अधिकांश लोग होते है इसके शिकार, ऑटोइम्म्युने डिजीज के लक्षण

अधिकांश लोग होते है इसके शिकार, ऑटोइम्म्युने डिजीज के लक्षण

आज हम आपकेसाथ शेयर करने जा रहे है एक ऐसी बीमारी के बारे में जो गुपचुप ढंग से आपके शरीर में बैठी है जी हाँऑटोइम्यून डीजिज तब होती है जब शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली आपके खुद के कोशिकाओं व विदेशी कोशिकाओं के बीच अंतर नहीं बता सकती है, जिससे शरीर सामान्य कोशिकाओं पर गलती से हमला कर सकता है. 80 से अधिक प्रकार के ऑटोइम्यून डीजिज हैं जो शरीर के अंगों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित करते हैं. गतिविधि पर इम्यून सिस्टम के मामलों में, शरीर अपने खुद के ऊतकों (ऑटोइम्यून डीजिज) पर हमला करता है व नुकसान पहुंचाता है.ऑटोइम्यून डीजिज के लिए इलाज आमतौर पर इम्यून सिस्टम की गतिविधि को कम करने पर केंद्रित है.Image result for ऑटोइम्म्युने डिजीज के लक्षण

ये सबसे आम ऑटोइम्यून डीजिज हैं:

– रूमेटाइड अर्थराइटिस, का एक रूप है जो जोड़ों पर हमला करता है.

– सोरायसिस, स्कीन की मोटी, पपड़ीदार पैच द्वारा चिह्नित एक स्थिति.

सोरायटिक अर्थराइटिस, एक प्रकार का गठिया जो कुछ लोगों को सोरायसिस से प्रभावित करता है.

– ल्यूपस, एक बीमारी जो शरीर के क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाती है जिसमें जोड़ों, स्कीन व अंग शामिल होते हैं.

– ग्रेव्स डीजिज सहित थायरॉइड डीजिज, जहां शरीर बहुत अधिक थायरॉइड हार्मोन (हाइपरथायरायडिज्म) बनाता है, व हाशिमोटो का थायरॉयडिटिस, जहां यह हार्मोन का पर्याप्त (हाइपोथायरायडिज्म) नहीं बनाता है.

इसमें कुछ ख़ास जटिलताए भी पाई जाती है जैसे किआनुवांशिकी(जेनेटिक):कुछ विकार जैसे ल्यूपस व मल्टीपल स्केलेरोसिस(एमएस) परिवारों के चलते होता है. “ऐसे सम्बन्धी जिन्हें ऑटोइम्यून डीजिज हो, वैसे में आपका जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कुछ के लिए एक बीमारी विकसित करेंगे.अधिक वजन या फैट की चर्बी होने के कारण गठिया या सोरियाटिक अर्थराइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए होने कि सम्भावना है क्योंकि अधिक वजन जोड़ों पर अधिक दबाव डालता है या वसा ऊतक सूजन को प्रोत्साहित करने वाले पदार्थ बनाता है.