मानसिक रूप से कमजोर करती है नींद की गोलियां

मानसिक रूप से कमजोर करती है नींद की गोलियां

नई दिल्ली: वह ठीक से सो भी नहीं पाता है| इस तरह की परिस्थितियों में नींद की गोली ली जा सकती हैं| लेकिन चार -पांच हफ्ते से ज्यादा समय तक इन दवाओं के सेवन के घातक परिणाम भी सामने आ सकते हैं|संबंधित इमेज

बीते अप्रैल में ही अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने नींद आने के लिए ली जाने वाली कई दवाओं जैसे कि जॉल्पिडम, जेलप्लोन आदि को लेकर चेतावनी जारी की थी| एफडीए ने नींद में चलने व गाड़ी चलाने के कारण हुई दुर्घटनाओं के बाद यह कदम उठाया था|

लंबे समय तक रहता है दवा का असर
पिछले साल जुलाई में जार्जिया में एक महिला को गलत दिशा से गाड़ी चलाने के लिए गिरफ्तार किया गया था| पूछताछ के दौरान उसने कहा था कि उसे नहीं पता, वह उल्टी तरफ कैसे पहुंचीं| उसने शराब भी नहीं पी रखी थी, इसलिए पुलिस ने उसके नशे में होने की बात खारिज कर दी| बाद में पता चला कि उसने नींद की गोली ली थी| दरअसल, नींद की दवाओं का असर घंटों रहता है| इस कारण कई बार व्यक्ति जगने के बाद भी पूरे तरह अपने होश में नहीं रहता है| इन दवाओं से नींद में चलने की बीमारी भी बढ़ती है| साथ ही व्यक्ति की मानसिक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है|

नींद नहीं आने का कारण तलाशें
सेंट लुइस यूनिवर्सिटी के डॉ. जूली के गमाक का कहना है कि नींद की गोली लेना किसी भी तरह से सही नहीं है| अगर व्यक्ति लंबे समय से अनिद्रा का सामना कर रहा है तो पहले उसे इसका कारण जानना चाहिए| यदि कोई चिकित्सकीय कारण है तो पहले उसका इलाज किया जाना जरूरी है| इससे भी काम न चले तो मनोरोग विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा सकती है| इन सबके अलावा अच्छी नींद के लिए सेहतमंद जीवनशैली अपनाना भी जरूरी है|