अपने हुनर से दे रहे जिंदादिली का संदेश, इन्हें डिसएबिलिटी है तो क्या

अपने हुनर से दे रहे जिंदादिली का संदेश, इन्हें डिसएबिलिटी है तो क्या

शारीरिक रूप से किसी भी तरह की विकलांगता अक्सर हमें निराश व अकेला कर देती है. लेकिन अगर उदार व सकारात्मक नजरिए वाले शुभचिंतक आपके आसपास हों तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है. दरअसल, शारीरिक रूप से अक्षम या विशेष योग्यजन एवं दिव्यांगों को ठीक दिशा दिखाने की जरुरत है, रासता वे खुद बना लेते हैं. अच्छी बात यह है कि अब खुद दिव्यांग वविशेष योग्यजन पहल करते हुए ऐसी गतिविधियों का भाग बन रहे हैं जो उनके जैसे अन्य लोगों को गुमनामी व निराशा से निकालकर आगे आने को प्रेरित कर रहा है.

टॉप मॉडल-वी-लॉगर हैं जेसिका
29 वर्षीय जेसिका केलग्रेन-फोजर्ड ने 2011 में यू-ट्यूब चैनल प्रारम्भ किया. उन्होंने इस पर अपनी डिस्एबिलिटीज के बारे में लोगों को बताने के साथ ही उन्हें इससे मुकाबला करने व लोगों को प्रेरित भी किया. वे मूक-बधिर होने के साथ ही सेरेब्रल पाल्सी जैसे अनुवांशिक विकार से ग्रसित हैं. बावजूद इसके आज वे सफलतम यू-ट्यूब वीलॉगर हैं. वे अपने चैनल पर डिसेबिलिटी को भुलाकर लोगों को अपनी प्रतिभा तराशने व खूबी को सामने लाने के लिए प्रेरित करती हैं. उन्हें चीनी, आटे व लैक्टोज से भी एलर्जी है इसके बावजूद वे अपने चैनल पर नई-नई रेसिपीज बनाकर दिखाती हैं. उनके मेकअप ट्यूटोरियल्स कितने पसंद किए जाते हैं इसका अंदाजा इस बात से लगा लें कि वे एक टॉप मॉडल भी हैं. उनके चैनल के 3 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं.

ऑटिज्म के बारे में बतातीं हैं शेबर
ऐसे ही 26 वर्षीय एमीथेस्ट शेबर अपने यू-ट्यूब चैनल न्यूरो वंडरफुल-आस्क ए ऑटिस्टिक पर ऑटिज्म के बारे में लोगों को जागरुक करने का कार्य करती है. उनके चैनल के भी 1 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं. शेबर का बोलना है कि जब उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके बारे में इंटरनेट से जानकारी जुटानी चाही लेकिन वहां जो जानकारी थी वह नाकाफी व बहुत ज्यादाभ्र्रामक थी. इसलिए उन्होंने इसके बारे में लोगों को जागरुक करने व ऑटिज्म के बारे में ठीकजानकारी देने के मकसद से अपना चैनल प्रारम्भ किया. उनका बोलना था कि जो जानकारी दी गई थी वह भी बहुत ज्यादा निगेटिव ढंग से प्रस्तुत की गई थी जिससे यह बीमारी बहुत ज्यादा डरावनी प्रतीत हो रही थी. इस भ्रांति को भी वे दूर करना चाहती थीं. उनके चैनल पर कोई भी उनसे ऑटिज्म व इससे जुड़े सवाल पूछ सकता है.

दृष्टिहीनता पर बदला नजरिया
टॉमी एडिसन एक्सपीरिएंस यू-ट्यूब चैनल चलाने वाले 56 वर्षीय टॉमी जन्मांध थे. लेकिन उन्होंने लोगों का नजरिया बदलने के लिए अपने चैनल के जरिए वीडियो पोस्ट करने प्रारम्भ किए. देखते ही देखते उनके र्चैनल पर 6.5 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर उनसे दृष्टिहीनता के बारे में सवाल पूछ ते व वे सारेतर्क व विस्तृत ब्यौरे के साथ उनके जवाब देते. एडिसन का बोलना है कि जहां तक उनकी जानकारी है वे पहले दिव्यांग यू-ट्यूबर थे. उन्होंने बताया कि यह चैनल प्रारम्भ करने का आइडिया उन्हें तब आया जब ज्यादातर लोग उनसे एक ही तरह का सवाल करने लगे कि वे रोजमर्रा के कामों को बिना देखे कैसे कर पाते हैं? लॉस एंजेल्स में रहने वाले एडिसन एक मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं. वे अपनी सफलता का श्रेय सोशल मीडिया व वीडियो ब्लॉगिंग को देते हैं जिसके जरिए उन्होंने दिव्यांगों की समस्याओं से न केवल लोगों को रुबरु करवाया बल्कि उसके बारे में एक सकारात्मक नजरिया भी विकसित किया जो दया या सहानुभूति से बिल्कुल अलग था. यूट-यूब के 100 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हैं लेकिन कंपनी कंटेंट जेनेरेट करने वाले लोगों के नाम उजागर नहीं करती.

दुर्लभ बीमारी, नहीं मानी हार
14 वर्ष की रूबी अर्डोल्फ अपना एक यूट्यूब चैनल चलाती हैं. इसमें वे एक किशोर के प्रतिदिन की दिनचर्या के बारे में बताती हैं. लेकिन वे सामान्य यूट्यूबर नहीं हैं. उन्हें स्ट्रोमी सिंड्रोम नामक अनुवांशिक बीमारी है जो संसार में प्रत्येक 12 में से एक आदमी को होती है. इसके चलते उनके मस्तिष्क व देखने की क्षमता नष्ट हो गई है वहीं शरीर की गतिविधि भी बहुत धीरे हैं. लेकिन इन सबके बावजूद उन्होंने पराजय नहीं मानी व अपने यू-ट्यूब चैनल के जरिए वे अपने जैसे अन्य लोगों को प्रेरित करती हैं. वे उन्हें रोजमर्रा के कामों को करने के आसान तरीके, स्पेशल किड्स के लिए खास किताबों, चैनल व टीवी प्रोग्राम्स के बारे में बताती हैं. उनके यू-ट्यूब चैनल के 10 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं.वहीं उनके इंटर एबल्ड कपल चैनल के 4.5 लाख सब्सक्राइबर हैं. रुबी की मां एंजी कहती हैं कि वे अपनी बेटी को इसके लिए प्रेरित करती हें ताकि उनके जैसे अन्य मां5बाप भी अपने बच्चों को आगे बढऩे में मदद कर सकें. रुबी के घरवालों का बोलना है कि उन्हें भी इस चैनल के कारण लोगों का भरपूर योगदान व प्यार मिला है. साथ ही उनके जैसे ही अन्य लोगों को भी फायदा पहुंचा है.