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युवराज के बाद इस भारतीय ओपनर को भी हुआ कैंसर, हौसला नहीं हा

युवराज के बाद इस भारतीय ओपनर को भी हुआ कैंसर, हौसला नहीं हा

नई दिल्ली: कैंसर (Cancer) शब्द सुनते ही मानो आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। जिंदगी एकदम से बदल जाती है। सबकुछ धुंधला सा जाता है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) कैंसर की जंग लड़ चुके हैं। व जीत भी चुके हैं। युवराज ने आईसीसी वर्ल्ड कप 2011 में टीम इंडिया को चैंपियन बनाया। मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे व उसके बाद खुलासा किया कि उन्हें कैंसर है। हालांकि उसके बाद उन्होंने उपचार के बाद कैंसर को हराकर मैदान पर फिर से वापसी की। मगर कैंसर को हराकर मैदान पर वापसी करने वाले युवराज अकेले भारतीय खिलाड़ी नहीं हैं।

दरअसल, इस खिलाड़ी को 15 वर्ष की आयु में ब्लड कैंसर हो गया था। छोटी सी आयु में दूसरे स्टेज का कैंसर होने के बाद उनकी जिदंगी मानो क्रिकेट के मैदान को पीछे छोड़कर अस्पतालों के कमरों तक में सिमट गई। मगर उन्होंने पराजय नहीं मानी व पूरी तरह अच्छा होने के तीन वर्ष बाद जब रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) में डेब्यू किया तो शानदार शतक ठोककर न केवल विरोधी टीम के हौसले तोड़े, बल्कि कैंसर को भी एक तरह से ठेंगा दिखा दिया। उत्तराखंड के ओपनर कमल सिंह कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के विरूद्ध रणजी ट्रॉफी डेब्यू करते हुए शानदार 101 रन की पारी खेली। 160 गेंदों की पारी में उन्होंने 17 चौके भी जड़े।

15 वर्ष का था जब

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, प्रयत्न के दिनों को याद करते हुए कमल सिंह कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) ने बताया, 'पिता के साथ ब्लड चैकअप के लिए गया था। प्लेटलेट्स काउंट तेजी से गिरते देख चिकित्सक ने पिता को सलाह दी कि आगे के उपचार के लिए नोएडा चले जाएं। तब मेरी आयु 15 वर्ष थी। नोएडा में सारे टेस्ट किए। व जब रिपोर्ट आई तो पिता का माथा सन्न रह गया। मुझे ब्लड कैंसर था। हालांकि मेरे परिवार ने मुझे बीमारी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया। तब मैं जल्दी-जल्दी बीमार हो जाया करता था व प्लेटलेट्स तेजी से गिरते थे। नोएडा के अस्पताल में मुझे बताया गया कि मेरे खून में संक्रमण है। मगर मैंने डॉक्टरों को कहते सुना कि मुझे कैंसर (Cancer) है। मैंने खुद से बोला कि अब मेरा उपचार प्रारम्भ हो गया है व मुझे चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मैं क्रिकेट खेल सकूंगा या नहीं, तब ये बातें मेरे दिमाग में नहीं थी। ' कमल के पिता सेना के रिटायर्ड हवलदार हैं। उन्होंने कभी भी कमल को निगेटिव नहीं होने दिया।

आधे शरीर में घुस गया था कैंसर
कमल सिंह कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) ने कहा, 'जब मुझे इसका पता चला तो कैंसर दूसरी स्टेज पर पहुंच चुका था। मुझे बताया गया कि मेरा 47 फीसदी शरीर इससे प्रभावित हो चुका है। उत्तर प्रदेश के लिए अंडर14 वर्ग के ट्रायल में 40 दावेदारों के बीच से चुने गए, जबकि अंडर 16 के ट्रायल में 60 दावेदारों के बीच से चुने गए कमल सिंह कनियाल कभी अंतिम टीम में स्थान नहीं बना सके। कैंसर ने ये भी सुनिश्चित कर दिया कि अगले वर्ष भी उनके लिए करने को बहुत कुछ नहीं है।

कीमोथेरेपी के पांच राउंड
कमल कनियाल (Kamal Singh Kaniyal) के अनुसार, डॉक्टरों ने बोला कि रिकवरी के मौका अच्छे हैं। कीमोथेरेपी के पांच राउंड हुए। मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि इसका क्या मतलब होता है। मेरे आसपास सकारात्मक लोग रहते थे, जो मुझे खुश व प्रोत्साहित रखते थे। मेरा परिवार मुझे टाइगर कहता था। लड़का बहुत ही बहादुर है, बस ये लाइन सुनकर जोश आ जाता था।

