MV एक्ट में जुर्माने की रकम गुजरात में घटी

MV एक्ट में जुर्माने की रकम गुजरात में घटी

(New Motor Vehicle Act) को लेकर देश के कई राज्यों में टकराव जैसी स्थिति बन गई है व राज्यों का आरोप है कि केन्द्र ने आम आदमी पर लाद दिया है। गत मंगलवार को ही गुजरात (Gujarat Government) ने केन्द्र की दी हुई व्यवस्था को बदलते हुए तक कर दिया, जिसके बाद केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने नाराज़गी भी ज़ाहिर की। लेकिन सिर्फ गुजरात ही ऐसा प्रदेश नहीं है, जो केन्द्र के इस नए एक्ट के विरूद्ध जा रहा है बल्कि व भी कई प्रदेश इस एक्ट को लेकर असंतुष्ट हैं।

केन्द्र सरकार (Central Government) ने नए मोटर व्हीकल संशोधन एक्ट 2019 में कई प्रावधान करते हुए ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) के उल्लंघन पर जुर्माने की रकम दस गुना या उससे ज़्यादा तक बढ़ा दी व यह व्यवस्था 1 सितंबर से लागू करने के आदेश दे दिए गए। इस एक्ट को समझने के लिए कई राज्यों ने कमेटियां (Analysis Committees) बनाकर इसमें संशोधन की गुंजाइश निकालने की कवायद प्रारम्भ कर दी। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार जानें कि कौन से प्रदेश में इस एक्ट को लेकर किस तरह का असंतोष बना हुआ है।

गुजरात: जुर्माना घटाने की पहल
केन्द्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट में भारी जुर्माने की रकम को 90 प्रतिशत तक घटा देने वाला पहला प्रदेश गुजरात बना, जिसने औपचारिक तौर पर मंगलवार को यह घोषणा की। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटी हुई कीमतों की जानकारी दी व बोला कि केन्द्र द्वारा तय जुर्माने को घटाने के बावजूद ये रकम भी प्रदेश में अब तक चल रहे जुर्माने से करीब दस गुना तक ज़्यादा होगी।'मोदी के प्रदेश' व बीजेपी के सबसे मज़बूत गढ़ माने जाने वाले प्रदेश में सबसे पहले इस तरह की घोषणा ने कई तरह की चर्चाएं छेड़ दी हैं।

मप्र : मंत्री ने बोला 'स्विच ऑफ करना पड़ेगा फोन'
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी सरकार ने इस एक्ट के आते ही रिएक्शन देते हुए बोला कि पहले प्रदेश में इस एक्ट को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा व उसके बाद ही ये व्यवस्था लागू की जाएगी।एशियन एज की समाचार के मुताबिक प्रदेश के विधायी मामलों के मंत्री पीसी शर्मा ने बोला था कि जब 250 से 500 रुपये तक का जुर्माना था तब उनके पास मदद मांगने वालों के 20 से 25 फोन आते थे, अब जुर्माना 5 हज़ार का होगा तो उन्हें तो अपना फोन बंद ही रखना पड़ेगा। वहीं, प्रदेश परिवहन मंत्री ने बोला कि जुर्मानों के बारे में अध्ययन के लिए कमेटी बना दी गई है।

ओडिशा: केन्द्र से की जाएगी बातचीत
सीएम नवीन पटनायक ने पुलिस को आदेश दिए कि तीन महीनों तक जुर्माने की इस व्यवस्था को प्रदेश में सख़्ती से लागू न किया जाए। अस्ल में, इस नियम के लागू होने के दो दिनों के भीतर ही भुबनेश्वर में लोगों व पुलिस के बीच प्रयत्न की स्थिति बन गई थी। वहीं, प्रदेश सरकार ने जुर्माने की रकम में संशोधन के लिए केन्द्र सरकार के साथ वार्ता करने की बात भी कही।

छग: वैसे होल्ड पर है एक्ट
प्रदेश की कांग्रेस पार्टी सरकार ने भी नए एक्ट के प्रावधान वैसे लागू नहीं किए हैं। प्रदेश के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने बोला कि प्रदेश सरकार देख रही है कि इस एक्ट को किस तरह लागू किया जा सकता है व इसमें प्रदेश सरकार किस तरह कितने संशोधन कर सकती है।

पंजाब: अभी पुरानी व्यवस्था ही
पंजाब की ट्रांसपोर्ट मंत्री रज़िया सुल्ताना के हवाले से एक समाचार में बोला गया 'इस बात से मना नहीं कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जान पर बन आती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि नागरिकों को भारी जुर्मानों के बोझ तले दबा दिया जाए। कुछ समय के लिए पंजाब में पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी व नए एक्ट को समझने के बाद ही इसे लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा'।

राजस्थान: 'जुर्माना इतना हो कि लोग चुका सकें'
कांग्रेस पार्टी की सरकार वाले इस प्रदेश में भी इस बात की गुंजाइश तलाशी जा रही है कि वजनदारजुर्मानों को किस तरह घटाया जा सकता है। प्रदेश के ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सिंह ने जुर्माने की इस व्यवस्था को 'उतावलापन' करार देकर बोला कि जुर्माने इस तरह के होने चाहिए, जिनसे जनता में भयहो लेकिन वो चुका भी सके।

प​। बंगाल: 'हमें केन्द्र से इत्तेफाक नहीं'
टीएमसी व ममता बनर्जी की प्रदेश सरकार ने इस एक्ट को मानने से इन्कार करते हुए बोला कि प्रदेशसरकार इस तरह के जुर्माने की व्यवस्था से इत्तेफाक नहीं रखती इसलिए प्रदेश में ये व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी। प्रदेश सरकार ने इस बारे में केन्द्र से वार्ता करने की बात भी कही व कोई बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद जताई।

दक्षिणी राज्य: तीन राज्यों ने बोला 'अभी नहीं'
केरल की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने राज्यों से सलाह मशवरा किए बगैर यह व्यवस्था थोप दी जबकि सीपीआईएम ने बोला कि इस तरह के जुर्माने 'अवैज्ञानिक' हैं व इनसे सिर्फ करप्शन बढ़ेगा। पुडुचेरी मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने बोला कि पहले इस एक्ट को लेकर जागरूकता फैलाई जाएगी, फिर इसे लागू किया जाएगा। तेलंगाना ने एक कमेटी बनाकर इस एक्ट में फेरबदल की गुंजाइशें तलाशने की कवायद की है व कमेटी की सिफारिशें मुख्यमंत्री की मंज़ूरी के लिए भेजी जाएंगी। तब तक नया एक्ट लागू नहीं होगा। हालांकि पुलिस ने इस एक्ट को लेकर जागरूकता अभियान प्रारम्भ कर दिया है।

दिल्ली: 'हम देखेंगे, दूसरे प्रदेश क्या कर रहे हैं'
पर शुरूआती रिएक्शन देते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बोला था 'राज्य को अधिकार नहीं है कि वह केन्द्र के नियम में परिवर्तन कर सके लेकिन दूसरे प्रदेश ऐसा कैसे कर पा रहे हैं, इसके लिए हमारी सरकार अध्ययन कर रही है'। ये कहने के साथ ही केजरीवाल सरकार ने साफ किया कि वैसेनया एक्ट लागू नहीं किया जा रहा है।