टखने की चोट के बावजूद खेलते रहे प्रणय

टखने की चोट के बावजूद खेलते रहे प्रणय

विस्तार भारतीय बैडमिंटन टीम पहली बार थॉमस कप के फाइनल में पहुंची है. सेमीफाइनल में डेनमार्क के विरूद्ध टीम इण्डिया ने बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया. पहले मैच हारने के बाद भारतीय टीम ने 3-2 से बहुत बढ़िया जीत दर्ज की और प्रतियोगिता में अपना पदक पक्का कर लिया. अब हिंदुस्तान को कम से कम रजत पदक जरूर मिलेगा. इस मैच में हिंदुस्तान के एच एस प्रणय ने सभी का दिल जीत लिया. न्यायालय में चोटिल होने के बावजूद प्रणय ने हार नहीं मानी और दर्द के साथ खेलते रहे. अंत में उन्होंने जीत हासिल की और अपने राष्ट्र को भी फाइनल में पहुंचाया

अपने करियर की सबसे यादगार जीत दर्ज करने के बाद प्रणय ने बोला कि किसी भी हालात में हार न मानने की मानसिकता ने उन्हें थॉमस कप सेमीफाइनल में डेनमार्क पर बहुत बढ़िया जीत के दौरान प्रेरित किया. दुनिया के 13वें नंबर के खिलाड़ी रास्मस गेमके के विरूद्ध प्रणय को न्यायालय पर फिसलने के कारण टखने में चोट भी लगी लेकिन इस भारतीय ने ‘मेडिकल टाइमआउट’ लेने के बाद मुकाबला जारी रखा.

वह न्यायालय पर दर्द में दिख रहे थे लेकिन इस कठिनाई के बावजूद उन्होंने 13-21 21-9 21-12 से जीत दर्ज कर हिंदुस्तान का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया

 दूसरे सेट के दौरान कम हुआ दर्द
प्रणय ने मुकाबले के बाद कहा, ‘‘मानसिक रूप से मेरे दिमाग में बहुत सी बातें चल रही थीं. फिसलने के बाद मुझे सामान्य से अधिक दर्द महसूस हो रहा था और मैं ठीक से चल भी नहीं कर पा रहा था. मैं सोच रहा था कि ऐसी स्थिति में क्या करना है. मेरे दिमाग में हार नहीं मानने की बात चल रही थी, मैं  बस प्रयास करके देखना चाहता था कि चीजें कैसी चल रही है. मैं प्रार्थना कर रहा था कि दर्द न बढ़े. मेरा दर्द दूसरे गेम के दौरान कम होने लगा था और तीसरे गेम के दौरान मैं काफी बेहतर महसूस कर रहा था.’’

काम आई दबाव बनाने की रणनीति
भारतीय टीम 1979 के बाद से कभी भी सेमीफाइनल से आगे नहीं बढ़ सकी थी. लेकिन उसने जुझारू जज्बा दिखाते हुए 2016 के चैम्पियन डेनमार्क को हरा दिया. प्रणय ने बोला कि मेडिकल टाइमआउट के बाद न्यायालय में जाकर उनकी योजना अपने प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाए रखने की थी और इसने उनके पक्ष में काम किया. उन्होंने कहा, ‘‘हमने दूसरे और तीसरे गेम में जिस रणनीति का इस्तेमाल किया, वह बहुत जरूरी था. रणनीति दबाव बनाए रखने की थी और मुझे पता था कि यदि मैं दूसरे हाफ में अच्छी बढ़त बनाता हूं तो मुकाबले में बने रहने का एक और मौका मिलेगा.’’

विश्व चैम्पियनशिप के रजत पदक विजेता किदाम्बी श्रीकांत तथा सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की दुनिया की आठवें नंबर की युगल जोड़ी ने हिंदुस्तान को फाइनल की दौड़ में बनाये रखा लेकिन 2-2 की बराबरी के बाद एच एस प्रणय ने टीम को इतिहास रचने में सहायता की.

0-1 से पिछड़ने के बाद जीता भारत 
विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले लक्ष्य सेन के विक्टर एक्सेलसेन से हारने के बाद भारतीय टीम 0-1 से पिछड़ रही थी. रंकीरेड्डी और शेट्टी ने पहले युगल मुकाबले में जीत हासिल की. भारतीय जोड़ी ने दूसरे मैच में किम अस्ट्रूप और माथियास क्रिस्टियनसेन को 21-18 21-23 22-20 से हराकर हिंदुस्तान को 1-1 की बराबरी पर ला दिया.

शेट्टी ने कहा, ‘‘ जब हम तीसरे गेम में पिछड़ रहे थे तब मुझे लगा था कि हमारा यात्रा यहीं समाप्त हो जायेगा. हमारी किस्मत अच्छी थी कि हमें लय मिल गई. छठे मैच प्वाइंट पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं. फिर मैंने हौसला जुटाकर फ्लिक सर्विस की और यह काम कर गया.’’ भारतीय टीम रविवार को फाइनल में 14 बार के चैम्पियन इंडोनेशिया से भिड़ेगी.


घूस लेकर चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

घूस लेकर चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

सीबीआई ने पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम के बेटे और कांग्रेस पार्टी सांसद कार्ति चिदंबरम के विरूद्ध एक और मामला दर्ज कर उनके करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की ये छापेमारी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कर्नाटक, पंजाब और ओडिशा में की गई है सीबीआई ने कार्ति चिंदबरम और दूसरे आरोपियों के विरूद्ध जो मामला दर्ज किया है उसमें आरोप है कि कार्ति ने 50 लाख रुपये घूस लेकर गृह मंत्रालय से चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाया हैय

चीनी नागरिकों को दिलवाया वीजा

सीबीआई में दर्ज मुद्दे के अनुसार पंजाब के मानसा में तलवंडी साबो पावर प्लांट लग रहा था इस थर्मल पावर प्लांट की क्षमता 1980 मेगा वॉट थी जिसे लगाने का जिम्मा चीन की Shandong Electric Power Construction Corp (SEPCO) को दिया गया था

यही वजह थी कि इस प्लांट को लगाने के लिये चीन के इंजीनियरों को प्रोजेक्ट वीजा दिया गया था लेकिन काम में देरी के चलते कंपनी को अधिक चीनी इंजीनियरों की आवश्यकता थी जिसके लिये वे वीजा स्वीकृति चाहिये थे क्योंकि इससे पहले जो प्रोजेक्ट वीजा दिये गये थे वो तय समय से अधिक हो चुके थे और फिर से वीजा के लिये गृह मंत्रालय से स्वीकृति महत्वपूर्ण थी

एक कपंनी के जरिए 50 लाख की घूस

इसके लिये पावर प्लांट ने कार्ति चिंदबरम को संपर्क किया और फिर 50 लाख रुपयों के बदले कार्ति चिदंबरम ने गृह मंत्रालय से 263 Re-use प्रोजेक्ट वीजा की स्वीकृति दिलवाई ध्यान देने वाली बात ये है कि वर्ष 2011 में जब ये स्वीकृति दिलवाई गई उस दौरान कार्ति के पिता पी चिदंबरम राष्ट्र के गृहमंत्री थे  

एजेंसी के अनुसार चीनी इंजीनियरों को वीजा दिलाने के बदले जो 50 लाख की घूस दी गई थी वो मुंबई की एक कंपनी M/s Bell Tools Ltd के जरिये दी गई थी कार्ति की कंपनी ने कंस्लटेंसी के नाम पर फर्जी बिल इस कंपनी के नाम बनाया जिसके बदले ये रिशवत दी गई