारत सरकार सुभाषचंद्र बोस के देश के लिए दिए अमूल्य सहयोग व स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय सहभागिता का सम्मान करते हुए उन्हें मरणोपरांत देश का सर्वोच्च सम्मान हिंदुस्तान रत्न देने का प्रस्ताव करती है’भारत सरकार ने इसके लिए खास आयोजन करने का सुझाव दिया था। इसके बाद नरसिम्हा राव ने राष्ट्रपति वेंकटरमन को खत लिखा। उसमें बोला गया था कि अच्छा होगा अगर नेताजी को हिंदुस्तान रत्न देने का ऐलान 23 जनवरी को किया जाए। इस दिन सुभाषचंद्र बोस का जन्मदिन भी है। नरसिम्हा राव ने लिखा था कि मेरा दफ्तर इस बारे में निरंतर आपसे सम्पर्क स्थापित करता रहेगा।

जब सुभाषचंद्र बोस की बेटी ने हिंदुस्तान रत्न ग्रहण करने से मना कर दिया
पीवी नरसिम्हा राव की सरकार सुभाषचंद्र बोस को हिंदुस्तान रत्न दिए जाने की तैयारी कर चुकी थी। 22 जनवरी 1992 को राष्ट्रपति भवन ने सुभाषचंद्र बोस को मरणोपरांत हिंदुस्तान रत्न दिए जाने का ऐलान कर दिया। लेकिन सुभाषचंद्र बोस की बेटी अनिता बोस ने इस सम्मान को लेने से मना कर दिया। नेताजी के परिवार का बोलना था- ‘सम्मान को ग्रहण करना नेताजी की याद को कम आंकना होगा’। पीएम नरसिम्हा राव को इस बारे में एक इंटरनल नोट के जरिए सूचित कर दिया गया।

अब सवाल उठा कि हिंदुस्तान रत्न का क्या किया जाए
सुभाषचंद्र बोस को हिंदुस्तान रत्न देने का ऐलान सरकार कर चुकी थी। सवाल उठा कि अब हिंदुस्तान रत्न का क्या किया जाए? देश के गृहमंत्री ने इसी सवाल को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात की। राष्ट्रपति का बोलना था कि हिंदुस्तान रत्न वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। इस विषय में डिक्लासीफाइड फाइल के जरिए ही पता चलता है कि उस वक्त गृहमंत्री ने कहा, ‘मैंने इस बारे में आज राष्ट्रपति से मुलाकात की। उनका बोलना है कि हिंदुस्तान रत्न वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। इसे अर्काइव में भी नहीं भेजा जा सकता। गृहमंत्रालय इसे अपने पास रख सकता है। नाम पुकारते वक्त इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाएगी। अब कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। ’

2014 में फिर उठी थी सुभाषचंद्र बोस को हिंदुस्तान रत्न देने की मांग
1992 के बाद 2014 में एक बार फिर सुभाषचंद्र बोस को हिंदुस्तान रत्न देने की मांग उठी। लेकिन नेताजी के परिवार ने फिर से इस सम्मान को लेने से मना कर दिया। नेताजी के परिवार का बोलना था कि हिंदुस्तान रत्न देने से अच्छा है कि सरकार 1945 में हुए विमान हादसे व इसके बाद नेताजी के गायब होने के रहस्य से पर्दा उठाए।

2014 में नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने बोला था, ‘नेताजी 1945 से गायब हैं। अगर आप उन्हें मरणोपरांत सम्मान देते हो तो आपको बताना होगा कि उनका निधन कब हुआ। लेकिन इसका सबूत कहां है?’ चंद्रकुमार बोस ने उस वक्त बोला था कि उन्होंने नेताजी के परिवार से जुड़े करीब 60 सदस्यों से बात की है। कोई भी मेम्बर हिंदुस्तान रत्न सम्मान दिए जाने को लेकर उत्साहित नहीं है। उन्होंने बोला था कि हममें से कोई भी ये नहीं मानता कि सुभाषचंद्र बोस के लिए ये न्यायोचित सम्मान है। हममें से कोई नहीं इसे स्वीकार करेगा।

नेताजी के परिवार ने उस वक्त पीएम मोदी से ओपन प्लेटफॉर्म में आकर नेताजी के गायब होने के रहस्य का पता लगाने के लिए एक कमिटी बनाने की मांग की थी। नेताजी के पोते सुगतो बोस ने भी सुभाषचंद्र बोस को हिंदुस्तान रत्न दिए जाने पर असहमति जताई थी। सुगतो बोस ने बोला था,‘नेताजी को 43 लोगों के बाद हिंदुस्तान रत्न कैसे मिल सकता है? उन्हें राजीव गांधी के बाद हिंदुस्तान रत्न कैसे दिया जा सकता है? नेताजी का कद हिंदुस्तान रत्न सम्मान से भी बड़ा है। ’


एक दिन के नवजात मासूम को मिली ऐसी सजा, सुनकर हो जाएंगे हैरान

एक दिन के नवजात मासूम को मिली ऐसी सजा, सुनकर हो जाएंगे हैरान

मंदसौर: यह समाचार बीते रविवार शाम के समय कोई नवजात बच्चे को मसजिद के पास नाली में फेंक कर चला गया था। वहीं, जब रोने की आवाज आई तो रहवासी एकत्र हो गए, परन्तु उसे उठाने की किसी ने हौसला तक नहीं जुटाई थी। इसी दौरान हब्बन आपा (75) ने कागज की सहायता से नवजात को बाहर निकाला। उसे अस्पताल में भर्ती कराया। 6 संतानों को जन्म देने वाली हब्बन अम्मा ने बच्चे को गोद लेने की भी ख़्वाहिश जताई हैं।

शामगढ़ अस्पताल के बीएमओ डाक्टर राकेश पाटीदार ने बोला कि अस्पताल लाते समय बच्चे की हालत गम्भीर थी। वहीं थोड़ी-सी भी देरी बच्चे की जान को खतरे में डाल सकती थी। उसके हाथ-पैर नीले पड़ने लग गए थे। नवजात बच्चे को आक्सीजन देकर प्राथमिक उपचार किया गया फिर आईसीयू की सुविधा के लिए 108 एम्बुलेंस की सहायता से नवजात को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था। जहां डॉक्टरों ने चेकअप के पश्चात् उसे भर्ती कर लिया। नवजात अब पूरी तरह स्वस्थ माना जा रहा है।

केंद्रीय दत्तकग्रहण अभिकरण (कारा) एक पोर्टल है। वहीं शिशु गृहों में निवासरत बच्चे इस पर अपलोड होते हैं। गोद लेने के लिए औनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होता है। वहीं, प्रतीक्षा सूची मुताबिक कारा के माध्यम से बच्चे आवंटित हाेते हैं। शामगढ़ थाना एसआई गौरव लाड़ ने बोला मसजिद समेत आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जाँच की है। इसमें 2 महिलाएं और एक पुरुष दिखाई दे रहे हैं। वहीं जल्द ही इस मुद्दे का खुलासा करेंगे।

जेजे एक्ट में यह प्रावधान है कि कोई बच्चे को समर्पित कर सकता है। जिले में 38 शिशु स्वागत केन्द्र हैं। जहां बगैर पहचान व वजह बताए बच्चे को छोड़ा जा सकता है। किसी नवजात की जान लेना गंभीर क्राइम में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार कोई मां इतनी क्रूर नहीं होती जो बच्चे को फेंक दे। महिला कहीं न कहीं सामाजिक बुराइयों की शिकार होगी। वह अविवाहित या विधवा हो सकती है। जो किसी मज़बूरी के तरह यह कदम उठाया होगा।

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