BCCI ने सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश को स्पष्ट करने का किया अनुरोध

BCCI ने सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश को स्पष्ट करने का किया अनुरोध

नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च क्रिकेट संस्था में चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध ने सर्वोच्च न्यायालय से प्रदेश संघों के चुनाव को लेकर दिए गए उसके आदेश को लेकर स्थिति साफ करने की अपील की है। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तमिल नाडु क्रिकेट संघ (TNCA) को चुनाव कराने की इजाजत दे दी थी।

क्या अपील की है सीओए ने
सीओए ने अपनी अपील में बोला है, "सीओए सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश को लेकर स्थिति साफ करना चाहती है जिसमें उसने याचिकाकर्ता - तमिलनाडु क्रिकेट संघ (टीएनसीए)- को सहायक सचिव के पद के लिए चुनाव कराने को बोला है। वहीं सीओए ने इस आदेश पर भी स्पष्टता की मांग की है जिसमें इस बात का आदेश दिया गया है कि अयोग्य सिर्फ वही लोग होंगे प्रदेश संघ के ऑफिसर रह चुके हैं। उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई को 22 अक्टूबर तक होने तय हैं व सीओए को उम्मीद है कि ये चुनाव समय से हो जाएंगे।

पिछले आदेशों का उल्लंघन कर रहा है यह फैसला
यह निर्णय गलती से आपके 18 जुलाई 2016 व नौ अगस्त 2018 के आदेश का उल्लंघन कर रहा है।सीओए ने अपनी अपील में यह भी बताया है कि टीएनसीए व हरियाणा प्रदेश क्रिकेट संघ ने जानबूझकर बीसीसीआई के नए संविधान को अपनाया नहीं है। सीओए ने बोला है कि शुक्रवार को जो आदेश दिया गया है उसे साफ किया जाए या बदला जाए ताकि टीएनसीए के चुनाव बीसीसीआई के सविंधान से मान्यता प्राप्त सिर्फ पांच पदों के लिए ही कराए जाएं।

यह है सीओए की मजबूरी
एक ऑफिसर ने बोला कि यह सीओए की तरफ से अपने आप को ऑफिस में बनाए रखने का यह आखिरी मौका है। ऑफिसर ने कहा, "वे अपने कार्यकाल को बढ़ाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं।सीओए की तरफ से दाखिल की गई अपील बताती है कि हम लोग जो इतने लंबे समय से कह रहे थे वो हकीकत है कि सीओए अपने पदों पर बने रहना चाहती है क्योंकि उनके पास कोई व कार्य नहीं है। "

सीओए ने व्यक्तिगत लड़ाई बना ली है
ऑफिसर ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय का आदेश कांच की तरह साफ है व इसलिए ही सीओए व उनके एडवोकेट इस पर संशय पैदा नहीं कर पा रहे हैं। इससे पहले भी सीओए न्यायालय के नौ प्लस नौ के आदेश को गलत ढंग से पेश कर चुका है तब न्यायालय ने बोला था कि आदेश पूरी तरह से साफ है। " प्रदेश संघ के एक ऑफिसर ने भी इस बात पर हामी भरते हुए कहा, "यह साफ बताता है कि सीओए ने इसे व्यक्तिगत लड़ाई बना ली है व न्यायालय के आदेश को पर्सनल तौर पर ले लिया है। "