छह महीने बाद डॉक्टरों ने कहा- अब तुम अच्छा हो
कैंसर (Cancer) का उपचार छह महीने तक चला। इसके बाद डॉक्टरों ने बोला कि अब तुम अच्छा हो, लेकिन घर पर एहतियात बरतनी होगी। इसके बाद मुझे पूरी तरह अच्छा होने में एक वर्ष का वक्त लग गया। इस खतरनाक बीमारी से उबरने के बाद कमल ने जो पहला कार्य किया, वो मैदान पर उतरने का था।

1 दोहरे शतक समेत तीन सेंचुरी, कुल 800 रन ऐसे पहुंचे रणजी ट्रॉफी टीम में
जब उत्तराखंड की टीम अंडर19 मुकाबले खेल रही थी तब कमल सिंह ने टीम में वापसी की। तब तक उत्तराखंड की खुद की क्रिकेट एसोसिएशन बन चुकी थी। तीन वर्ष पहले लोढ़ा समिति की सिफारिशों से पहले उत्तराखंड एसोसिएशन का पूर्णकालिक मेम्बर नहीं था। मगर समिति की सिफारिशों ने उसके लिए रास्ते खोल दिए व स्‍थानीय क्रिकेटरों को यूपी की दया पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। कमल सिंह ने अंडर19 मुकाबलों में एक दोहरे शतक, दो शतक व तीन अर्धशतक की मदद से बनाए 800 से ज्यादा रनों की बदौलत रणजी टीम में स्‍थान हासिल किया।

आगे का किसने देखा है
अंडर19 टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कमल सिंह ने रणजी टीम में स्थान बनाई। बारामती में महाराष्ट्र के विरूद्ध डेब्यू करते हुए शतक लगाने के बाद जब उनसे भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'आगे का किसने देखा है। जैसा चल रहा है, चलता रहे। '

उत्तराखंड को 270 रनों का लक्ष्य
रणजी ट्रॉफी के इस मुकाबले में महाराष्ट्र की टीम पहले खेलते हुए 49.4 ओवर में 247 रनों पर सिमट गई। जवाब में उत्तराखंड ने 38 ओवर में ऑलआउट होने से पहले 251 रन बनाए। कमल सिंह कनियाल के अतिरिक्त सौरभ रावत ने 49 रन की पारी खेली। इसके बाद महाराष्ट्र ने दूसरी पारी में 313 रन बनाए व उत्तराखंड को 270 रनों का लक्ष्य दिया।


World Test Championship: न्यूजीलैंड ने जीत से लगाई छलांग, हिंदुस्तान को पहली पराजय से झटका!

World Test Championship: न्यूजीलैंड ने जीत से लगाई छलांग, हिंदुस्तान को पहली पराजय से झटका!

भारतीय टीम को मेजबान न्यूजीलैंड के विरूद्ध पहले टेस्ट मैच में 10 विकेट से पराजय का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (ICC World Test Championship) में हिंदुस्तान की जीत का सिलसिला थम गया। यह टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में हिंदुस्तान की पहली पराजय है। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड (New Zealand) ने चैंपियनशिप में दूसरी जीत दर्ज की। इस जीत से वह चैंपियनशिप में पांचवें जगह पर पहुंच गया है।

आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (World Test Championship) पिछले वर्ष प्रारम्भ हुई है। दो वर्ष तक चलने वाली इस चैंपियनशिप में हिंदुस्तान ने आठ मैच खेले हैं। भारतीय टीम (Team India) ने न्यूजीलैंड से मुकाबला गंवाने से पहले इस चैंपियनशिप में लगातार सात मैच जीते थे। इसकी बदौलत ही वह प्वाइंट टेबल में 360 अंक लेकर पहले नंबर पर काबिज है।

न्यूजीलैंड से हारने के बाद हिंदुस्तान के लिए बड़ा झटका है। हिंदुस्तान व न्यूजीलैंड की सीरीज में चैंपियनशिप के 120 अंक दांव पर हैं। सीरीज में एक मैच जीतने पर 60 मिलने हैं। हारने पर कोई अंक नहीं मिलेगा। न्यूजीलैंड ने हिंदुस्तान को हराकर 60 अंक हासिल कर लिए हैं। इसकी बदौलत वह छठे जगह से पांचवें जगह पर पहुंच गया है। उसके छह मैचों में दो जीत के साथ 120 अंक हैं।

भारत ने पहला मैच गंवाने के साथ ही 60 अंक हासिल करने का मौका भी गंवा दिया। आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप (ICC Test Championship) का फाइनल सबसे अधिक अंक हासिल करने वाली दो टीमों के बीच खेला जाएगा। इस कारण इस टूर्नामेंट का हर मैच जरूरी है। अगर हिंदुस्तान न्यूजीलैंड से दोनों टेस्ट मैच जीत लेता तो उसके 480 अंक हो जाते। लेकिन अब वह सीरीज में अधिकतम एक मैच ही जीत सकता है। यानी, अगर हिंदुस्तान अगला मैच जीत भी ले, तो भी उसके अधिकतम 420 अंक ही हो पाएंगे।

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