सबसे खतरनाक है हेपेटाइटिस-सी, जानें

सबसे खतरनाक है हेपेटाइटिस-सी, जानें

अभी तक बाजार में केवल हेपेटाइटिस-बी के लिए ही ओरल (खाने वाली) दवा मिल रही थी जबकि हेपेटाइटिस-सी का उपचार इंजेक्शन से होता था. लेकिन अब हेपेटाइटिस-सी की ओरल दवा भी बाजार में आ चुकी है. यह इंजेक्शन की तुलना में न सिर्फ सस्ती है बल्कि 90% तक अच्छा भी.हेपेटाइटिस-सी के लिए अभी तक टेग्लो इंटरफेरॉन इंजेक्शन देते थे. जिससे हेपेटाइटिस-सी को अच्छा होने में 12-15 माह का समय लगता था व महज 50-60मरीज ही अच्छा हो पाते थे. लेकिन नयीओरल दवा में सोफोसबुबीर और डेक्लेटासोविर शामिल हैं जिसे डॉक्टरी सलाह से एक गोली रोज लेनी होती है. साथ ही नब्बे फीसदी मरीज सिर्फ 12 सप्ताह में अच्छा हो जाते हैं. यह पुरानी दवा के मुकाबले 90 प्रतिशत सस्ती है.

इस रोग के पांच वायरस लिवर के दुश्मन-

हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ा रोग है जो वायरल इंफेक्शन से होता है. इस अवस्था में लिवर में सूजन औरजलन की समस्या होती है. इसके लिए पांच तरह (ए, बी, सी, डी व ई) के हेपेटाइटिस वायरस जिम्मेदार होते हैं. इनमें टाइप-बी और सी खतरनाक रूप लेकर लिवर सिरोसिस व कैंसर को जन्म देते हैं.

हेपेटाइटिस-ए -
यह वायरस दूषित भोजन व पानी से शरीर में फैलता है. लिवर और हाथ-पैरों में सूजन, भूख न लगना, बुखार, उल्टी और जोड़ों में दर्द रहता है.

हेपेटाइटिस-बी-
यह वायरस संक्रमित रक्त, थूक या यूरिन के जरिए फैलता है. लिवर पर प्रभाव होने से रोगी को उल्टी, थकान, पेटदर्द, स्कीन का रंग पीला होने जैसी दिक्कतें होती हैं. यह लिवर का क्रॉनिक रोग है जो लिवर सिरोसिस और कैंसर का रूप ले लेता है.

हेपेटाइटिस-सी-
हेपेटाइटिस-ए और बी की तुलना में यह वायरस ज्यादा खतरनाक है. शरीर पर टैटू गुदवाने, दूषित रक्त चढ़वाने, संक्रमित सुई के इस्तेमाल या दूसरे के शेविंग किट के प्रयोग से यह फैलता है. इसके लक्षण गंभीर अवस्था में कुछ समय बाद ही दिखाई देते हैं.

हेपेटाइटिस-डी-
हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीजों में इसकी संभावना ज्यादा होती है. लिवर में संक्रमण से उल्टी वहल्का बुखार आता है.

हेपेटाइटिस-ई-
यह वायरस दूषित खानपान से फैलता है. हिंदुस्तान में इसके केस बहुत ज्यादा कम होते हैं. इससे प्रभावित होने पर मरीज को थकान, वजन घटने, स्कीन पर पीलापन व हल्का बुखार आता है.

सेहत पर प्रभाव -
जांचें: कुछ कॉमन लक्षण जैसे लिवर का आकार बढऩे, स्कीन की रंगत में पीलापन, पेट में पानी होने वशारीरिक बदलावों को देखकर लिवर फंक्शन टैस्ट, पेट का अल्ट्रासाउंड और लिवर बायोप्सी कराने की सलाह दी जाती है.
इलाज: एक्यूट स्थिति कुछ दिनों में सावधानी बरतकर स्थिति सामान्य हो जाती है. लेकिन यदि अवस्था गंभीर हो तो दवाएं देते हैं. लिवर को यदि क्षति पहुंची है तो लिवर ट्रांसप्लांट भी करते हैं.
बचाव: घर और आसपास गंदगी न फैलने दें. बच्चों और बड़ों का टीकाकरण जरूर करवाएं. शराब वधूम्रपान से दूरी बनाएं. प्रभावित व्यक्तिकारेजर प्रयोग न करें.