गर्मी में आंखों को बताएं कन्जंक्टिवाइटिस, जानें

गर्मी में आंखों को बताएं कन्जंक्टिवाइटिस, जानें

आंखों की आम समस्या है कन्जंक्टिवाइटिस, जिस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं. आंखों की इस समस्या से कैसे बचे रह सकते हैं व इसकी चपेट में आ जाएं, तो किन बातों पर ध्यान दें, जानकारी देता आलेख.

गर्मी का मौसम अपने साथ कई समस्याएं लेकर आता है, जिनमें आंखों की समस्याएं भी शामिल हैं.इसमें कन्जंक्टिवाइटिस की समस्या प्रमुख है. यह समस्या गर्मियों के मौसम में बहुत आम होती है.ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि तापमान में वृद्धि होने के कारण वायरस को फैलने का आदर्श वातावरण मिल जाता है. कन्जंक्टिवाइटिस या ‘पिंक आई’ आंखों की सबसे आम समस्या है, जो हर आयु के लोगों को प्रभावित करती है. यह आंख के कंजक्टिवा की सूजन है. कंजक्टिवा पलकों व आंख के अंदर के सफेद हिस्से को कवर करने वाली स्पष्ट, पारदर्शी व पतली परत है. जब कोई वस्तु इस परत को परेशान करती है, तो आंखों में लाली व सूजन आ जाती है.

क्या हैं इसके कारण
इस परत में जलन का सबसे आम कारण पर्यावरण से एलर्जी है, जिसमें वायु प्रदूषण, धूम्रपान व पेड़ और घास के पराग कण शामिल हैं. अन्य सामान्य कारणों में परफ्यूम, कॉस्मेटिक व आई मेकअप शामिल हैं. इनके परिणामस्वरूप कन्जंक्टिवाइटिस होता है, जिसे एलर्जी कन्जंक्टिवाइटिस भी कहते हैं.
हमारे शहर में निर्माण काम से आने वाली धूल भी एलर्जी कन्जंक्टिवाइटिस का एक प्रमुख कारण है.कुछ मामलों में, रात भर एक बंद कमरे में मच्छर भगाने वाले लिक्विड का उपयोग एलर्जी व पलकों में सूजन पैदा कर सकता है. एलर्जी कन्जंक्टिवाइटिस परेशान करने वाला होने कि सम्भावना है, लेकिन यह आपकी दृष्टि को तब तक नुकसान नहीं पहुंचाता, जब तक इसके लक्षण बहुत गंभीर न हो जाएं.संक्रामक कन्जंक्टिवाइटिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता होती है, क्योंकि लक्षण के गंभीर हो जाने पर उपचार कठिन होने कि सम्भावना है.

बरतें सावधानी
जब आदमी आंखों को मलता है, तो कीटाणु उसके हाथ में आ जाते हैं व जब कोई उससे हाथ मिलाए या कुछ शेयर करे, तो कीटाणु दूसरे आदमी तक पहुंच जाते हैं. यह कीटाणु तौलिया शेयर करने या दरवाजे के हैंडल को छूने से भी फैल सकते हैं, क्योंकि दूसरे आदमी के उन चीजों या जगहों के सम्पर्कमें आने से कीटाणु उन तक पहुंच जाते हैं व फिर उनकी आंखों तक चले जाते हैं. कंप्यूटर का की-बोर्ड भी इसे फैलाने में बड़ा कारण साबित होता है. इसलिए सबसे जरूरी है सावधानी. अपने हाथों से आंखों को न छुएं व न मलें, साथ ही अपने हाथ बार-बार साफ करते रहें. आप हैंड सैनिटाइजर का भी प्रयोगकर सकते हैं.

क्या हैं उपचार
आंखों को ठंडे पानी में भीगे कपड़े की मदद से धोएं. आमतौर पर तब तक कॉन्टैक्ट लेंस नहीं पहनना चाहिए, जब तक इसके लक्षण दूर नहीं हो जाते या किसी भी आई ड्रॉप व ऑइंटमेंट की अंतिम खुराक के बाद 24 घंटे नहीं हो जाते.

जब दिखे आंखों में लाली
आंखों में एक बार लाली नजर आने पर सबसे पहले अपने हाथ, चेहरे व आंखों को साफ पानी से धोएं.कुछ घंटे में आंखों की लाली कम हो जाती है, तो उम्मीद कर सकते हैं कि यह अपने आप अच्छा हो जाएगी. लेकिन आंख में जलन हो, तो कोई लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप ही लक्षणों को कम करने में मदद करता है. आवश्यकता लगे, तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क करें.