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इस बार दिल्ली में रामवीर सिंह विधूड़ी को मिला मौका

इस बार दिल्ली में रामवीर सिंह विधूड़ी को मिला मौका

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) में भाजपा विधायक रामवीर सिंह विधूड़ी (Ramveer Singh Bidhuri) को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया है। उन्हें सदन में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर निर्विरोध चुना गया है। इससे पहले दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता थे।  इस विषय में आयोजित मीटिंग के दौरान पर्यवेक्षक सरोज पांडे (Satoj Pandey), भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के अतिरिक्त भाजपा विधायक उपस्थित थे। वहीं नेता विपक्ष चुने जाने के बाद बिधूड़ी ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के अतिरिक्त दिल्ली के भाजपा विधायकों का भी धन्यवाद किया।

बता दें, 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election 2020) में भाजपा (BJP) के 8 विधायकों ने जीत दर्ज की है। जबकि 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के केवल तीन विधायकों को चुनावी जीत हासिल हुई थी।

बदरपुर सीट से हैं विधायक
04 दिसबर 1952 को जन्म लेने वाले विधूड़ी ने बदरपुर सीट से जीत हासिल की है। वैसे दिल्ली विधानसभा का इस बार का पहला सत्र 24 फरवरी से प्रारम्भ होने जा रहा है। इस दौरान पहली बार रमेश सिंह विधूड़ी भाजपा के विधायक दल का नेता के तौर पर सदन में भाजपा के आवाज को मुखर करेंगे।

विधायकों से की थी मुलाकात, सांसदों से ली थी राय
वैसे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सरोज पांडेय को इसके लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया था। पांडेय ने नेता प्रतिपक्ष के चुनाव से पहले दिल्ली भाजपा के विधायकों से मुलाकात भी की थी। इसके अतिरिक्त इसके लिए सांसदों से भी राय ली गई थी।

केंद्रीय नेतृत्व को लेना था फैसला
इस मुद्दे में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को निर्णय लेना था। इससे पहले 2015 के दिल्ली विधानसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता विजेंद्र गुप्ता नेता विपक्ष थे। लेकिन इसबार केंद्रीय नेतृत्व को इसके लिए बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए कई दावेदार सामने थे।


कोरोना: न्यूजीलैंड ने हिंदुस्तान के साथ प्रारम्भ किया था लॉकडाउन

कोरोना: न्यूजीलैंड ने हिंदुस्तान के साथ प्रारम्भ किया था लॉकडाउन

भारत में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है. बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन की अवधि को 21 दिनों से बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. हिंदुस्तान ने बेशक इस वायरस पर अब तक काबू पाने में सफलता हासिल नहीं की है लेकिन संसार का एक देश ऐसा भी है जहां हिंदुस्तान के साथ ही लॉकडाउन की आरंभ हुई थी व वहां के दशा अब बेहतर होने लगे हैं.

लगातार चौथे दिन न्यूजीलैंड में मामलों में आई गिरावट
हिंदुस्तान व न्यूजीलैंड ने कोरोना के विरूद्ध लड़ाई के लिए एक ही लॉकडाउन की घोषणा की थी. एक तरह से न्यूजीलैंड ने कोरोना पर काबू पा लिया है व यहां लगातार मामलों में कमी नजर जा रही है. यहां लगातार चौथे दिन मामलों में गिरावट दर्ज की गई. वहीं हिंदुस्तान की बात करें तो यहां मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है. पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्रतिदिन कोरोना के 500 से ज्यादा मुद्दे सामने आ रहे हैं. 

24 मार्च को हुई थी लॉकडाउन की घोषणा
लॉकडाउन की घोषणा के समय न्यूजीलैंड में कोरोना के केवल 29 मुद्दे सामने आए थे जबकि हिंदुस्तान में यह आंकड़ा 590 के करीब था. न्यूजीलैंड की पीएम जेसिंडा अर्डर्न ने चार हफ्तों के लॉकडाउन की घोषणा की है. वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने इसी दिन देश के नाम संबोधन में 21 दिनों के लॉकडाउन का एलान किया था. न्यूजीलैंड की तरह हिंदुस्तान में भी राशन, सब्जी, दवा की दुकानों को छोड़कर सबकुछ बंद है. दोनों देश सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं. कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए दोनों राष्ट्रों ने अपनी आबादी को घरों में कैद किया हुआ है. इसके बावजूद हिंदुस्तान में संक्रमितों की संख्या 6400 से ऊपर है व न्यूजीलैंड में 1200 के करीब.

आबादी में है बहुत अंतर
न्यूजीलैंड की आबादी केवल 50 लाख है जो दिल्ली की जनसंख्या के करीब एक चौथाई है. कोरोना के विरूद्ध लड़ाई में हिंदुस्तान के सामने सबसे बड़ी समस्या उसकी 130 करोड़ की आबादी है. न्यूजीलैंड में जिस समय 29 मुद्दे दर्ज किए गए थे तो उसने तभी 19 मार्च को विदेशियों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी. हिंदुस्तान ने लगभग 12 मार्च के इर्द-गिर्द विदेशियों के प्रवेश पर रोक लगाई थी. हिंदुस्तान में विदेशों से आने वाले यात्रियों की संख्या न्यूजीलैंड से ज्यादा है.

नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं लोग
जिस समय न्यूजीलैंड में कोरोना संक्रमितों की संख्या 102 पर पहुंची वहां तभी से एहतियात बरतने व कड़े कदम उठाने प्रारम्भ कर दिए. जबकि हिंदुस्तान में 175 मुद्दे सामने आने के बाद कड़े कदम उठाए गए. कई जगहों पर धारा 144 लागू की गई तो 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया गया. दोनों राष्ट्रों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह देखने को मिला कि जहां न्यूजीलैंड के लोगों ने आइसोलेशन को समझा व लॉकडाउन को गंभीरता से लिया वहीं हिंदुस्तान में ऐसा कम ही नजर आया. लोग आज भी लॉकडाउन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. जबकि उन्हें बार-बार सामाजिक दूरी के बारे में बताया जा रहा है कि कोरोना को रोकने का यही तरीका है. देशभर में जगह-जगह लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले लोग सामने आ रहे हैं. 

तब्लीगी जमात ने भी बढ़ाई संख्या
हिंदुस्तान में कोरोना संक्रमितों की संख्या में आई तेजी का एक कारण तब्लीगी जमात भी है. स्वास्थ्य मंत्रालय का भी बोलना है कि देश के कुल कोरोना मरीजों की संख्या में 30 से 35 प्रतिशत का सहयोग तब्लीगी जमात का है. वहीं न्यूजीलैंड में ऐसा कोई मुद्दा सामने नहीं आया. हिंदुस्तान में जहां अब तक 199 लोगों की मृत्यु हो चुकी है वहीं न्यूजीलैंड में केवल दो लोगों की जान गई है.